बाजी जीतने के लिए जुड़ना और जोड़ना सीखें : चन्द्रप्रभजी
हैदराबाद, सफलता पाने के चार आधार स्तंभ हैं – मैन पॉवर, मैनेजमेंट पावर, मनी पॉवर और मोरल पॉवर। अगर हमें जीवन की बाजी जीतनी है तो दूसरों से जुड़ना और दूसरों को जोड़ना सीखना चाहिए। याद रखें, भले ही गंदा पानी पीने के काम नहीं आता है, पर भड़की आग बुझाने के काम में जरूर आता है।





















उक्त उद्गार जैन स्थानक, बोलारम में प्रदीप आरती सुराणा द्वारा आयोजित प्रवचन कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए राष्ट्र संत श्री चन्द्रप्रभजी म.सा. ने दिये। आज यहां समिति के अध्यक्ष प्रदीप सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संतश्री ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए जितनी जरूरत मैन पॉवर की है, उतनी ही जरूरत मैनेजमेंट की भी है। अगर हम अपना काम 10 लोगों में बाँटकर करते हैं तो हमारी ताकत 100 गुना बढ़ जाएगी।
आज सबसे पहले धर्म और समाज के क्षेत्र में मैनेजमेंट लागू करने की जरूरत है। हम लोग 5 करोड़ की लागत से धर्मशाला तो बनवा देते हैं, पर उसकी साफ-सफाई के लिए 5000 का खर्चा भी नहीं कर पाते हैं। अगर साफ सफाई हो तो गोबर का आँगन भी अच्छा लगता है अन्यथा मार्बल का आँगन भी गंदा लगता है। मनी पॉवर के संदर्भ में संतप्रवर ने कहा कि समाज का हर भाई अमीर बने। गरीबों को कोई नहीं पूछता है।
महिलाएँ घर के काम से आगे बढ़कर व्यापार अपनाएँ
घर की महिलाओं को चाहिए कि वे केवल घर के कामकाज तक सीमित न रहें, वरन घर का स्टैंडर्ड ऊँचा उठाने के लिए कुछ घंटे व्यापार करें। पारले बिस्किट, निरमा सर्फ, बीकाजी भुजिया जैसे ब्रांडों से सीखें कि आदमी केवल बड़े काम करने से ही अमीर नहीं बनता है, वरन छोटे-छोटे धंधों को भी ऊँचाई पर पहुँचा कर अमीर बन सकता है। नौकरी की बजाय व्यापार करें। याद रखें, जिन्हें अपने काम पर विश्वास होता है वे जॉब करते हैं और जिन्हें अपने आप पर विश्वास होता है, वे व्यापार करते हैं।
मोरल पॉवर के लिए संतश्री ने कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि वेल्थ लॉस्ट – नथिंग लॉस्ट, हेल्थ लॉस्ट – समथिंग लॉस्ट, कैरेक्टर लॉस्ट – एव्रीथिंग लॉस्ट। हम नैतिक तरीके से धन कमाएँ। शोषण कर कमाया गया पैसा पाप है। अनीति का पैसा हमारे घर में नहीं आना चाहिए। गलत काम करके आप पत्नी को तो हीरे की चूड़ी पहना दोगे लेकिन जिस दिन आपके हाथ में लोहे की हथकड़ी आ जाएगी, उस दिन क्या करोगे। सबसे बड़ा धर्म है नैतिक जीवन जीने का संकल्प लेना।
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डॉ. मुनि शांति प्रिय सागरजी ने सकारात्मक नजरिये की शक्ति बताई
अवसर पर डॉ. मुनि शांति प्रिय सागरजी ने कहा कि इंसान का नजरिया उसके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। अब तक की सबसे बड़ी खोज यही है कि व्यक्ति अपना नजरिया बदलकर अपना भविष्य बना सकता है। हमारा नकारात्मक नजरिया हमारे जीवन की सबसे बड़ी विकलांगता है, वहीं सकारात्मक नजरिया हमारी सबसे बड़ी शक्ति। नजरिया होती तो बहुत छोटी चीज है, पर यह सफलता पाने में बहुत बड़ा अन्तर डालती है।
सकारात्मक नजरिये को अपनाकर हम अपने रिश्ते मधुर बना सकते हैं, करियर को मजबूत बना सकते हैं, सामाजिक और धार्मिक दूरियों को समाप्त कर सकते हैं। म.सा. ने कहा कि दुनिया में केवल एक ही इंसान है, जो आपकी तकदीर बदल सकता है, वो आप स्वयं हैं। इससे पूर्व बोलारम आगमन पर गुरु भगवंतों का श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में प्रदीप सुराणा, आरती सुराणा, श्रेष्ठ सुराणा, सलोनी सुराणा, सृष्टि सुराणा और समस्त सुराणा परिवार का लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति द्वारा अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति के संरक्षक विमल नाहर, चेयरमैन मोतीलाल भलगट, वाइस चेयरमैन उमेश बागरेचा, अध्यक्ष प्रदीप सुराणा, कार्याध्यक्ष अमित मुणोत, प्रधान संयोजक नवरतन मल गुंदेचा, महामंत्री अशोक नाहर, कोषाध्यक्ष मानक चंद्र पोकरणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विमल चंद मुथा, उपाध्यक्ष कुशल कांकरिया, योगेश गांधी, महावीर चोपड़ा, निर्मल कोठारी, मंत्री प्रवीण सुराणा, चंद्रप्रकाश लोढ़ा, सह मंत्री रोमिल गोलेछा, महावीर भलगट, जैन स्टार ग्रुप के महावीर तातेड़, पारस नाबरिया, संदीप पीपाड़ा, पवन बल्लावत, स्वरूप पारेख उपस्थित थे। राष्ट्र संत ने बोलारम में प्रवचन के पश्चात जोधपुर की ओर विहार आरंभ किया।
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