आईपीएस अधिकारी अभिलाष बिष्ट तेलंगाना में बने रहें : कोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश जारी करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को आदेश दिया कि आंध्र-प्रदेश के विभाजन के दौरान आंध्र-प्रदेश को आवंटित आईपीएस अधिकारी अभिलाष बिष्ट की सेवा तेलंगाना में ही जारी रखी जाए।
अभिलाष बिष्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें केंद्र द्वारा आंध्र-प्रदेश कैडर में शामिल होने के आदेश को बरकरार रखा गया था। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस पी. श्याम कौशी और जस्टिस नंदीकोंडा नरसिंग राव की खण्डपीठ ने शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई की।
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1994 में पश्चिम बंगाल कैडर में हुआ था प्रारंभिक आवंटन
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को गलत वरिष्ठता सूची के कारण आंध्र-प्रदेश में आवंटित किया गया था। उन्हें पहले वर्ष 1994 में पश्चिम बंगाल में आवंटित किया गया था और बाद में केंद्र सरकार ने 1997 में आंध्र-प्रदेश कैडर के एक आईपीएस अधिकारी से उनका विवाह होने के बाद उन्हें आंध्र-प्रदेश कैडर में स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया। विवाह के कारण कनिष्ठ अधिकारी याचिकाकर्ता से पहले आंध्र-प्रदेश कैडर में शामिल हो गए। वरिष्ठता में याचिकाकर्ता के शामिल होने की तारीख को ध्यान में रखा गया। केंद्र ने उनकी दलीलों को सुने बिना एकतरफा आदेश जारी किए।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल पी. नरसिम्हा शर्मा ने कहा कि अखिल भारतीय अधिकारियों के आवंटन से संबंधित विवादों पर इसी तरह की अन्य याचिकाएँ इसी उच्च न्यायालय में लम्बित है। उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए समय माँगा। दलील सुनने के बाद खण्डपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार को अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि याचिका की सुनवाई पूर्ण होने तक तेलंगाना में अभिलाष बिष्ट को बरकरार रखा जाए। इस आदेश के साथ ही मामले की सुनवाई ग्रीष्मकालीन अवकाश तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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