‘डायलॉग फॉर ए बेटर टुमॉरो’ पहल की शुरुआत, सुरक्षा और स्वास्थ्य पर जोर

हैदराबाद, साइबराबाद सिक्योरिटी काउंसिल (एससीएससी) ने सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जिम्मेदार सामाजिक भागीदारी जैसे विषयों को लेकर डायलॉग फॉर ए बेटर टुमॉरो पहल की शुरुआत की। कार्यक्रम में कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों, कॉर्पोरेट संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

एससीएससी ने डायलॉग फॉर ए बेटर टुमॉरो कार्यक्रम शुरू किया

अवसर पर साइबराबाद पुलिस आयुक्त एवं एससीएससी के अध्यक्ष डॉ. एम. रमेश ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है। परिवार व समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डॉ. रमेश ने फ्रॉम किचन टू क्लीनिक की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि बीमारियों की रोकथाम स्वस्थ जीवनशैली और सही खान-पान से शुरू होती है। उन्होंने नागरिकों से जैविक और मिलावट रहित खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि खाद्य मिलावट के खिलाफ कार्रवाई के साथ उपभोक्ताओं का जिम्मेदार व्यवहार भी सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

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महिला सुरक्षा मंच ने जागरूकता और सुरक्षा प्रयास साझा किए

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एससीएससी के सीईओ नावेद आलम खान ने कहा कि समाज में उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए संस्थाओं, उद्योग जगत और नागरिकों के बीच सहयोगात्मक भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मंच विभिन्न संगठनों के बीच साझेदारी को मजबूत कर एक सुरक्षित तथा जिम्मेदार समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एससीएससी के महिला सुरक्षा मंच की संयुक्त सचिव ममता मदिरेड्डी ने महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता के लिए मंच द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एससीएससी विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।

साइबराबाद की महिला एवं बाल सुरक्षा विंग की डीसीपी के. सृजना ने साइबराबाद पुलिस द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि शी टीम्स, संघमित्रा, मार्गदर्शक और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) जैसी इकाइयाँ महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु रोकथाम, संरक्षण और समय पर हस्तक्षेप पर काम कर रही हैं। उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े सामाजिक मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि समाज और परिवार से अस्वीकार किए जाने के कारण कई ट्रांसजेंडर लोग शहरों में आकर जीवन यापन करने को मजबूर हो जाते हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए विकल्प नामक केंद्र की स्थापना की गई है, जहाँ ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को प्रशिक्षण देकर उन्हें काउंसिलिंग, आत्मविश्वास बढ़ाने, रिज्यूम तैयार करने और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में मदद की जाती है। उन्होंने कॉर्पोरेट संगठनों से अपील की कि वह ऐसे लोगों को रोजगार देकर उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने में सहयोग करें। अवसर पर एससीएससी के अन्य प्रतिनिधि व पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

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