मिशन चुन्नी

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एक अलसायी दोपहर में चुन्नी बिल्ली अपनी मखमली पूँछ हिलाते हुए बगीचे की दीवार पर टहल रही थी। अचानक उसकी निगाहें घास के बीच थिरकती एक आकृति पर ठहर गईं। एक झपट्टे में उसने उसे दबोच लिया। वह एक नन्हा-सा चूहा था, इतना छोटा कि चुन्नी के एक पंजे में ही समा जाए। चूहा डर के मारे पत्थर बन गया था।

चुन्नी ने उसे गौर से देखा और अपनी नाक सिकोड़ ली। उसका पेट खाली था और यह नन्हा जीव उसकी भूख शांत करने के लिए पर्याप्त नहीं था, लेकिन चुन्नी साधारण बिल्लियों की तरह उसे मारकर खाने के बजाय कुछ बड़ा सोच रही थी। उसकी आँखों में एक शातिर चमक कौंधी। उसने तय किया कि वह इस नन्हे चूहे को अपनी भूख मिटाने का जरिया नहीं बल्कि एक बड़े शिकार का मोहरा बनाएगी।

चुन्नी ने चूहे की गर्दन को बहुत धीरे-से पकड़ा, ताकि उसे चोट न लगे और उसे लेकर पास के अनाज के गोदाम की ओर चल दी। उस गोदाम के बारे में मशहूर था कि वहाँ एक बहुत फुर्तीला जोजो नेवला रहता है, जो चूहों का शिकार करने में माहिर था और बिल्लियों को भी चकमा देता था। चुन्नी जानती थी कि अगर वह सीधे जोजो से भिड़ेगी तो हार सकती है। उसे जोजो को उसके बिल से बाहर लाना था।

गोदाम के एक अंधेरे कोने में पहुंचकर चुन्नी ने उस छोटे चूहे को फर्श पर छोड़ दिया, लेकिन उसे पूरी तरह आज़ाद नहीं किया। उसने चूहे की पूँछ को अपने एक पंजे से हल्का-सा दबा कर रखा और उसे डराने लगी, जिससे वह ज़ोर-ज़ोर से चीं-चीं करने लगे। नन्हे चूहे की चीखें शांत गोदाम में गूँजने लगीं। यह एक ऐसा संगीत था, जिसे सुनकर कोई भी शिकारी अपनी लार नहीं रोक सकता था।

चुन्नी खुद एक खाली बोरे के पीछे छिप गई और अपनी साँसें रोककर इंतज़ार करने लगी। कुछ ही मिनटों में गोदाम के एक कोने में रखे लकड़ी के फट्टों के पीछे हलचल हुई और जोजो की दो चमकती हुई आँखें अंधेरे में उभरीं। चूहे की आवाज़ ने उसे लालच से भर दिया। उसे लगा कि एक लाचार चूहा फँसा हुआ है। जोजो धीरे-धीरे रेंगते हुए बाहर निकला। चुन्नी की योजना काम कर रही थी।

जोजो उस छोटे चूहे पर झपटने के लिए बिल्कुल करीब आया, जैसे ही उसका ध्यान चूहे पर केंद्रित हुआ, तो चुन्नी बोरे के पीछे से बिजली जैसी छलांग लगा दी। जोजो को संभलने का एक सेकंड भी नहीं मिला। चुन्नी के नुकीले नाखून सीधे उसकी गर्दन पर जा गड़े। दोनों के बीच संघर्ष शुरू हुआ। जोजो फुर्तीला था। उसने पलटवार करने की कोशिश की, लेकिन चुन्नी आज एक मिशन पर थी। उसने अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी।

कुछ देर की ज़ोर-आज़माइश के बाद जोजो पस्त हो गया। चुन्नी ने उसे चित कर दिया था। वह छोटा चूहा जो अब तक मौत के साये में था, मौका पाते ही अंधेरे में ओझल हो गया। चुन्नी को उस चूहे के भाग जाने का कोई अ़फसोस नहीं था, क्योंकि उसके सामने अब एक ऐसा शिकार पड़ा था, जिसे देखकर मुहल्ले की बाकी बिल्लियाँ दाँतों तले उँगली दबा लेती थीं।

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उस शाम जब चुन्नी गोदाम से बाहर निकली तो उसकी चाल में एक अलग ही रौब था। उसने साबित कर दिया था कि शिकार सिर्फ ताकत से नहीं बल्कि सही रणनीति और सब्र से किया जाता है। उसने एक छोटे-से चूहे को जीवनदान देकर अपने लिए एक शानदार दावत का इंतज़ाम कर लिया था। उसकी बुद्धिमानी की चर्चा अब पूरे इलाके के जानवरों में होने लगी थी। चुन्नी ने उस दिन न केवल अपनी भूख मिटाई बल्कि खुद को उस इलाके की सुपर शिकारी के रूप में स्थापित कर दिया।

डॉ. कुसुम रानी नैथानी

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