जुबली हिल्स उप चुनाव : BRS की राह में एक और रोड़ा
हैदराबाद, जुबली हिल्स उप चुनाव हैदराबाद में राजनीतिक हलचल का केंद्र बनता जा रहा है। एक ओर जहाँ यहाँ के दिवंगत विधायक मागंटी गोपीनाथ की पार्टी बीआरएस अपनी सीट को बचाने की भरसक कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस और भाजपा भी इस सीट को पाने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक ड्रामेबाज़ी के रूप में टीआरएस के नाम से एक और पार्टी लांच की गयी है।
इस तरह समान नाम से नई पार्टी का वोट कटाऊ हथकंडों के रूप में देखा जा रहा है। निश्चित ही बीआरएस के सामने छोटी ही सही, लेकिन एक समस्या तो होगी, उसे जागरूकता लाने के लिए इस पार्टी की भी उल्लेख करना पड़ेगा। उप चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन शुरू होंगे। ऐसे में सभी की निगाहें सत्तारूढ़ कांग्रेस, भाजपा और निश्चित रूप से बीआरएस पर टिकी हैं।
राज्य की सत्ता में दस साल रह चुकी बीआरएस को यह साबित करना है कि तेलंगाना की राजनीति में अभी भी उसका दबदबा है। यही कारण है कि पार्टी ने सबसे पहले दिवंगत मागंटी की पत्नी को ही अपना प्रत्याशी घोषित करते हुए दौड़ में आगने रहने की प्रतिबद्धता जतायी, लेकिन जब बीआरएस को लगा कि उसका रास्ता साफ है, तभी तेलंगाना रक्षणा समिति डेमोक्रेटिक (टीआरएस-डी) पार्टी की घोषणा की गयी है। नई पार्टी ने जुबली हिल्स सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है और बीआरएस के रणनीतिकार भी सकते में हैं।
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टीआरएस-डी का बीआरएस पर राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है
चौंकाने वाली बात यह भी है कि नयी पार्टी टीआरएस-डी ने एक महिला कांचरला मंजूषा को जुबली हिल्स से उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है। बीआरएस को इस नयी पार्टी से नुकसान होगा या नहीं, यह तो भविष्य तय करेगा, लेकिन इसमें राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति अधिक दिखाई देती है, इसलिए भी कि इसका झंडा बीआरएस के गुलाबी रंग से काफी मिलता-जुलता है। पिछले चुनावों में, रोड रोलर और रोटी मेकर जैसे प्रतीक कार के प्रतीक से मिलते-जुलते थे। इस पर बीआरएस ने आपत्ति भी जतायी थी। बीआरएस पहले भी छोटी पार्टियों का शिकार हो चुकी है।
जुबली हिल्स एक बड़े मुकाबले के लिए तैयार है। एक बात साफ है बीआरएस के लिए यह डगर आसान नहीं है। कांग्रेस और भाजपा भी इस सीट के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाएँगे। दोनों ही पार्टियाँ अपनी प्रतिष्ठा के लिए लड़ रही हैं, वहीं बीआरएस भी अपनी प्रत्याशी मागंटी सुनीता गोपीनाथ को जिताने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी।
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