अजित पवार के बाद महाराष्ट्र की राजनीति!
बहरहाल, अजित पवार की मौत से महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर हंगामी हो गई है। अजित पवार के जाने से राज्य की सियासत में एक खालीपन अवश्य आया है, लेकिन भविष्य को लेकर अनगिनत सवाल भी खड़े हो गये हैं, जैसे एनसीपी का नेतृत्व कौन करेगा, एनसीपी की राज्य सरकार में क्या पोजीशन रहेगी और अजित गुट व शरद गुट के संभावित विलय का भी प्रश्न है।
कुछ दिन पहले शिव सेना (उद्धव) के नेता संजय राउत ने संकेत दिये थे कि महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार वापस शरद पवार की एनसीपी में लौट आयेंगे। दोनों एनसीपी के विलय की संभावनाएं 5 फरवरी 2026 को ज़िला परिषद के चुनाव के बाद प्रबल दिखायी दे रही थीं, विशेषकर इसलिए कि दोनों ने हाल के महाराष्ट्र निकाय चुनाव मिलकर लड़े थे। लेकिन अब एक विमान हादसे में अजित पवार की मौत ने दोनों एनसीपी गुटों के विलय की संभावना को जटिल बना दिया है। दोनों एनसीपी गुटों के सदस्य दुःख में तो एकजुट हैं, लेकिन राज्य की राजनीति को मद्देनज़र रखते हुए, जहां दोनों गुट प्रतिद्वंदी खेमों में हैं, अजित पवार की अनुपस्थिति में विलय कठिन प्रतीत हो रहा है क्योंकि अपने गुट की प्रेरक शक्ति वह ही थे।
एनसीपी में 2023 के विभाजन ने पवार परिवार को भी विभाजित कर दिया था, लेकिन बुधवार की त्रासदी ने परिवार को तो एक साथ ला दिया है, फिर भी जब एनसीपी के विलय की बात आती है तो सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि परिवार के सदस्य क्या रुख अपनाते हैं। गौरतलब है कि अजित पवार बुधवार (28 जनवरी 2026) की सुबह मुंबई से 8-सीटों वाले लेअरजेट 45 में बारामती ज़िला परिषद चुनाव के संदर्भ में जा रहे थे, जहां उनकी चार सभाएं निर्धारित थीं, लेकिन यह प्राइवेट जेट सुबह 8:45 पर जब बारामती एयरपोर्ट पर लैंड कर रहा था तो रनवे से नीचे उतर गया और क्रेश कर गया।
अजित पवार सहित 5 सवारों की प्राइवेट जेट दुर्घटना में मौत
जेट में ज़बरदस्त विस्फोट हुआ और अजित पवार सहित 5 सवारों का निधन हो गया, जिनमें दो पायलट, एक फ्लाइट अटेंडेंट और एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी भी शामिल थे। हादसे का कारण जेट में ग्लिच (गड़बड़) व सुबह के समय कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम होना बताया जा रहा है। एयराफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो ने जांच आरंभ कर दी है। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि प्राइवेट ऑपरेटर वीएसआर वेंचर का जेट जब नीचे उतर रहा था तो उसके पंख अचानक तेज़ी से लेफ्ट को रोल कर गये, क्रेश होने से पहले, जो तकनीकी खराबी की ओर संकेत करते हैं। क्रू ने मे डे कॉल नहीं की थी।
मे डे कॉल का अर्थ है अत्यधिक आपातस्थिति या गंभीर संकट। यह विमान या समुद्री जहाजों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय सिग्नल है, जो तत्काल सहायता की गुहार लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे इंजन फेल होना, आग लगना या जीवन के लिए सीधा खतरा। पिछले ढाई वर्षों के दौरान महाराष्ट्र में दिल्ली की कंपनी वीएसआर वेंचर प्राइवेट लिमिटेड के विमान दूसरी बार दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं।
वीएसआर वेंचर प्राइवेट लिमिटेड के विमान 2 बार महाराष्ट्र में दुर्घटनाग्रस्त
सितंबर 2022 में एक लेअरजेट मुंबई एयरपोर्ट पर लैंड करते हुए क्रेश हो गया था। हालांकि उस दुर्घटना में किसी की मौत नहीं हुई थी, लेकिन अभी तक इसकी अंतिम जांच रिपोर्ट आना शेष है, जबकि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार रिपोर्ट अभी तक आ जानी चाहिए थी। अगर एक ही ऑपरेटर के विमान बार-बार दुर्घटनाग्रस्त होते हैं तो उसके प्रशिक्षण मानकों व सुरक्षा प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा वैश्विक स्तर पर अधिक बारीकी से की जाती है।
