होली का त्योहार है

होली के त्योहार में, मन में हो सद्भाव।
हानि किसी की हो नहीं, अच्छा हो बरताव।।

होली का त्योहार है, मन में भरो उमंग।
सब आनंद विभोर हों, ऐसे खेलो रंग।।

बहक न जाना यार, तुम ले होली की आड़।
पार करोगे हद अगर, देगी तुम्हें लताड़।।

गले लगाओ, प्रेम से भेदभाव को भूल।
सद्भावना प्रेम ही है, होली का मूल।।

हास्य व्यंग्य चलता रहे, हर कोई ले आनंद।
गीत ग़ज़ल कविता पढ़ो, और प्रेम के छंद।।

गर पीलोगे यार तुम, हद से ज्यादा भंग।
यहाँ-वहाँ गिर जाओगे, साथ न देगा अंग।।

होली में नेताओं का, मत पूछो तुम हाल।
रंग छोड़ इक-दूजे पर, कीचड़ रहे उछाल।।

नरेंद्र राय

मन आनंद उमंग से, भरता यह त्योहार।
प्रकृति ने हमको दिया, यह सुंदर उपहार।।

यह भी पढे़: प्रेम ही विस्तार है

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