नवाचार को बढ़ावा देने हेतु यूओएच तथा आईआईएल के बीच एमओयू

हैदराबाद, हैदराबाद विश्वविद्यालय के जीवन विज्ञान इनक्यूबेशन केंद्र एस्पायर-बायोनेस्ट द्वारा आज वन हेल्थ ढाँचे के एकीकृत दृष्टिकोण के तहत नवाचार को बढ़ावा देने के लिए वैक्सीन केंद्रित जैव प्रौद्योगिकी कंपनी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (आईआईएल) के साथ रणनीतिक समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी उद्योग और स्टार्टअप के बीच गहन जुड़ाव को बढ़ावा देते हुए भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जैव प्रौद्योगिकी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में योगदान प्रदान करेगी।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एस्पायर-बायोनेस्ट तथा आईआईएल के बीच हुई यह साझेदारी चिकित्सा पद्धतियों, निदान, चिकित्सा उपकरणों तथा संबद्ध प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान करेगी। इसके तहत व्यावहारिक अनुसंधान और व्यवसायीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे आपसी हित के उत्पादों के सह-विकास, सत्यापन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बाजार तक पहुँच संभव हो सकेगी। साथ ही नवाचार और वास्तविक उपयोग के बीच की खाई को भी पाटा जा सकेगा। यह सहयोग प्रारंभिक चरण के नवाचारों को उपयोगी जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों में बदलने की गति और सफलता दर को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा।

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स्टार्टअप्स को तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञता का लाभ

समझौते के तहत स्टार्टअप्स को आईआईएल के तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। साथ ही आपसी सहमति के आधार पर उन्नत प्रक्रिया विकास और विश्लेषणात्मक सुविधाओं तक पहुँच प्राप्त होगी। इसमें वायरल और बैक्टीरियल वैक्सीन विकास से संबंधित क्षमताएँ भी शामिल हैं। साथ ही उत्पादन बढ़ाने और विनिर्माण की तैयारी के लिए आईआईएल की सीडीएमओ क्षमताओं का लाभ उठाने के अवसरों का भी पता लगाया जाएगा।

दोनों संगठन उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हैकाथन, प्री-इनक्यूबेशन प्रोग्राम, सेमिनार आदि का संयुक्त रूप से आयोजन करेंगे। आईआईएल इनक्यूबेशन ईकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सीएसआर पहलों के माध्यम से एस्पायर-बायोनेस्ट को समर्थन देगा। समझौते ज्ञापन हस्ताक्षर कार्यक्रम में इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड के निदेशक डॉ. आनंद कुमार तथा एस्पायर-बायोनेस्ट के निदेशक प्रो. एस. राजगोपाल ने कहा कि यह साझेदारी भारत के जैव प्रौद्योगिकी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा स्टार्टअप्स को उद्योग विशेषज्ञता, बुनियादी ढाँचे, व्यावसायीकरण के रास्ते आदि उपलब्ध कराकर बाजार के लिए तैयार उत्पादों तक पहुँचने में सक्षम बनाने के लिए इस तरह की साझेदारियाँ आवश्यक हैं।

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