मूसी परियोजना में पारदर्शिता का अभाव : रामचंदर राव
हैदराबाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने स्पष्ट किया कि भाजपा मूसी नदी सौंदर्यीकरण परियोजना का विरोध नहीं कर रही है, लेकिन इसे लेकर कई प्रकार के संदेह हैं। उन्होंने परियोजना में पारदर्शिता के अभाव का आरोप लगाया।
प्रदेश भाजपा के तत्वावधान में मूसी नदी पुनर्जीवन प्रॉजेक्ट पर आयोजित चर्चा कार्यक्रम में रामचंदर राव ने संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि संयुक्त आंध्र प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार थी तब क्यों मूसी नदी शुद्धीकरण का विचार नहीं किया गया? उन्होंने प्रश्न किया कि अब अचानक विकास की आड़ लेकर प्रॉजेक्ट क्यों लाया गया है? उन्होंने कहा कि मूसी परियोजना के तहत सरकार की कथनी व करनी में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सरकार बाहर कहती है कि 10 हजार घरों को ढहाया जाएगा लेकिन विधानसभा में मंत्री बताते हैं केवल 1,400 घर ही ढहाए जाएंगे।
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कालेश्वरम परियोजना की तरह भ्रष्टाचार का आरोप
रामचंदर राव ने कहा कि विगत में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई प्रॉजेक्ट के नाम पर पूर्व केसीआर सरकार ने भ्रष्टाचार किया था, अब मूसी के नाम पर कांग्रेस सरकार वही करने जा रही है। उन्होंने सरकार की गांधी सरोवर परियोजना पर भी संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि गरीबों के घरों को ढहाकर प्रतिमा की स्थापना किया जाना ठीक नहीं है, भाजपा इसका विरोध करती है। उन्होंने फिर स्पष्ट किया कि मूसी नदी शुद्धीकरण का भाजपा हरगिज विरोध नहीं कर रही है बल्कि नदी शुद्धीकरण की आड़ लेकर गरीब व मध्यवर्ग के घरों को ढहाने का विरोध कर रही है।
रामचंदर राव ने कहा कि नदियों को जोड़ने का विचार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का था और उसी से प्रेरणा लेते हुए गुजरात में नर्मदा-साबरमती नदी को जोड़कर साबरमती नदी का पुनरुद्वार किया गया है। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नमामि गंगे प्रॉजेक्ट द्वारा हजारों किमी तक गंगा नदी को शुद्ध करने के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए लेकिन तेलंगाना में कांग्रेस सरकार मूसी प्रॉजेक्ट के नाम पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की जानकारी दे रही है। यहीं संदेह उत्पन्न हो रहा है।
रामचंदर राव ने कहा कि गुजरात में भी कइयों को हटाया गया परंतु पहले उनका पुनर्वास किया गया था इसलिए तेलंगाना में भी जिनको हटाया जा रहा है, उनका पहले पुनर्वास करके न्याय किया जाए। उन्होंने कहा कि मूसी नदी का शुद्धीकरण हो, उसमें शुद्ध जल प्रवाहित अवश्य हो, लेकिन गरीबों के साथ अन्याय न किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम गरीबों के पुनर्वास को प्राथमिकता देकर न्याय किया जाए। उन्होंने कहा कि मूसी परियोजना में खर्च पर कोई स्पष्टता नहीं है। दरअसल पारदर्शिता का ही अभाव है, इसलिए संदेह उत्पन्न हो रहे हैं।
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