रजत शर्मा मानहानि मामले में जयराम रमेश, पवन खेड़ा, रागिनी नायक तलब
नई दिल्ली। इंडिया टीवी के चेयरमैन और वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश को समन जारी किया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए कहा है कि मामले में आगे की कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
साकेत कोर्ट की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास देवंशी जन्मेजा ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धाराओं 465 (जालसाजी), 469 (मानहानि के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का इस्तेमाल), 499 और 500 (मानहानि) के तहत कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया।
सोशल मीडिया पोस्ट को बताया मानहानिकारक
अदालत ने 27 जुलाई को समन जारी करते हुए अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर ऐसे बयान और पोस्ट प्रकाशित किए, जिनका उद्देश्य शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था।
कोर्ट ने कहा,
“ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी व्यक्तियों ने X पर अपने बयानों और प्रकाशनों के माध्यम से, जिन्हें आम जनता द्वारा पढ़ा जाना स्वाभाविक था, शिकायतकर्ता के खिलाफ मानहानिकारक आरोप लगाए, जिससे उनकी छवि को ठेस पहुंची।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस और कथित छेड़छाड़ वाले वीडियो का मामला
रजत शर्मा की शिकायत के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनके खिलाफ यह आरोप लगाया कि उन्होंने एक लाइव टीवी डिबेट के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
शिकायत में कहा गया है कि आरोपों के समर्थन में एक संशोधित और छेड़छाड़ किया हुआ वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया, जिसमें कैप्शन और टेक्स्ट के जरिए ऐसे शब्द जोड़े गए, जो मूल लाइव टेलीकास्ट का हिस्सा नहीं थे। वीडियो के साथ यह दिखाया गया कि कथित आपत्तिजनक शब्द रजत शर्मा ने रागिनी नायक से कहे थे।
रीट्वीट और आरोपों के समर्थन का दावा
शिकायत के अनुसार, इस वीडियो को पहले रागिनी नायक द्वारा पोस्ट किया गया और बाद में पवन खेड़ा और जयराम रमेश ने इसे रीट्वीट कर आरोपों का समर्थन किया। शर्मा का आरोप है कि तीनों नेताओं ने यह जानते हुए भी वीडियो साझा किया कि उसमें छेड़छाड़ की गई है।
कोर्ट: प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की मंशा स्पष्ट
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानहानिकारक हैं और इनसे शिकायतकर्ता की चार दशक से अधिक की पत्रकारिता की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इन पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर रजत शर्मा को बड़े पैमाने पर अपमानजनक टिप्पणियों और व्यक्तिगत हमलों का सामना करना पड़ा, जिससे यह साफ होता है कि उनकी सार्वजनिक छवि को ठेस पहुंची।
जालसाजी और झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का मामला भी बना
अदालत ने माना कि इस मामले में जालसाजी और झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार करने के आरोप भी प्रथम दृष्टया बनते हैं। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में सफल रहे हैं कि कांग्रेस नेताओं को कार्यक्रम का कोई रॉ फुटेज नहीं दिया गया था और जो वीडियो पोस्ट किया गया, वह इंडिया टीवी के शो की लाइव फुटेज को रिकॉर्ड कर उस पर टेक्स्ट जोड़कर तैयार किया गया था।
कोर्ट ने कहा,
“शिकायतकर्ता ने यह भी स्थापित किया है कि 4 जून 2024 को टीवी शो की टेलीकास्ट फुटेज प्राप्त कर उस पर आपत्तिजनक कैप्शन और एक्सप्लेनेटरी टेक्स्ट जोड़ा गया और यह दिखाया गया कि ये शब्द शिकायतकर्ता ने रागिनी नायक के खिलाफ कहे थे।”
कोर्ट का निष्कर्ष
अदालत ने अपने निष्कर्ष में कहा कि प्रथम दृष्टया तीनों कांग्रेस नेताओं ने मिलकर रजत शर्मा की छवि खराब करने के उद्देश्य से यह सामग्री सार्वजनिक की और यह दिखाने का प्रयास किया कि उन्होंने महिला प्रवक्ता के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जबकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है।
कोर्ट के मुताबिक, यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाज़ी का नहीं, बल्कि मानहानि, जालसाजी और झूठे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य गढ़ने से जुड़ा गंभीर कानूनी मामला बनता है, जिस पर अब आगे ट्रायल चलेगा।(भाषा)
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