वैश्विक संकट में भारत का दमदार प्रदर्शन : जयशंकर
रायपुर, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष की ओर इशारा करते हुए शनिवार को कहा कि वैश्विक सकंट के बीच भारत मजबूती से उभरा है और हालात का डटकर मुकाबला किया है। जयशंकर ने यहां स्थित भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने घरेलू और बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर फरवरी में हमले शुरू किए जाने से उत्पन्न पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति को प्रभावित किया है तथा हाइड्रोकार्बन की कमी पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण की व्यापकता के चलते संघर्ष का असर दूर-दराज के समाजों पर भी गहराई से पड़ा है।
जयशंकर ने कहा, ‘‘अब हम दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि हाल ही में आए कई वैश्विक झटकों ने हमारी सहनशक्ति की परीक्षा ली है, और भारत उनसे मजबूती से उबरकर बाहर निकला है। हमने घरेलू और बाहरी, दोनों तरह की चुनौतियों का काफी हद तक सफलतापूर्वक सामना किया है।’’
आत्मनिर्भर भारत पर जोर, मजबूत क्षमताओं की जरूरत
जयशंकर ने कहा कि ज्यादा समावेशी विकास, प्रतिनिधि राजनीति और निर्णायक नेतृत्व ने एक नयी नींव रखी है। विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘अधिक समावेशी विकास, प्रतिनिधि राजनीति और निर्णायक नेतृत्व ने एक नयी नींव रखी है, जिससे हम सभी अब ऊंची उम्मीदें रख सकते हैं। हमने न सिर्फ डिजिटल क्रांति को पूरे उत्साह के साथ अपनाया है, बल्कि असल में इसे अपने जीवन में एक मकसद के साथ लागू भी किया है। यहां तक कि कई विकसित समाजों ने भी ऐसा नहीं किया है।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘मैंने जिन वैश्विक रुझानों का जिक्र किया है, उनकी रोशनी में राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण करना अब और भी ज्यादा जरूरी हो गया है। बड़े देशों के लिए तो यह बात खास तौर पर सच है। आप देखेंगे कि विकसित दुनिया में भी, वैश्वीकरण के पुराने मंत्रों की जगह अब आत्मनिर्भरता के प्रति एक नयी जागरूकता ने ले ली है।’’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘भारत में हमारे लिए, यह भावना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के रूप में व्यक्त होती है। इसका महत्व तब साफ नजर आता है जब बात भोजन, स्वास्थ्य या ऊर्जा सुरक्षा की हो, या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा की। हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि हम ज्यादा से ज्यादा क्षमताएं अपने नियंत्रण में सुरक्षित कर सकें।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘जाहिर है, कुछ क्षेत्र दूसरों के मुकाबले ज्यादा मुश्किल होंगे। ऐसे मामलों में, इसका हल भरोसेमंद या विश्वसनीय साझेदारियों तथा विविध स्रोतों से आपूर्ति में निहित है। लेकिन आखिरकार मजबूत राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण करने की कोई अनदेखी नहीं कर सकता। जोखिम कम करने और असल में अपनी स्थिति को मजबूत बनाने का यह सबसे असरदार तरीका है।’’
बदलती वैश्विक व्यवस्था पर जयशंकर की चेतावनी
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था बदल रही है, जिसमें देशों की सापेक्ष शक्ति और प्रभाव में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में मौजूदा उथल-पुथल कई मायनों में संरचनात्मक है। विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया आज एक ऐसे माहौल में खुद को सुरक्षित रखने की चुनौती का सामना कर रही है, जो लगातार अस्थिर और अप्रत्याशित होती जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में इस समय जो उथल-पुथल मची है, वह कई मायनों में ढांचागत भी है। वैश्विक व्यवस्था हमारी आंखों के सामने ही बदल रही है, जिसमें देशों की सापेक्ष शक्ति और प्रभाव में स्पष्ट बदलाव देखे जा सकते हैं। कुछ समाजों की राजनीति के लिए इन बदलावों को स्वीकार कर पाना मुश्किल हो रहा है।’’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, सैन्य क्षमताओं, कनेक्टिविटी और संसाधनों के क्षेत्र में हो रहे नए विकासों ने, लगातार बढ़ते प्रतिस्पर्धी माहौल में, जोखिम उठाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है। आज हर चीज का लाभ उठाया जा रहा है और अगर उसे सीधे तौर पर हथियार नहीं बनाया जा रहा है, तो भी उसका इस्तेमाल एक हथियार की तरह ही किया जा रहा है।’’
अस्थिर दुनिया में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर
