फ़रिश्ते की याद में : राजेश बादल को जगजीत सिंह राष्ट्रीय सम्मान

सारा संसार जगजीत सिंह की ग़ज़लों पर झूमता है। उन्हें ग़ज़ल शिरोमणि यूँ ही नहीं कहा जाता। हमारे बीच से गए उन्हें कोई डेढ़ दशक हो गया, लेकिन हमें अलविदा कहने से क़रीब तीन दशक पहले से वे ग़ज़ल गायकों में शिखर पर थे और आज भी चोटी पर हैं। वे राजस्थानी थे और यह प्रदेश उनकी सांसों में धड़कता था। उनका जन्म श्रीगंगानगर में हुआ और बचपन बीकानेर में बीता। जयपुर समेत अनेक शहरों में जब भी उनके शो होते तो संगीत रसिक भागे आते थे। राजस्थान के लोग आज भी उनको उतना ही प्यार करते हैं। अपने इस लाडले बेटे को याद करने के लिए हाल ही में जयपुर में दो दिन का जलसा हुआ।
पहले दिन जवाहर कला केंद्र में विकल्प के बैनर तले कार्पाम हुआ तो बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। संगीत प्रेमी श्रोताओं को कुर्सियाँ न मिलने पर फर्श पर बैठना पड़ा। अमेरिका से आए गायक दिलजीत सिंह ने जगजीत सिंह की ग़ज़लों से तान छेड़ी तो गुलाबी नगर का रंगायन सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनके अलावा दूर-दूर से आए कलाकारों ने जगजीत की ग़ज़लों को पेश किया तथा उन पर नृत्य प्रस्तुतियाँ पेश कीं। इस कार्पाम की जान और शान थे, जगजीत के सगे बड़े भाई सरदार जसवंत सिंह। उन्होंने ही जगजीत को संगीत सीखने के लिए हारमोनियम तथा संगीत सीखने का माहौल दिया।
जसवंत सिंह ही किशोर जगजीत को पंजाब के जालंधर कॉलेज में एडमिशन कराने ले गए थे। वहां से ही जगजीत के गायन को पंख लगे। कार्पाम में छोटे पर्दे पर बायोपिक बनाने वाले इकलौते फिल्मकार और राज्य सभा टीवी के संस्थापक संपादक राजेश बादल को जगजीत सिंह राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया गया। राजेश बादल वर्षों तक जगजीत सिंह के संपर्क में रहे। उन्होंने जगजीत सिंह की ज़िंदगी पर एक-एक घंटे की पाँच िफल्में बनाई हैं। अभी तक उनकी जीवन-गाथा इस तरह से कहीं नहीं आई है। इन फिल्मों को देश-विदेश के लगभग 50 लाख लोग देख चुके हैं।










जरूरतमंदों की मदद में जगजीत सिंह की दरियादिली का खुलासा
राजेश बादल हर उस स्थान पर गए, जहाँ से जगजीत का रिश्ता रहा। इसके अलावा उन्होंने जगजीत के ज़िंदगीनामे पर एक किताब लिखी है। जगजीत पर लिखी गई अब तक की यह सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है। इसका शीर्षक है- कहाँ तुम चले गए : दास्तान ए जगजीत। एक चर्चा में राजेश बादल ने बताया कि उनकी नज़र में जगजीत सिंह एक देवदूत या फ़रिश्ते से कम नहीं थे। उनके अनेक रूपों को हम नहीं जानते। वे गायक से भी ऊपर बहुत बड़े इंसान थे। जगजीत सिंह के एक मित्र जसबीर सिंह के हवाले से उन्होंने बताया कि हर रविवार को जगजीत सिंह एक भारी-भरकम बैग लेकर आते थे।

उसमें लाखों रुपयो से भरे ल़िफ़ाफे होते थे। जगजीत सिंह के हाथ में एक लंबी सूची होती थी। वे उस सूची में दर्ज़ हर नाम के घर-घर जाते और उन्हें लिफाफा देकर लौट आते थे। इन ज़रूरतमंदों में किसी को मकान की किस्त भरनी होती थी, तो किसी को किराया देना होता था, किसी को बेटी का ब्याह करना होता था तो किसी को बेटे की फीस भरनी होती थी। यह सिलसिला एक दो सप्ताह नहीं, कई साल चला। इस तरह करोड़ों रुपये जगजीत ने ज़रूरतमंदों को बाँट दिए। ऐसा करने वाला कोई देवदूत या फ़रिश्ता ही हो सकता है। जगजीत उत्सव के दूसरे दिन वसुंधरा नाट्यागार में राजेश बादल का विशेष शो दास्तान ए जगजीत हुआ। इसमें अपनी फिल्मों के अंश दिखाकर राजेश बादल ने जगजीत सिंह की पूरी कहानी सुनाई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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