एनडीपीएस अधिनियम के तहत संपत्ति जब्त करना सही
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत संपत्ति जब्त करने का समर्थन देते हुए अपना फैसला सुनाया। यह आरोपी की जिम्मेदारी है कि वह साबित करें कि जो संपत्ति जब्त की गई, उसने वह संपत्ति अपराध से अर्जित धन से नहीं बनाई है। अदालत ने कहा कि इस मामले पर वैकल्पिक अपील करने का अवसर रहने के बावजूद भी विशेष अधिकार के तहत सीधे तौर पर अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत शादनगर पुलिस द्वारा अचल संपत्ति को जब्त करने के लिए जारी किए गए आदेश को रद्द करने का आग्रह करते हुए शादनगर निवासी गुंडूमल्लू वेंकटय्या ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. श्रवण कुमार ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वेदुला वेंकटरमणा ने दलील देते हुए कहा कि फरवरी-2024 के दौरान चार करोड़ रुपये की अचल संपत्ति, चार लाख रुपये बैंक में जमा को सीज कर दिया गया।
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बिना अपील के याचिका, अदालत ने किया इनकार
जानकारी देते हुए बताया गया पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने से पहले ही यह संपत्ति खरीदी गई थी। सरकारी अधिवक्ता महेश राजे ने दलील देते हुए कहा कि पुलिस ने छापे के दौरान दो किलो अफ्राजोलम मादक पदार्थ जब्त किया। इस मादक पदार्थ का उपयोग सेंधी में मिलावट के लिए किया जाता है। एक बोतल सेंधी में 0.25 से 0.5 मिलीग्राम अफ्राजोलम की मिलावट काफी है। आयकर के आँकड़ों के अनुसार, 35 लाख रुपये की आय होने पर एक करोड़ रुपये की अचल संपत्ति कैसे खरीदी गई।
याचिकाकर्ता की पत्नी और पुत्र कोई काम नहीं करते हैं, उनकी कोई आय नहीं है, लेकिन उनके नाम पर संपत्तियाँ खरीदी गई। याचिकाकर्ता के खिलाफ गच्ची बावली में भी मामले दर्ज है। याचिकाकर्ता बार-बार मादक पदार्थों का व्यापार कर रहा है। आय के संबंध में उसके पास किसी प्रकार के कोई सबूत नहीं है और सबूत दिखाए भी नहीं गए।
संबंधित अथॉरिटी में अपील किए बिना 9 माह के पश्चात उच्च न्यायालय की शरण ली गई। दलील सुनने के पश्चात न्यायाधीश ने संबंधित अथॉरिटी द्वारा जारी किए गए आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पारिवारिक आवश्यकताओं और स्वास्थ्य संबंधी खर्च के लिए निचली अदालत में आवेदन कर कुछ रकम प्राप्त करने की बात कहकर याचिका को खारिज करते हुए अपना फैसला सुनाया।
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