यादगार बना सशक्तिकरण का सफर!

मैं कृतज्ञ हूं उन पुरुषों के प्रति जिन्होंने मुझे सहारा दिया, आवाज़ दी, हाथ बढ़ाया और सबसे अहम बात-एक ऐसा भरोसा दिया, जो बिना शब्दों के कहता था, तुम कर सकती हो… और तुम्हें करना चाहिए। आज जब मैं खुद को अपने सपनों को जीने वाली महिला के रूप में देखती हूँ, तो मन कृतज्ञता से भर उठता है उन सब के लिए, जिन्होंने मुझे यह बनने में मदद की।

रविवार की एक आलसी सुबह थी। हाथ में गरम चाय का कप और मन एक ऐसे विषय पर भटकने लगा, जो दुनिया की आधी आबादी को और विशेष रूप से भारत की लगभग 49 प्रतिशत जनसंख्या को प्रभावित करता है -महिला सशक्तिकरण। कानूनों पर चर्चाएँ, सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ और समानता की लड़ाइयाँ- ये सब बदलाव लाने के लिए ज़रूरी हैं। फिर भी, मेरा मन बार-बार एक शांत-सी आवाज़ की ओर लौटता रहा, जो भीतर से पूछ रही थी- इन सबके बीच, ऐसा कैसे है कि कुछ महिलाएँ- मेरी तरह- आत्मविश्वासी, सशक्त और अपनी बात बेझिझक कहने वाली बन पाती हैं?

यही सवाल मुझे यह लिखने के लिए प्रेरित कर गया- उन लोगों को याद करने के लिए, जिनका साथ मुझे मिला। खासतौर पर उन पुरुषों को, जिन्होंने सहारा दिया, आवाज़ दी, हाथ बढ़ाया और सबसे अहम बात-एक ऐसा भरोसा दिया, जो बिना शब्दों के कहता था, तुम कर सकती हो… और तुम्हें करना चाहिए। आज जब मैं खुद को एक सोचने-समझने वाली, काम करने वाली, अपने सपनों को जीने वाली महिला के रूप में देखती हूँ, तो मन कृतज्ञता से भर उठता है उन सबके लिए, जिन्होंने मुझे यह बनने में मदद की।

क्या वह मेरे पिता नहीं थे- खुद एक सख़्त अनुशासनप्रिय व्यक्ति और ग्यारह बच्चों की ज़िम्मेदारी उठाने वाले- जिन्होंने समय निकालकर मेरे स्कूल आकर मेरे मूल्यों का साथ दिया? जब मैंने शिक्षक द्वारा दी गई शारीरिक सज़ा को स्वीकार करने से इनकार किया, तो उन्होंने मुझे चुप रहने या समझौता करने को नहीं कहा। उन्होंने शिक्षक से और प्रधानाचार्या से बात की- शांत स्वर में, लेकिन पूरे विश्वास के साथ- और समझाया कि उनकी नौ साल की बेटी सही है। उन्होंने कभी बेटी और बेटे में फर्क नहीं किया। यह सरल-सा, निरंतर व्यवहार हमारे घर में समानता का वातावरण बनाता गया। मेरे छह भाइयों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही।

किशोरावस्था की वे यादें आज भी मन में ताज़ा हैं- जब उन्होंने मुझे दुनिया को वैसे देखने दिया, जैसी वह वास्तव में थी। हैदराबाद की सड़कों पर चाय की दुकानों पर बैठना- जो तब लड़कियों के लिए लगभग वर्जित था। एक भाई ने तो अपने दोस्तों के लिए रखा समय भी छोड़ दिया, ताकि मेरे दोस्तों और मुझे कॉलेज में होने वाले इंटर-कॉलेज क्रिकेट टूर्नामेंट की तैयारी में मदद कर सके और फिर थी हमारी पुरानी 118 एनई कार। मुझे ड्राइविंग सिखाने का मतलब था- पिता के ग़ुस्से को न्योता देना, जिसका अंदाज़ा शायद उन्होंने पूरी तरह नहीं लगाया था। फिर भी उन्होंने किया।

उस एक कदम ने उनकी बहन को पंख दे दिए। आज वही सीख मुझे गतिशीलता की आज़ादी और समय का उपहार देती है- जो निर्भरता से कहीं बड़ा वरदान है। क्या यह सब मुझे आत्मविश्वासी बनाने में सहायक नहीं रहा? और भी लोग थे। मेरे कॉलेज के प्रिंसिपल, जिन्हें इस बात पर गर्व था कि मैं मैनेजमेंट की पढ़ाई जारी रखना चाहती थी- जबकि उस कॉलेज में मैं अकेली लड़की थी और कई लोगों ने मुझे हतोत्साहित किया था। उनका विश्वास एक सशक्त संदेश था – कि मैं कॉर्पोरेट दुनिया का उतना ही हिस्सा हो सकती हूँ, जितना कोई पुरुष छात्र।

कॉर्पोरेट जगत में, जैसा हम जानते हैं, नैतिकता और मूल्य अक्सर तब तक प्राथमिकता नहीं बनते, जब तक वे मुऩाफे, आरओआई या विकास से मेल न खाएँ। ऐसे में मेरा सौभाग्य था कि मेरे सह-निदेशक ने मुझे स्वयं बने रहने के लिए प्रोत्साहित किया- भले ही इसके कारण कुछ बड़े प्रोजेक्ट हाथ से निकल जाएँ। जब कई लोग मेरे आदर्शवाद पर हँसे, उन्होंने मुझे खुली आँखों से सपने देखने का समर्थन दिया। उसी भरोसे ने मुझे एक ऐसी लीडर बनाया।

यह भी पढ़े: शी मार्ट : महिला सशक्तिकरण की तरफ एक कदम

-हेमा जैन

जैसे-जैसे मेरी संस्था बढ़ी और मैंने समाज के विभिन्न मंचों पर अपनी भूमिका निभाई, महिला होने का पूर्वाग्रह भी सामने आया। शीर्ष तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं था। हर कदम पर बाधाएँ थीं। फिर भी, कहीं न कहीं एक शांत-सी आश्वस्ति हमेशा रही- एक मौन आवाज़, जो कहती थी, लड़ते रहो। उसी अदृश्य लेकिन सशक्त समर्थन ने मुझे मैनेजमेंट एसोसिएशन की अध्यक्ष बनने और देश-स्तर पर सर्वश्रेष्ठ का सम्मान पाने में मदद की। यह आत्मचिंतन और कृतज्ञता की यात्रा लंबी है- और समय के साथ और गहरी होती जाएगी। लेकिन मुझे यह पता है कि इस रास्ते पर चलते हुए, ये सभी कोमल हृदय मेरे साथ रहेंगे- मौन साथी बनकर, मुझे मंज़िल तक पहुँचाने में मदद करते हुए।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button