माता पार्वती ने रखा था कोकिला व्रत

हिंदू धर्म में कोकिला व्रत का बहुत महत्व है, जो आषाढ़ पूर्णिमा पर रखा जाता है। एक धार्मिक उपवास है, जिसे मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिए रखती हैं। माना जाता है कि कोकिला व्रत माता पार्वती ने शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए रखा था।

इस दिन माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में सुख, समृद्धि और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। कोकिला व्रत का विशेष महत्व इसलिए भी है, क्योंकि इसे करने से व्यक्ति के मन और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं, कठिनाइयां दूर होती हैं।

पूजा मुहूर्त

10 जुलाई, गुरुवार की शाम 7 बजकर 22 मिनट से
रात 9 बजकर 24 मिनट।

पूजा विधि

कोकिला व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान करें। पूजा-स्थल को स्वच्छ करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर माँ पार्वती की एक छोटी मूर्ति कोकिला रूप में स्थापित करें। उसके बाद उन्हें रोली, अक्षत, फूल, फल, मिठाई आदि अर्पित करें। गंगाजल से सभी मूर्ति का छिड़काव करें। दीपक और धूप जलाएँ। मां पार्वती और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। कोकिला व्रत की कथा पढ़ें। आरती करें और व्रत की सफलता की प्रार्थना करें।

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