पारिवारिक बच्चों को अनाथ बताकर निधियाँ प्राप्त करना अनुचित : हाईकोर्ट

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने परिवार के रहते हुए भी बच्चों को अनाथ बताते हुए कुछ स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा निधियाँ वसूलने के प्रति तीव्र असंतोष जताया। पारिवारिक बच्चों को अनाथ बताते हुए विदेशों से निधियाँ प्राप्त की गई।

स्कॉलरशिप प्राप्त करने के लिए एक विद्यार्थी के नाम का कई देशों में प्रस्ताव भेजने और निधियाँ प्राप्त करने को अनुचित बताया। इस प्रकार के आरोपों का सामना कर रही ऑपरेशन मोबिलाइजेशन (ओएम) ऑफ इंडिया ग्रुप ऑफ चैरिटीस से संबंधित संपत्तियों को अनैतिक क्रियाकलापों से बचाने के लिए उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी किए।

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संपत्तियाँ बेचने की साजिश के आरोप पर याचिका दायर

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध ओएम ग्रुप ऑफ चैरिटीस के संचालकों द्वारा संपत्तियाँ बेचने के लिए साजिश रचने का हवाला देते हुए सिकंदराबाद निवासी गौरीपागा अलबर्ट लॉयल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नगेश भीमपाका ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता जोन्नलागड्डा सुधीर ने दलील देते हुए बताया कि संस्था का संचालन पारदर्शितापूर्ण नहीं है।

विदेशी निधि (नियंत्रण) अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है। इस मामले पर वर्ष 2023 के दौरान जाँच करने पर विदेशी निधि नियंत्रण के विषय पर ध्यान नहीं दिया गया। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि देशों से विदेशी निधियाँ प्राप्त की जा रही है। इस मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा संपत्तियाँ जब्त करने पर संस्था के संचालक संपत्तियाँ बेच रहे हैं।

सीबीआई की ओर से विशेष अधिवक्ता श्रीनिवास कपाटिया ने दलील देते हुए कहा कि सीबीआई को इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने केंद्र व राज्य सरकार के गृह विभाग, सीबीआई, डीजीपी, सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, ओएम ग्रुप ऑफ चैरिटीस को नोटिस जारी की। आरोपों का सामना कर रही संस्था की संपत्तियों को अवैध क्रियाकलापों से बचाने के लिए न्यायाधीश ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए मामले की सुनवाई 23 अप्रैल तक स्थगित कर दी।

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