जयशंकर ने कहा कि ऐसे में, दुनिया के सामने एक ऐसे माहौल में खुद को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है जो लगातार अस्थिर और अप्रत्याशित होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव के चलते अब जोखिमों से बचाव, जोखिम कम करने और विविधता लाने की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है, चाहे वह कोई व्यावसायिक फैसला हो या फिर विदेश नीति से जुड़ा कोई निर्णय।
घरेलू प्राथमिकताओं की ओर रुख करते हुए, जयशंकर ने राष्ट्र-निर्माण में व्यापार और उद्यम की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘जाहिर है, राष्ट्र-निर्माण एक बेहद जटिल कार्य है जिसके कई आयाम हैं। लेकिन इसका एक ऐसा पहलू जो सभी आयामों से जुड़ा है, वह है हमारे व्यवसायों की मजबूती और उनकी गतिशीलता। आप देखेंगे कि अतीत के उन दशकों की भरपाई करने के हमारे प्रयासों में, एक अहम पहल अब ‘व्यापार करना आसान बनाने’ पर केंद्रित है, यह तभी संभव है, जब इसके लिए अनुकूल माहौल भी अधिक सकारात्मक हो।’’
जयशंकर ने जीवन-यापन में आसानी और अवसरों तक पहुंच में हुए महत्वपूर्ण सुधारों की ओर भी इशारा किया, विशेष रूप से उद्यमियों, स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों के लिए। जयशंकर ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार और कौशल विकास पर बढ़ते जोर ने भारत की मानव पूंजी को और अधिक मजबूत किया है। उन्होंने कोविड महामारी, संघर्षों और जलवायु परिवर्तन को इस दशक की तीन प्रमुख चुनौतियां बताया।
नई पीढ़ी पर जिम्मेदारी, चुनौतियों के बीच नेतृत्व का आह्वान
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘स्नातक होने वाले विद्यार्थियों को खुद को भाग्यशाली समझना चाहिए, क्योंकि यह उस पीढ़ी का हिस्सा है जिसका उद्देश्य विस्तृत भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना है। आप प्रगति के एक ठोस दशक के लाभार्थी हैं। आपने तकनीक और सूचना तक पहुंच से लाभ प्राप्त किया है जो पहले असंभव होता, जो एक पीढ़ी पहले शायद ही सोचा जा सकता था।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘आज, भारत अपनी विकास यात्रा में एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है और आप लोगों का समूह उन लोगों में से होगा जो इस प्रयास का नेतृत्व करेगा। साथ ही, यह भी समझना जरूरी है कि आप लोग ऐसे समय में स्नातक हो रहे हैं जब अभूतपूर्व बदलाव हो रहे हैं।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘इस दशक में तीन चुनौतियां प्रमुखता से उभरकर सामने आई हैं: कोविड महामारी, संघर्ष और जलवायु परिवर्तन। इनमें से प्रत्येक ने हमारे दैनिक जीवन को एक अकल्पनीय हद तक प्रभावित किया है। वास्तव में, इस महामारी ने हमारे काम करने और जीने के तरीके को ही पूरी तरह बदल दिया है, और इसके अपने कुछ सबक भी रहे हैं। जहां तक संघर्षों की बात है, उनका प्रभाव दूर-दराज के समाजों पर भी गहरा पड़ा है, यह इस बात का प्रमाण है कि वैश्वीकरण अब कितना गहरा हो चुका है।’’
जलवायु संकट और ‘ब्रांड इंडिया’ पर जयशंकर का जोर
जयशंकर ने कहा, ‘‘जहां तक जलवायु परिवर्तन का सवाल है, अत्यधिक मौसमी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और हमारे प्राकृतिक आवास का लगातार क्षरण, दोनों ही अल्पकालिक और दीर्घकालिक चिंताएं पैदा करते हैं।’’ स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्री ने उन्हें उस पीढ़ी का हिस्सा बताया जो भारत की विकास यात्रा में योगदान देने के लिए एक विशिष्ट और महत्वपूर्ण स्थिति में है।
जयशंकर ने भारत की विदेश नीति की बदलती भूमिका के बारे में कहा कि यह भारतीय उत्पादकों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने, महत्वपूर्ण संसाधनों और तकनीकों को सुरक्षित करने, तथा विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों का समर्थन करने पर, विशेष रूप से संकट के समय में, ज्यादा से ज्यादा केंद्रित है।
यह भी पढ़े : पीओके को बहुत जल्द भारत में मिला लिया जाएगा: इलयासी
जयशंकर ने कहा, ‘‘यह वैश्विक स्तर पर ‘ब्रांड इंडिया’ को बढ़ावा देता है, जो एक विश्वसनीय और भरोसेमंद भागीदार के रूप में हमारी छवि के लिए जरूरी है।’’ इस दौरान आईआईएम रायपुर के संचालक मंडल के अध्यक्ष पुनीत डालमिया और संस्थान के कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर भी मौजूद थे। (भाषा)
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



