एमसीईएमई सिकंदराबाद भारतीय सेना का सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण संस्थान घोषित

हैदराबाद, सिकंदराबाद स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (एमसीईएमई) को भारतीय सेना का सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण संस्थान घोषित किया गया। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सेना दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर जयपुर के सप्त शक्ति सभागार में आयोजित एक समारोह में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पूर्व मिलिट्री कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिकंदराबाद को प्रतिष्ठित सेना प्रमुख की यूनिट प्रशंसा पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार एमसीईएमई कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नीरज वार्ष्णेय ने प्राप्त किया।

यह पुरस्कार पिछले दो वर्षों में एमसीईएमई द्वारा स्वयं को बेहतर बनाने और ईएमई कोर के जवानों और अधिकारियों को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए किए गए प्रयासों को मान्यता प्रदान करता है। एमसीईएमई की आठ दशक पुरानी विरासत में यह पुरस्कार ऐतिहासिक उपलब्धि है। जानकारी देते हुए बताया गया कि पिछले दो वर्षों के दौरान एमसीईएमईमें रणनीतिक लक्ष्यों, तकनीकी प्रगति और उद्योग सहयोग के चलते गहन परिवर्तन हुए।

इन परिवर्तनों के तहत प्रशिक्षण अवसंरचना के आधुनिकीकरण को नई गति दी गई, जिसमें उन्नत प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन, कक्षाओं को प्रौद्योगिकी सक्षम शिक्षण वातावरण में परिवर्तित करना आदि शामिल है। साथ ही ड्रोन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स और मानवरहित हवाई हमले जैसे उभरते प्रौद्योगिकी विषयों पर नए वैकल्पिक पाठ्यक्रम शामिल करने के लिए पाठ्यक्रम को व्यापक रूप से संशोधित किया गया, जो अग्निवीरों और अधिकारियों की आवश्यकताओं को पूरा करता है। ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित अनुभवात्मक शिक्षण को सभी पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया, ताकि परिचालन संबंधी प्रासंगिकता को बढ़ाया जा सके।

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स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता से अगली पीढ़ी युद्ध तैयारी

नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए एमसीईएमई के प्रशिक्षुओं ने स्वदेशी तकनीकी समाधानों के माध्यम से नियमित सेवाओं को स्वचालित करने के उद्देश्य से आंतरिक रोबोटिक सहायक परिचारक विकसित किया है। एमसीईएमई का तकनीकी रूप से उन्नत वातावरण छात्रों को ड्रोन बनाने, उन्हें उड़ाने, उनकी मरम्मत करने और दुश्मन की योजनाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए उनका उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करता है।

एमसीईएमई जमीनी सेना की तात्कालिक और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने और भारतीय सेना के सैनिकों और अधिकारियों को अगली पीढ़ी के युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर केंद्रित है। एमसीईएमई ने आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए तेलंगाना स्थित उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग करते हुए स्वदेशी समाधानों के डिजाइन और विकास में सक्रिय योगदान दिया है। इन पहलों के परिणामस्वरूप रडार, मिसाइल, बख्तरबंद प्रणालियाँ, अंतरिक्ष अनुप्रयोग और ड्रोन युद्ध सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयातित घटकों का प्रतिस्थापन और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास हुआ। यह विकास विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।

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