अतिथि भूतो भवः
सुरसा के मुंह की तरह निरंतर महंगाई बढ़ती ही जा रही है। अब वह दिन दूर नहीं जब अतिथि देवो भवः नहीं, अतिथि भूतो भवः लिखकर लोग अपने दरवाजे पर टांग देंगे। ऐसी कमरतोड़ महंगाई में वक्त-बेवक्त या तीज-त्योहारों में मेहमानों का टपकना या फिर कई दिनों तक रुके रहना न सिर्फ मेजबान का बजट बिगाड़ देता है, बल्कि मेजबानों की दिनचर्या में भी बाधा उत्पन्न करता है।
मेहमानों से बचने के लिए मेरे दोस्त अशर्फीलाल शर्मा ने कुछ नुस्खे बताए हैं, जिनका लाभ मैं बराबर ले रहा हूं। अगर उनके नुस्खों का लाभ आप भी लेंगे तो, निश्चित रूप से मेहमानों के प्रकोप से बच सकते हैं और अपनी जिंदगी को नीरो की तरह सुख-चैन से, बांसुरी बजाते हुए बिता सकते हैं। कई बार मेहमान फोन करके पूछते हैं-क्या आप घर पर हैं? तब आप उन्हें फौरन कहिए, जी नहीं, मैं घर पर नहीं हूं।
अगर मेहमान क्षेत्रीय या स्थानीय है और अंदेशा हो कि कहीं झूठ पकड़ा न जाए, तब आप फौरन कहें ,हां घर पर तो हूं, पर अभी-अभी फलाने जरूरी काम से निकलने वाला हूं। अगर फिर भी रिश्तेदार वक्त-बेवक्त आ टपके तो सबसे पहले उन्हें बिठाएं, चाय-नाश्ता कराएं फिर किसी न किसी बात को लेकर पति-पत्नी आपस में तकरार शुरू कर दें। ऐसे में जहां मेहमान 10 दिन आपके यहां रूकने की प्लानिंग बनाकर आए होंगे, तो मेरा दावा है कि वे मात्र एक दिन से ज्यादा नहीं टिक पाएंगे।
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मेहमानों को स्मार्ट तरीके से घर से भगाने के उपाय
अगर आपके प्लान में पत्नी न शामिल हो, तो घर के छोटे-छोटे बच्चों को बेवजह तेज-तेज आवाज में डांटें, अगर बच्चा कोई चीज लेने की जिद कर रहा हो, तो उसे वह चीज कतई न लेकर दें, जब तक वह जोर-जोर से रोने न लगे। ऐसे में मेहमान अपने आपको अव्यवस्थित पाएगा और जल्दी ही आपका किला छोड़ कर दफा हो जाएगा। इतना जतन करने के बाद भी मेहमान अगर घर से नहीं जा रहा है तो उससे उधार पैसे मांगने शुरू कर दीजिए और जब भी कुछ सामान मंगाना हो, उससे कहें, मेरे पास इस समय छुट्टे पैसे नहीं हैं, कृपया अभी दे दीजिए बाद में लौटा दूंगा और हर बार उसे बाद में देना ऐसे भूल जाएं जैसे काला धन वापस लाने की हजारों कसमें खाने वाले, महापुरूष काला धन लाना बिलकुल भूल जाते हैं।
फिर भी मेहमान अंगद के पांव की तरह जमा बैठा हो, आपके घर से जाने का एक परसेंट नाम न ले रहा हो, तो अपने दो-चार बैग बांधें, अपना ताला-चाबी निकालें, उससे कहें-हमें सपरिवार जरूरी काम से बाहर जाना है, रसोई और आपका कमरा खोले दे रहा हूं। आप खाना बनाते-खाते रहें।

सारा सामान रखा है, फिर भी कुछ कम पड़े तो पड़ोस की दुकान पर मेरा खाता चलता है, वहां से, मेरे नाम उधार ले सकते हैं। दूध और अखबार वाला पर्मनेंट चल रहा है। हमारा ख्याल है, हमारे जाने के बाद आपको कोई असुविधा नहीं होगी फिर भी अगर किसी कारण हुई ,तो हमें हार्दिक खेद रहेगा। खातिरदारी में हमारी कोई कमी-वेशी नहीं है, बस समय नहीं दे पा रहा हूं, जिसका मुझे अपार दुःख है। इतना कहने भर से मेहमान एरोप्लेन की स्पीड से भागेगा और आप बुलेट ट्रेन की तरह फौरन अपना बजट संभाल लेंगे।
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