बहरहाल, अजित पवार की मौत से महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर हंगामी हो गई है। अजित पवार के जाने से राज्य की सियासत में एक खालीपन अवश्य आया है, लेकिन भविष्य को लेकर अनगिनत सवाल भी खड़े हो गये हैं, जैसे एनसीपी का नेतृत्व कौन करेगा, एनसीपी की राज्य सरकार में क्या पोजीशन रहेगी और अजित गुट व शरद गुट के संभावित विलय का भी प्रश्न है। ऐसा मुश्किल ही लगता है कि पिछले साल अप्रैल में रिटायरमेंट लेने के बाद शरद पवार फिर से राज्यसभा के सदस्य बनेंगे। इसके अतिरिक्त शरद पवार ने अपने राजनीतिक जीवन में अभी तक बीजेपी के साथ सीधे गठजोड़ से अपने आपको दूर ही रखा है।
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एनसीपी के दोनों गुटों ने पुणे व पिंपरी चिंचवाड़ में मिलकर चुनाव लड़ा
अस्सी के दशक में उनकी सोशलिस्ट कांग्रेस प्रोग्रेसिव डेपोटिक फ्रंट का हिस्सा अवश्य थी, जिसमें बीजेपी भी शामिल थी, लेकिन यह स्पष्ट है कि प्रगतिशील विचारों के अनेक कार्यकर्ता उनके साथ केवल इसलिए हैं क्योंकि उनका रुख हमेशा से ही बीजेपी के विरोध में रहा है। हाल में सम्पन्न हुए नगर निगमों के चुनावों में एनसीपी के दोनों गुटों ने पुणे व पिंपरी चिंचवाड़ में मिलकर चुनाव लड़े थे और उन्होंने अपना यह गठजोड़ इस समय चल रहे पुणे ज़िला परिषद व पंचायत समिति चुनावों में भी जारी रखा। लेकिन अजित पवार के निधन ने दोनों गुटों को असमंजस में डाल दिया है कि चुनाव-संबंधी गठबंधन को जारी रखा जाये या 2029 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए विलय की ओर बढ़ा जाये।
अगर विलय होता है तो क्या सुप्रिया सुले को कोई ज़िम्मेदारी केंद्र में दी जायेगी? इन प्रश्नों का उत्तर पाने के लिए अगले कुछ माह बहुत महत्वपूर्ण हैं और साथ ही यह भी जानने के लिए कि राज्य में अजित गुट का नेतृत्व कौन करेगा। इस सिलसिले में बीजेपी की भूमिका निर्णायक हो सकती है। बीजेपी से हाथ मिलाने पर अजित पवार की ज़बरदस्त आलोचना हुई थी। वह एक वैचारिक संघर्ष था या मजबूरी? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक सभाओं में अजित पवार पर 70,000 करोड़ रूपये का घोटाला करने का आरोप लगाया था और मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने उनके बारे में जेल में चक्की पीसिंग पीसिंग का संकेत दिया था। फिर अचानक अजित पवार ने एनसीपी को दो फाड़ किया और बीजेपी से हाथ मिला लिया। इसके बाद उनके खिलाफ केंद्र व राज्य सरकारों और बीजेपी की तरफ से भ्रष्टाचार के आरोप लगना बंद हो गये।
केंद्र, राज्य और बीजेपी के भ्रष्टाचार आरोपों पर असर पड़ा
अजित पवार ने अपने एक करीबी पत्रकार मित्र को बताया था कि वह खुद तो ईडी व सीबीआई का सामना कर सकते थे लेकिन अपने बच्चों को जेल में जाता हुआ नहीं देख सकते थे, इसलिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा था। संबंधित पत्रकार का यह बयान उनके यूट्यूब चैनल पर मौजूद है। इसके अतिरिक्त अजित पवार का मानना था कि सत्ता में रहते हुए वह अपने चुनाव क्षेत्र व कार्यकर्ताओं के काम करा सकते थे।
इससे यह फार्मूला सामने आया कि विचारधारा से अधिक महत्वपूर्ण व्यवहारिक होना है। बहरहाल, 2024 के लोकसभा चुनाव में अजित पवार को ज़बरदस्त धक्का लगा जब वह केवल सीट (सुनील तटकरे) ही जीत सके और बारामती में उनकी पत्नी सुनेत्रा ताई सुप्रिया सुले से हार गई। पवार परिवार के राजनीतिक टकराव में यह उनके लिए बहुत बड़ा धक्का था, लेकिन विधानसभा चुनाव में सीटों के आधार पर तीसरे स्थान पाकर उन्होंने इसकी भरपाई कर ली।

बीजेपी के साथ सरकार में रहने के बावजूद अजित पवार ने अपने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों व शिवाजी, फूले, अम्बेडकर व शाहू पर अपने विचारों से कभी कोई समझौता नहीं किया। इसलिए उनके समर्थकों में उनकी छवि कभी प्रभावित नहीं हुई। हालांकि शरद पवार ने कहा है कि अजित पवार की मौत का राजनीतिकरण न किया जाये, लेकिन जिस समय महाराष्ट्र की राजनीति नाज़ुक मोड़ पर खड़ी थी कि दोनों एनसीपी गुट विलय के कगार पर थे और अजित ने ठाणे में एकनाथ शिंदे के मेयर प्रत्याशी को समर्थन दिया हो, उस समय अचानक इस हादसे के होने पर सवाल तो खड़े होते ही हैं। इसलिए ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्लाह आदि ने सुप्रीम कोर्ट के जज द्वारा जांच कराने की मांग की है। देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या कुछ होता है।
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