हैदराबाद में YFLO का ‘कॉन्शियस वीव्स एंड विजडम’ कार्यक्रम, वस्त्र विरासत पर जोर

हैदराबाद, यंग फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन द्वारा आज ‘कॉन्शियस वीव्स एंड विजडम’ शीर्षक से कार्यक्रम का आयोजन बंजारा हिल्स स्थित होटल पार्क हयात में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की जीवंत वस्त्र विरासत का जश्न मनाने के लिए कारीगरों, उद्यमियों और ग्राहकों को एक मंच पर लाना था।

यंग फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन की अध्यक्ष पल्लवी जैन ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि हम जो कपड़ा पहनते हैं, वह केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं होता, बल्कि वस्त्र विरासत, कहानियों और इतिहास की एक यात्रा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वस्त्र के निर्माण में हमारी संस्कृति का गौरव और परंपराओं का वैभव समाया हुआ है। उन्होंने कॉन्शियस डिजाइन का समर्थन करने और कारीगरों को कहानियाँ साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करने के वाईएफएलओ के मिशन पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में भुज, कच्छ के तीसरी पीढ़ी के बांधनी कारीगर अब्दुल वहाब हैदरअली खत्री तथा सौगात चिकनकारी की संस्थापक नव्या सचदेवा ने विचार साझा किए। अब्दुल वहाब ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं था।

वह इस वस्त्रकला परंपरा को संरक्षित करना चाहते थे। हालाँकि नकली और मशीन से बनी बांधनी भी उपलब्ध है, लेकिन हमारी बांधनी इस कला के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कोविड ने नए ऑनलाइन बाजार खोले हैं। आज माँग पहले से कहीं ज्यादा है। नव्या सचदेवा ने कहा कि शिल्प ने उन्हें एक पहचान दी है। उन्होंने कहा कि कारीगरों को वह सम्मान और मेहनताना मिलना चाहिए, जिसके वह हकदार हैं। उन्होंने प्रतिभागियों के लिए व्यावहारिक चिकनकारी कार्यशाला का संचालन किया।

वस्त्र कलाकारों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के बुनकरों का भविष्य उज्ज्वल है और उनकी माँग लगातार बढ़ रही है। सत्र का संचालन पल्लवी जैन तथा साहरा कि संस्थापक साची बहल ने करते हुए आधुनिक तथा तेजी से बदलती दुनिया में भारत की समृद्ध वस्त्र परंपराओं को संरक्षित करने की चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में लगभग 70 प्रतिभागियों ने वस्त्र कारीगरों और उनके शिल्प विरासत की कहानियों पर चर्चा की।

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