तिथि मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि आज सुबह 7 बजकर 10 मिनट से शुरु हो रही है, जो 31 मार्च, मंगलवार की सुबह 6 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करने का विधान है।
शुभ योग
आज प्रदोष काल पड़ने से सोम प्रदोष व्रत किया जाएगा। आज पूरे दिन प्रदोष तिथि व्याप्त होने से अनंग त्रयोदशी का संयोग भी बन रहा है।
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व है। हर महीने में शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है।
पूजा विधि
प्रदोष तिथि भगवान शिव को अति प्रिय है। अतः आज भगवान शंकर की पूजा बेल पत्र, अक्षत, धूप, गंगा जल से करें। आज निर्जला व्रत या फलाहारी भोजन के साथ व्रत रखा जाता है। इस तिथि में शाम की पूजा बहुत महत्व रखती है।
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आज शाम के समय दोबारा से स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। गाय के गोबर से मंडप तैयार करें। पांच अलग-अलग रंगों से मंडप में रंगोली बनाएँ। उत्तर पूर्व दिशा की तरफ मुख करके कुशा के आसन पर बैठें। भगवान शंकर के ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए, उन्हें जल अर्पित करें। प्रदोष व्रत की कथा सुनें। उसके बाद आरती करें। शाम की पूजा करके या अगले दिन भी व्रत का पारण कर सकते हैं।
