सीएसआईआर-आईआईसीटी में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
हैदराबाद, सीएसआईआर-आईआईसीटी में आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अवसर पर ‘मेरी मातृभाषा, मेरा हस्ताक्षर’ कार्यक्रम की पहल की गई। संस्थान के निदेशक डॉ. डी. श्रीनिवास रेड्डी द्वारा तेलुगु भाषा में नाम के सामने तेलुगु में हस्ताक्षर कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। उन्होंने सभी कार्मिकों से ‘घर में मातृभाषा, कार्यालय में राजभाषा’ मंत्र अपनाने की अपील की।
संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों द्वारा क्रमशः अपनी मातृभाषा में नाम लिखकर हस्ताक्षर किए गए।इसी क्रम में सीएसआईआर-आईआईसीटी द्वारा सीएसआईआर की तीनों प्रयोगशालाओं को मिलाकर संयुक्त हिन्दी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
संस्थान के प्रशासन नियंत्रक एम. आनंद कुमार ने राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा भारतीय भाषाओं में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजभाषा विभाग का सॉफ्टवेयर कंठस्थ का तीसरा संस्करण भारती अनुवाद सारथी हिन्दी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद की सुविधा उपलब्ध करा रहा है।
साथ ही हिन्दी शब्द सिंधु के रूप में विश्व की सबसे विशाल शब्दावली निर्माण की योजना है। एनजीआरआई के प्रशासन नियंत्रक एस. एन्टोनी पीटर राजा ने कहा कि हमारे यहाँ हिन्दी के बेहतर ज्ञानस्रोत व्यक्ति हैं, जो संस्थान के अलावा दूसरे संस्थानों के राजभाषा कार्यान्वयन में मार्गदर्शन के रूप में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
राजभाषा हिन्दी को अपनाने पर अधिकारियों का जोर
प्रशासन नियंत्रक के. रवि कुमार ने राजभाषा कार्यान्वयन की बारीकियों पर चर्चा करते हुए कहा कि वह एक तेलुगुभाषी हैं, पर राजभाषा हिन्दी पर समान पकड़ है। हिन्दी भाषा में टंकण, लेखन आसान है, हमें केवल थोड़ा समय देने की आवश्यकता है। इससे कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
एनजीआरआई के वरिष्ठ हिन्दी अधिकारी सुब्बाराव ने हिन्दी में नोटिंग- ड्राफ्टिंग, पत्राचार लेखन पर अभ्यासगत सत्र का संचालन किया। उन्होंने हिन्दी भाषा की सरलता, सुगमता, संक्षिप्तता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिन्दी में काम करना आसान है, बस शुरूआत की आवश्यकता है। आईआईसीटी के हिन्दी अधिकारी डॉ. सौरभ कुमार ने राजभाषा नीति, नियम और कार्यान्वयन पर विस्तार से अभ्यासगत सत्र का संचालन किया।
सुब्बाराव ने कहा कि जिस तरह एक राष्ट्र के लिए एक झंडे व एक राष्ट्रगान की आवश्यकता है, उसी तरह संघ की राजभाषा के लिए एक राजभाषा की आवश्यकता होती है। हिन्दी उस आवश्यकता को पूरा करती है। एनजीआरआई के हिन्दी अनुवादक डॉ. अजित कुमार, आईआईसीटी के हिन्दी अनुवादक आदर्श कुमार और सीसीएमबी के हिन्दी अधिकारी और अनुवादक क्रमशः नुपूर रानी प्रसाद एवं सविता कुमारी द्वारा अभ्यास सत्र का संचालन किया गया। आदर्श कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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