प्रेम ही विस्तार है

यही सच्चा त्योहार है।
मानवता से प्यार है।।
यही हमारा धर्म है,
यही धर्म का सार है।
न द्वेष मन में पालिए,
प्रेम ही उपकार है।
सब जीवों में एक-सा,
बसता सच्चा प्यार है।
नफरत से न कुछ मिला,
प्रेम ही विस्तार है।
दुःख हर लेता प्रेम ही,
जीवन का आधार है।
हाथ बढ़ाकर थाम लो,
यही सच्चा व्यवहार है।
मानवता की राह पर,

चलना ही उद्धार है।
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