डेटा सेंटर का पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा है भारत, बिजली की कोई कमी नहीं : गोयल

नयी दिल्ली, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि पर्याप्त बिजली उपलब्धता और 500 गीगावाट की राष्ट्रीय ग्रिड क्षमता के चलते भारत डेटा सेंटर के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है। गोयल ने ऊर्जा क्षेत्र पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश में बिजली की कोई कमी नहीं है और बढ़ती मांग को पूरा करने की पूरी क्षमता मौजूद है।

गोयल ने कहा कि भारत की 500 गीगावाट की राष्ट्रीय ग्रिड दुनिया की सबसे बड़ी ग्रिडों में से एक है। गोयल ने कहा कि यूरोप के पास राष्ट्रीय ग्रिड नहीं है। और अमेरिका के पास भी राष्ट्रीय ग्रिड नहीं है, लेकिन भारत के पास राष्ट्रीय ग्रिड है। इसी कारण भारत डेटा सेंटर के लिए पसंदीदा गंतव्य है। आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर और वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) के विस्तार की योजनाओं के बीच यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लोगों, किसानों, उद्योग और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की बिजली जरूरतें पूरी हों।

वैश्विक टेक कंपनियों का भारत में बड़े डेटा सेंटर निवेश का रुझान

गोयल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) सहित कई वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों ने भारत में बड़ा निवेश करने में रुचि दिखाई है। अक्टूबर में गूगल ने आंध्र प्रदेश में कृत्रिम मेधा (एआई) अवसंरचना के विकास के लिए 15 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इस परियोजना के तहत गूगल अदाणी समूह के साथ मिलकर गीगावाट स्तर का डेटा सेंटर स्थापित करेगी जिससे राज्य में 5,000–6,000 प्रत्यक्ष और 20,000–30,000 कुल रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

पिछले सप्ताह, एडब्ल्यूएस ने भी तेलंगाना में अगले 14 वर्षों के भीतर डेटा सेंटर के विस्तार के लिए सात अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की। इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में एआई-केंद्रित भविष्य के लिए बुनियादी ढांचे और स्वायत्त क्षमताओं के निर्माण में 17.5 अरब डॉलर के निवेश की योजना का ऐलान किया था। गोयल ने कोयला-आधारित ताप विद्युत क्षमता बढ़ाने की योजना पर कहा कि यह कदम देशवासियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।

2047 तक विकसित भारत के लिए वैश्विक उदाहरण बनेगा

गोयल ने कहा कि भारत एक विकासशील देश है और उसे ऊर्जा बदलाव के लिए कम समय तथा कम लागत वाली ऊर्जा की जरूरत है। कोयला उत्पादन बढ़ाने से आयात पर निर्भरता और कम होगी। मंत्री ने यह भी बताया कि कोयले से सिंथेटिक गैस जैसे विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है। गोयल ने कहा कि 2035 तक ताप विद्युत की अनुमानित जरूरत बढ़कर 307 गीगावाट हो सकती है।

इसके साथ ही गोयल ने कहा कि बिजली उत्पादन कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और चार साल पहले 1.4 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में रही कंपनियों पर अब सिर्फ 6,500 करोड़ रुपये का कर्ज बचा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए भारत का ऊर्जा क्षेत्र पैमाने, गति और स्थिरता के संतुलन का वैश्विक उदाहरण बनेगा। इस बीच, बिजली राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि देश में डेटा सेंटरों की मौजूदा बिजली आवश्यकता लगभग एक गीगावाट है, जो वित्त वर्ष 2031-32 तक बढ़कर 13.56 गीगावाट तक पहुंच जाने का अनुमान है। (भाषा)

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