नौकरी नहीं, राष्ट्र निर्माण के लिए इन कौशलों की आज सबसे ज्यादा ज़रूरत है

आज का भारत एक निर्णायक दौर में खड़ा है। हाल ही में हम दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं, लेकिन विश्व की सबसे ज्यादा आबादी वाले इस देश का सिर्फ इससे काम नहीं चलेगा, बल्कि हमें देश की प्रतिव्यक्ति आय बढ़ाने के लिए अभी ज़बर्दस्त प्रयास करने होंगे। यह तभी संभव है जब हम यह समझें कि वो कौन से कौशल हैं, जिनके बिना पर हम आज भारत को दुनिया का सबसे मज़बूत और खुशहाल औद्योगिक गणराज्य बना सकते हैं। आइए, गणतंत्र के अवसर पर कॅरियर बनाने के लिए ऐसे कौशलों पर एक नज़र डालें।

डिजिटल सुरक्षा और साइबर स्किल

यह सिर्फ रोजगार का एक ज़रिया भर नहीं है, बल्कि देश की डिजिटल सरहदों की पहरेदारी का भी सबब है। क्योंकि आज देश की सीमाएं सिर्फ ज़मीन पर नहीं हैं, ये डेटा के भूगोल में भी फैली हैं। बैंकिंग, रेलवे, अस्पताल, बिजली, सरकारी डेटा बेस, हर जगह आज डिजिटल सिस्टम है।

हाल में वेनेजुएला पर अमरीका इसलिए त्वरित फौजी कार्यवाई कर पाने में सक्षम हुआ, क्योंकि उसकी सैन्य शक्ति ने वेनेजुएला के समूची बिजली वितरण व्यवस्था को हैक करके कराकास शहर को अंधेरे में डुबो दिया था। यह किसी भी देश के साथ हो सकता है। भविष्य के युद्ध इसी तरह की जनसुविधाओं पर हमले को लक्षित होंगे। इसलिए आज ज़रूरी संसाधनों की कैसे साइबर सुरक्षा हो, यह बहुत जरूरी है। इसलिए डेटा सुरक्षा की कुशलता पर पारंगत होना बहुत जरूरी है।

2026 में जिन कुशलता के क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मांग है वो क्षेत्र हैं-

  • साइबर सिक्यूरिटी।
  • डिजिटल फॉरेंसिक प्रोफेशनल।
  • एसओसी एनालिस्ट।
  • डेटा प्राइवेसी व रिस्क मैनेजर।
  • यह कौशल केवल आईटी का विषय नहीं है, राष्ट्र सुरक्षा का भी सब्जेक्ट है।

डेटा साक्षरता

वास्तव में 21वीं सदी में सामान्य ज्ञान का मतलब है डेटा साक्षरता। भारत में अब नीति निर्माण से लेकर बाजार तक हर जगह डेटा की तूती बोलती है। सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन, अस्पतालों का संचालन, शिक्षा प्रणाली की मॉनिटिरिंग और खेती की भविष्यवाणी आदि सब कुछ डेटा सुरक्षा पर टिका है। 2026 के लिए आज सबसे ज़रूरी स्किल हैं-

  • डेटा एनालिटिक्स।
  • बेसिक स्टैटिस्टिक्स।
  • डेटा विजुअलाइजेशन।

यह ज़रूरी नहीं है कि हर कोई डेटा वैज्ञानिक बने, पर डेटा साक्षर आज हर नागरिक को होना ही चाहिए, जैसे- लिखना, पढ़ना आना ज़रूरी है, वैसे ही डेटा की सुरक्षा भी ज़रूरी है।

हेल्थ स्किल और केयर इकोनॉमी

कोरोना के समय दुनिया ने देखा था कि देश की असली ताकत अस्पतालों, अस्पतालों की संख्या, अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या, स्टाफ, उपकरणों और प्रबंधन में होती है। भारत में आज हेल्थ सेक्टर का विस्तार बड़ी तेजी से हो रहा है और यह सिर्फ डॉक्टरों तक सीमित नहीं। राष्ट्र निर्माण के लिहाज से हेल्थ स्किल भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में देश के लिए आज जरूरी हैं-

  • पैरामेडिक्स और इमरजेंसी केयर।
  • लैब टेक्नोलॉजी और रेडियोलॉजी।
  • ऑपरेशन थियेटर टेक।
  • फिजियोथैरेपी, रिहैबिलिटेशन।
  • हॉस्पिटल एडमिन, पब्लिक हेल्थ।

क्योंकि स्वस्थ नागरिक ही मज़बूत गणतंत्र बनाते हैं। इसलिए हेल्थ स्किल सिर्फ कॅरियर नहीं देश सेवा की सबसे व्यवहारिक राह है।

मैन्यूफैक्चरिंग स्किल

भारत को अगर दुनिया की तीसरी इकोनॉमी बनना है तो वह सिर्फ सर्विस इकोनॉमी से नहीं बन सकता। देश को ऐसे रोजगार भी चाहिए जो बड़े पैमाने पर निर्यात कर सकें। इसलिए ज़रूरी है कि हम मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में दुनिया के हब बनें, यह तभी संभव है जब देश में मैन्यूफैक्चरिंग स्किल मज़बूत हो। ऐसे में ज़रूरी है कि मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को मज़बूत बनाने वाली स्किल पर ज़ोर दिया जाए। सवाल है, इस क्षेत्र के लिए ज़रूरी कौशल क्या हैं-

  • इंडस्ट्रियल डिजाइन/प्रोडक्शन।
  • क्वालिटी कंट्रोल।
  • सप्लायी चेन/लॉजिस्टिक।
  • मशीन ऑपरेशन प्लस आटोमेशन।

वास्तव में गणतंत्र का मजबूत भविष्य वहीं हैं, जहां युवाओं के हाथों पर सिर्फ डिग्रियां न हों, बल्कि उत्पादन की ताकत भी हो।

कम्युनिकेशन स्किल्स

साल 2026 में तकनीक बहुत कुछ कर सकती है, लेकिन इस बहुत कुछ कर सकने का निर्णय, संवाद, भरोसा और नेतृत्व जिस स्किल की बदौलत संभव है, उसे कम्युनिकेशन स्किल्स कहते हैं। इसलिए आज राष्ट्र निर्माण के लिए ये भी बुनियादी कौशल हैं-

  • स्पष्ट बोलना और टू द प्वाइंट लिखना।
  • टीम वर्क।
  • समस्या समाधान।
  • फैक्ट चैकिंग।
  • नैतिकता और जिम्मेदारी।

इस तरह आज भारत को ऐसे युवा चाहिए, जो सिर्फ स्मार्ट न हों, जिम्मेदार भी हों। क्योंकि देश की संस्थाएं कौशल से चलती हैं। लेकिन चरित्र से टिकती हैं।

राष्ट्र निर्माण के लिए ज़रूरी कौशल

  • साइबर सिक्योरिटी/डिजिटल सेफ्टी।
  • डेटा लिटरेसी (एक्सेल प्लस एसक्यूएल/वीआई की समझ)।
  • एलाइड हेल्थ केयर और इमरजेंसी केयर स्किल्स।
  • मैन्यूफैक्चरिंग प्लस क्वालिटी कंट्रोल प्लस सप्लायी चेन।
  • कम्युनिकेशन, क्रिटिकल थिकिंग और एथिक।

इन कौशलों की खासियत यह है कि इनमें कॅरियर भी है और आप देश के लिए इनके ज़रिए योगदान भी कर सकते हैं यानी कमाई और कर्तव्य साथ-साथ हैं।

नरेंद्र कुमार

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