श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से मिलता है सभी तीर्थों का फल : राधाकृष्णजी
हैदराबाद, श्रीमद् भागवत कथा व्यक्ति के न केवल जीवन को तारती है, बल्कि कथा सुनने से जीव को सारे तीर्थों का फल एक ही स्थान पर प्राप्त हो जाता है। श्रीमद् भागवत कथा का एक श्लोक या आधा या एक चरण भी जीव का कल्याण कर देता है।
उक्त उद्गार अत्तापुर स्थित एसएनसी कन्वेंशन हॉल में ध्यान फाउंडेशन श्याम बाबा नंदीशाला, ध्यान फाउंडेशन गौशाला के तत्वावधान में योगी अश्विनी गुरुजी की प्रेरणा से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस कथा का रसपान कराते हुए कथाव्यास गोवत्स राधाकृष्णजी महाराज ने व्यक्त किए।
महाराज ने गौ माता के विषय में कहा कि जो गाय कसाई के हाथों कटने के लिए चली जाती है, उनके मन में आस होती है। वह मन में सोचती है कि हिंदुस्तान में जहाँ स्वयं श्रीगोपाल ने अपने हाथों से गौ सेवा की, आज उसी भूमि के करोड़ों भक्त है और वह मुझे बचाने आएँगे। जब तक गाय के प्राण नहीं निकलते, तब तक आस बनी रहती है। जो गाय बचा लेते हैं, वह आस पूरी करते हैं। गाय हमें संस्कार देती हैं। वह थोड़े में भी गुजारा कर लेती है।

हमसे ज्यादा समझदार गाय है। उनको पता चलता है कि चारा कम है, तो अपने आप ही थोड़ा-थोड़ा खा लेंगी। जिस प्रकार व्यक्ति को घर अच्छा लगता है, उसी प्रकार गाय को भी मनुष्य के बीच रहना अच्छा लगता है। उसके लिए पाँच स्टार गौशाला नहीं, बल्कि टीन शेड भी काफी है। गाय अपने घर में हो ऐसी अनुभूति हो, इसके लिए चारे की व्यवस्था है। जो ईमानदारी से गाय की सेवा से जुड़ें हैं, उनका साथ दें।
प्रेम, प्रसन्नता और श्रीमद् भागवत का महात्म्य
महाराज ने कहा कि आज कुंबा छठ है, जो ब्रज का उत्सव है। इसमें लाल रंग का उपयोग होता है और लाल रंग प्रेम का प्रतीक है। श्रीराधा रानी को यह रंग बहुत पसंद है। लाल रंग भगवान की प्रीति का है। भगवान से प्रेम करेंगे, तो जीवन में ऐसी सुन्दर स्थिति बनेगी, जिसे सोच नहीं सकते। वर्तमान में प्रेम तो दिखावा बन गया है, भगवान से प्रेम नहीं दिखावा है। प्रेम का सबसे उचित माध्यम है गुणगान। गुणगान वही करता है, जो प्रेमी के गुण जानता है। राधारानी श्री कृष्ण के गुण जानती हैं।
महाराज ने कहा कि कुंबा छठ गौ माता की सेवा के भाव को लेकर आरंभ हुई। ब्रजराज को स्वामी बनाना है, तो खिलखिलाते रहो, मुस्कुराते रहो, प्रसन्न रहे। जो सहज प्रसन्न है, निश्चित ही इनके स्वामी ब्रजराज हैं। इसलिए प्रसन्न रहें। एक ही परिस्थिति पर सहज प्रसन्नता ही श्रीकृष्ण के सच्चे सेवक का प्रमाण है। ठाकुरजी की चर्चा सुनकर मन को प्रसन्नता मिलती है। विवाह में करोड़ों खर्च होते हैं, फिर भी वास्तविक प्रसन्नता नहीं आती। वास्तविक प्रसन्नता कथा में ही मिलती है। कथा में हाड़ माँस की, मनुष्य के गुण-दोष की नहीं, राम की, कन्हैया की चर्चा होती है।
महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत का महात्म्य है कि कथा सुनकर प्रसन्नता मिलती है। ठाकुरजी कहते हैं कि जिसके घर में एक श्लोक श्रीमद् भागवत का या आधा या एक चरण लिखा रहता है, उसके घर में मैं निवास करता हूँ। मुझे घर में रखना है, तो नेम प्लेट में नहीं, बल्कि भागवतजी का श्लोक लिखें। महाराज ने कहा कि घर की सजावट ऐसे करें, जिसमें श्रीकृष्ण की झलक मिले। तीर्थ पर जाने की इच्छा सभी की होती है, पर यह सबके लिए संभव नहीं है।
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कथा से मिलते तीर्थों के पुण्य और तप का संदेश
ऐसे भक्तों को श्रीमद् भागवत कथा में जाने से सभी तीर्थ का फल मिल जाता है। भागवत कथा में आ गये, तो सभी तीर्थ हो जाते हैं। जहाँ कथा है, वहाँ सभी तीर्थ मौजूद हैं। कथा सुनने के निमित्त आयेंगे, तो सभी को तीर्थ का आनंद मिलता है। महाराज ने कहा कि वर्तमान में तीर्थ को कलयुग और अधर्म दोनों ने बिगाड़ दिया। कलयुग एवं अधर्म दोनों एक हो गये। तीर्थ से सत्य, तप और शुद्धता चली गई है। आज तप चर्चा का विषय हो गया। वास्तव में जो तपस्वी होता है, वह तप गुप्त रखता है। एकादशी करते हैं, तो सभी को बताते हैं। कह देंगे तो वह फिर तप नहीं रहता, इसलिए तप को गुप्त रखें। कथा से पूर्व राधाकृष्णजी महाराज के सान्निध्य में कलश यात्रा भव्यता से बाजे-गाजे के साथ निकाली गयी। 101 कलशों के साथ महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में इसमें भाग लिया।
अवसर पर मुख्य यजमान एवं प्रसाद यजमान पुरुषोत्तमदास प्रेमलता दीपक सीमा विजयवर्गीय, प्रसाद जयमान ओमप्रकाश प्रेमलता अग्रवाल, कथा स्थल (हॉल) यजमान चंद्रकांत लक्ष्मी डाकोतिया, महेश सरिता डाकोतिया, महेन्द्र आशा डाकोतिया, अलंकार यजमान जयप्रकाश दीपक आशीष विजयवर्गीय, दैनिक यजमान विशंभरलाल ममता अग्रवाल, महेन्द्र सरिता खेतान, साकेत सुरेशचंद ऊषा अग्रवाल, मनोज पुष्पा मित्तल, मुकेश मोनिका विजयवर्गीय, अनिल सुमन विजयवर्गीय, कमलेश शकुन विजयवर्गीय, नरेश पिंकी अग्रवाल, श्रीगोपाल रीना डोडिया, श्रवण कुमार कलावती विजयवर्गीय, आर.के. बंग एवं रजनी बंग, विजय कविता राठी, लोकनाथ रेणु मारू, सुरेन्द्रचंद मंजू देवी लाहोटी, आशादानी, आदित्य बृहिता हवेलिया, अंजनेश रंजना सिंघानिया, संजय राधिका अग्रवाल, मुकुन्दलाल प्रेमलता डोबा, ध्यान फाउंडेशन हैदराबाद प्रमुख गौ सेवक दीपक-मीनाक्षी विजयवर्गीय व अन्यों ने सहयोग प्रदान किया।
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