हैदराबाद तालाबों के किनारे पतंग उत्सव ने बदला माहौल

हैदराबाद, आम तौर पर गंदले पानी या मलबे से भरे तालाबों के पास इन दिनों हैद्रा की गतिविधियों के चलते कुछ नयापन देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से पतंग उत्सव ने बदले माहौल की शानदार तस्वीर पेश की है। हैद्रा द्वारा कब्जामुक्त और पुनरुद्धार कार्यों के बाद तालाब अब उत्सवों के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। पिछले वर्ष अंबरपेट स्थित बतुकम्मा कुंटा बतुकम्मा उत्सवों का मुख्य स्थल बना। नव वर्ष और संक्रांति की तैयारी के दौरान पतंग उत्सव के लिए शहर के कुछ अन्य तालाबों को सजाया गया है।

माधापुर में तम्मिडिकुंटा, कुकटपल्ली में नल्लाचेरुवु और पुराने शहर में बमरुक्नुद्दौला तालाब के पास पतंग उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यहाँ बड़ी संख्या में पतंगबाजी करने वालों की भीड़ जमा हो रही है। हैद्रा आयुक्त ए.वी. रंगनाथ ने बताया कि अतिक्रमणों के कारण पहचान खो चुके तालाब हैद्रा की कार्रवाई से एक नए रूप में सामने आए हैं। शहर में लगभग 60 प्रतिशत तालाब लुप्त हो चुके थे और बचे हुए तालाब अतिक्रमण की चपेट में आकर गंदे जलाशयों में बदल गए थे। हैद्रा के हस्तक्षेप के बाद तालाबों की तस्वीर ही बदल गई है।

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हैद्रा ने यह साबित किया कि तालाबों का विकास केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उनमें जमा कचरे और गाद को हटाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने बताया कि आगामी 11 जनवरी को पतंगोत्सव की तैयारियाँ जोरों पर हैं।

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