स्वास्थ्य रहना है तो खाएं मोटे अनाजों की रोटी
दालों, सब्जियों और डेयरी प्रोडक्ट्स में बढ़ती मिलावट के कारण हमारे पास खाने के विकल्प कम बचते हैं। सब्जियों और फलों की गुणवत्ता जब कम हो रही है तो हमारे सामने मिलेट्स यानी मोटे अनाज का विकल्प है। जिसे हम पिछले लगभग 5000 सालों से खा रहे हैं। हमारे देश के लिए मोटे अनाजों का इस्तेमाल काफी पुराना है। हड़प्पा सभ्यता में लोगों द्वारा ज्वार जैसे मोटे अनाज का इस्तेमाल किए जाने के सबूत मौजूद हैं।
मोटा अनाज हमारे पाचनतंत्र के लिए, रगो में बहते खून के लिए, एंजाइम्स के लिए, हार्मोन्स के लिए और सबसे बड़ी बात हमारी जीभ के स्वाद के लिए भी फायदेमंद है। एक ज़माना था, जब इन मोटे अनाजों को गरीबों द्वारा ही खाया जाता था। लेकिन लाइफस्टाइल संबंधी बढ़ती बीमारियों के कारण अब मोटा अनाज अमीरों की पहली पसंद बन चुका है।
चिकित्सक अब गेहूं के बजाय लोगों को मोटे अनाज से बनी रोटी खाने की सलाह देते हैं। यही वजह है कि अब हमारे देश में ही नहीं, पूरी दुनिया में मोटे अनाज से बनी रोटियों को गेहूं, मैदे पर तरजीह दी जा रही है। आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन डी से भरपूर इन अनाजों से बनी रोटी हमारे लिए फायदेमंद है।
रागी की रोटी
इसकी रोटी पूरे सालभर खायी जा सकती है। बारिश के दौरान यह ज्यादा फायदेमंद होती है। इससे बनी रोटी खाने से हड्डियां मजबूत बनती हैं और कैल्शियम से भरपूर इस रोटी को बनाने के लिए रागी के आटे को उबलते पानी में तिल, तेल डालकर उसका सॉट आटा गूंथकर रोटी बेलकर तवे पर सेक लें।

बाजरे की रोटी
रक्त संचार के लिए बाजरे के आटे की बनी रोटी हमारे लिए काफी फायदेमंद होती है। आयरन से भरपूर बाजरा रोटी बनाने के लिए बाजरे के आटे को गर्म पानी से गूंथना चाहिए। बाजरे की तासीर गर्म होती है, इसलिए बाजरे की रोटी सर्दियों के लिए उपयुक्त है और इसे गुड़ और घी के साथ खाना चाहिए।

जौ की रोटी
पाचनशक्ति को मजबूत बनाने के अलावा फाइबर से भरपूर जौं की रोटी से पेट साफ रहता है। कब्ज दूर होता है। जौं के आटे में आधा चम्मच दही और तेल मिलाकर गर्म पानी से इसे सॉफ्ट गूंथना चाहिए।

ज्वार की रोटी
ज्वार गर्मियों के लिए उपयुक्त है। ज्वार की रोटी में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो इसे विशिष्ट बनाते हैं। इसमें प्रोटीन, सेलेनियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो थायरॉयड फंक्शन के लिए लाभकारी होते हैं। ज्वार की रोटी बनाने के लिए आटे में नमक और तेल डालकर गर्म पानी से मुलायम गूंथना चाहिए।
गेहूं की रोटी
हमारे देश में सबसे ज्यादा लोग प्रतिदिन गेहूं की रोटी ही खाना पसंद करते हैं। इसमें प्रोटीन और विटामिन डी काफी अधिक होते हैं। गेहूं की रोटी बनाने के लिए आटे को सादा पानी के साथ गूंथना चाहिए। गेहूं में ग्लूटेन होता है, इस वजह से इसे खाने के लिए ज्यादा सही नहीं माना जाता।
सत्तू के आटे की रोटी
सत्तू गर्मियों के लिए सबसे ज्यादा खाया जाने वाला खाद्य पदार्थ है। यह लू से बचाता है। इसमें प्रोटीन काफी मात्रा में होता है। इसकी तासीर ठंडी होती है। सत्तू की रोटी बनाने के लिए सत्तू का आटा लेकर उसमें अजवाइन, गर्म पानी, तेल डालकर गूंथना चाहिए।
चना या बेसन की रोटी
चना और बेसन की रोटी को सेहत के लिए ठंडा माना जाता है। यह कफ और पित्त को शांत करती है। चना या बेसन की रोटी को बनाने के लिए इसे गेहूं के साथ मिलाकर या अलग से गूंथना चाहिए।
मक्का की रोटी
वजन घटाने में सहायक, एनीमिया और कब्ज जैसी समस्याओं में फायदेमंद, फाइबर, विटामिन और खनिज लवणों से भरपूर पाचनशक्ति के लिए फायदेमंद मक्के की रोटी ब्लड प्रेशर को तो कंट्रोल करती है, थायरॉयड फंक्शन में सुधार करने वाली ग्लूटेन फ्री, शरीर को ऊर्जा देने वाली पोषक तत्वों से भरपूर मक्का की रोटी सर्दियों में खायी जाती है। इसे गुड़ और घी के साथ खाएं तो यह ज्यादा फायदा पहुंचाती है। मक्का की रोटी बनाने के लिए मक्का के आटे को थोड़ा गर्म पानी से गूंथना चाहिए।
कूट्टू के आटे रोटी
यह अनाज नहीं है बल्कि एक प्रकार के फल के बीज से तैयार किया जाता है। ग्लूटेन फ्री, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज से भरपूर कूट्टू के आटे में कैल्शियम, जिंक, कॉपर, मैग्नीशियम, फास्फोरस और विटामिन बी जैसे पोषक तत्व भी होते हैं। इसमें मौजूद फाइबर, कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर को कम करता है। कूट्टू के आटे की रोटी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है।
-राजकुमार दिनकर
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