देश की वृद्ध आबादी के पास स्वास्थ्य बीमा की कमी : रिपोर्ट

हैदराबाद, हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह तथ्य सामने आया है कि देश में मोतियाबिंद की सर्जरी कराने वाले बुजुर्गों के एक बड़े हिस्से के पास पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा नहीं है, जिससे दृष्टि संबंधी समस्याएं और वित्तीय संकट दोनों बढ़ जाते हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित यह अध्ययन भारत की वृद्धावस्था में जनसंख्या के एक बड़े हिस्से में बीमा अपनाने के रुझानों का विस्तृत मूल्यांकन प्रस्तुत करता है, जिसमें मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा को नेत्र देखभाल के एक विकल्प के रूप में उपयोग किया गया है।

अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार मोतियाबिंद की सर्जरी कराने वाले भारत के वृद्धों के एक बड़े वर्ग के पास पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा नहीं है। लगभग चालीस हजार मरीजों 10 साल के आंकड़ों पर आधारित यह शोध बढ़ती उम्र के साथ खासकर 80 साल से अधिक उम्र के लोगों में हाल ही में सरकारी स्वास्थ्य बीमा कवरेज के बावजूद, बीमा लेने में भारी गिरावट को दर्शाता है।
जानकारी देते हुए बताया गया कि यह अध्ययन में पूरी तरह से सब्सिडी वाली देखभाल प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को इसमें शामिल नहीं किया गया।

आयु, स्वास्थ्य बीमा के उपयोग, स्वास्थ्य बीमा के प्रकार (सरकारी या निजी) और मोतियाबिंद सर्जरी के लिए भुगतान के तरीके से संबंधित आंकड़े एकत्र किए गए। बीमा के उपयोग और दृष्टि संबंधी परिणामों को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन लॉजिस्टिक रिग्रेशन विश्लेषण का उपयोग करके किया गया। इस अध्ययन में चार राज्यों तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा तथा कर्नाटक में 70 साल से अधिक उम्र के मोतियाबिंद की सर्जरी कराने वाले 38,387 मरीजों का एक बहुकेंद्रीय व पूर्वव्यापी समूह विश्लेषण है।

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वृद्धों में स्वास्थ्य बीमा कवरेज की असमानता चिंताजनक

विश्लेषण में पाया गया कि केवल 16.07 प्रतिशत के पास किसी न किसी प्रकार का बीमा कवरेज था। बढ़ती उम्र के साथ यह सीमित कवरेज भी कम होता गया। 70 से 74 वर्ष की आयु के लोगों में यह 17.5 प्रतिशत से घटकर 85 वर्ष से अधिक आयु वालों में 10 प्रतिशत से भी कम तथा 90 वर्ष से अधिक आयु वालों में 7.14 प्रतिशत रह गया। इसके अलावा एक उल्लेखनीय लैंगिक असमानता भी देखी गई। जहाँ सभी आयु वर्गों में वृद्ध पुरुषों (19.11 प्रतिषत) ने महिलाओं (12.43 प्रतिशत) की तुलना में अधिक बीमा कवरेज लिया। यह निष्कर्ष दर्शाता है कि हमारे देश में बुजर्गों के लिए स्वास्थ्य बीमा का असमान रूप से अभाव है।

एलवी प्रसाद नेत्र संस्थान में नेत्र रोग विशेषज्ञ तथा इस अध्ययन के प्रथम लेखक डॉ. बृजेश टक्कर ने कहा कि यह अध्ययन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि पर्याप्त बीमा कवरेज समय पर स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करने की संभावनाओं को बढ़ाता है और साथ ही बेहतर परिणामों का लाभ भी देता है। उन्होंने कहा कि यह निष्कर्ष केवल मोतियाबिंद सर्जरी के लिए ही नहीं, बल्कि सभी प्रकार के स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के लिए भी हैं। हमारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को उन सभी लोगों का बीमा करना चाहिए, जो वित्तीय असुरक्षा के प्रति संवेदनशील हैं।

अध्ययन में शामिल डॉ. राजा नारायणन ने कहा कि हमनें पाया कि भारत की वृद्ध आबादी में बीमा कवरेज समान रूप से कम है। वृद्धावस्था में नेत्र देखभाल का स्वास्थ्य बोझ बढ़ने की आशंका है, फिर भी वृद्ध आबादी में चिकित्सा बीमा का उपयोग कम बना हुआ है। निष्कर्ष दर्शाते हैं कि सरकारी बीमा कार्यक्रमों के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज आबादी में स्वास्थ्य समानता प्राप्त करने की कुंजी है।

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