कामनाओं की पूर्ति करने वाला पर्व

तिथि मुहूर्त

विक्रम पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आज सुबह 8 बजकर 45 मिनट से शुरु हो रही है, जो कल 29 मार्च, रविवार की सुबह 7 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। 29 मार्च, रविवार को व्रत रखा जाएगा।

पारण मुहूर्त

30 मार्च, सोमवार की सुबह 6 बजकर 14 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट के बीच पारण कर सकते हैं।

पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। कामदा शब्द का अर्थ है-कामनाओं को पूर्ण करने वाला। अतः तिथि के नाम के अनुसार इस व्रत को भक्त की समस्त मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाला माना गया है।

धर्मग्रंथों के अनुसार, यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी गई है, जो जीवन में हर प्रकार के कष्ट, दोष या पाप से मुक्ति चाहते हैं। नवरात्रि के आस-पास आने के कारण इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भी बढ़ जाती है। इस दिन किए गए व्रत, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत के लिए शुभसंकेत देता है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गंधर्व ललित और उसकी पत्नी ललिता से जुड़ी यह कथा काफी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि ललित को एक गलती के कारण राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा, तब उसकी पत्नी ने ऋषियों के कहने पर कामदा एकादशी का व्रत रखा, जिसके प्रभाव से ललित को राक्षस योनि से मुक्ति मिली और वह पुनः अपने दिव्य स्वरूप में लौट आया। इस कथा से पता चलता है कि यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति देता है, बल्कि जीवन के बड़े संकटों को भी दूर करता है।

मान्यता है कि इस व्रत को रखने से अनजाने में हुए पाप भी नष्ट हो जाते हैं। यहां तक कि ब्रह्महत्या जैसे महापाप से भी मुक्ति मिलती है। यह व्रत पिशाच दोष, राक्षस योनि या नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस व्रत से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

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