मुमुक्षु अक्ष कवाड़ का किया गया स्वागत – अभिनंदन

हैदराबाद, मुमुक्षु अक्ष कवाड़ का स्वागत व अभिनंदन समारोह समारोह भव्य रूप से किया गया। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीना बेकरी लेन में आदिनाथ भगवान के दर्शन-वंदन से शुरू हुआ दीक्षार्थी का वरघोड़ा श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर, तोपखाना पहुँचकर शंखेश्वर पार्श्वनाथ के दर्शन-वंदन के पश्चात फीलखाना स्थित श्री महावीर स्वामी जिनालय पहुँचा, जहाँ परमात्मा वीर प्रभु के दर्शन-वंदन किया गया। इसके पश्चात महावीर भवन में अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गय, जहाँ मुमुक्षु का श्री पादरू प्रवासी जैन महिला एवं बालिका मंडल, हैदराबाद द्वारा भव्य प्रवेश स्वागत किया गया। मुमुक्षु अक्ष कवाड़ के पिता महावीर कवाड़ व माता संगीता देवी को मंचासीन करवाया गया।

हैदराबाद में मुमुक्षु अक्ष कवाड़ का दीक्षा स्वागत समारोह

मुनिराज अभिनंदनचंद्रसागरजी म.सा. ने मंगलाचरण के पश्चात बताया कि मानव जन्म का निर्माण हुआ है महामानव बनने के लिए, आत्मा से परमात्मा बनने की यात्रा के लिए और शून्य से पूर्ण होने के लिए, लेकिन हम संसार के भौतिक सुखों के पीछे चकाचौंध होकर इस जीवन को व्यर्थ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी मुमुक्षु अक्ष की दीक्षा का मुहुर्त निकला है, दीक्षा अभी बाकी है, लेकिन चारित्र संयम बोध का महत्व इतना अद्भुत है कि संयम स्वीकार करने के संकल्प से ही मुमुक्षु सबके लिए वंदनीय व दर्शनीय हो गए, तो समझो कि संपूर्ण संयम जीवन कितना सरल व आनंदनीय होगा।

मुमुक्षु की बहन सोनू मरड़िया ने कहां कि भाई अक्ष आत्म कल्याण के सबसे ऊँचे पायदान पर पहुँचने के लिए पहला कदम रख रहा है। इससे उन्हें गर्व व आनंद की ऐसी अनुभूति हो रही है, जिसे शब्दों में ढालना मुश्किल है। यह हमारे लिए सबसे सुंदर, लेकिन कठोर समय भी है। दादा-दादी व परिवार के संस्कारों का प्रमाण है कि भाई दुनिया की ऊँचाइयों की परवाह किए बिना आत्मा की ऊँचाइयों को चुनने की प्राथमिकता देने वाला बहुत बड़ा वीर निकला।

दीक्षा की स्वीकृति पर माता-पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त

मुमुक्षु अक्ष ने कहा कि आप सभी ने सांसारिक जीवन में सबके लिए सब कुछ किया, लेकिन आत्मा के लिए क्या किया इस पर जरूर चिंतन करना चाहिए। भगवान ने कहा है कि मनुष्य जीवन बहुत ही दुर्लभ है, इसे व्यर्थ मत कीजिए। धार्मिक क्रियाकलापों में अंतर्मन से गंभीर श्रावक-श्राविकाओं को बहुत से महानुभाव मजाक-मजाक में दीक्षार्थी का टैग दे देते हैं, जो अंतराय कर्मों का बंधन का कारण बनते है।

हैदराबाद में मुमुक्षु अक्ष कवाड़ का दीक्षा स्वागत समारोह

इससे बचना चाहिए। उन्होंने माता-पिता व परिवार को दीक्षा की स्वीकृति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं इकलौता बेटा होते हुए भी उन्होंने बिना अपने भविष्य की परवाह किए मुझे प्रथम बार में ही दीक्षा की स्वीकृति दे दी, जिसका मैं हमेशा उनका आभारी रहूँगा। मुझ पर नेमीनाथ भगवान ऐसी कृपा ही होगी, जो मैं कुछ चंद मुमुक्षों में से एक हूँ जिसे प्रथम प्रयास में ही दीक्षा की स्वीकृति मिल गई। मुमुक्षु ने सभी को दीक्षा में पधारने का निमंत्रण देते हुए कहा कि हमें साधु निंदा व दिखावे के धर्म से हमेशा बचना चाहिए।

हैदराबाद प्रवासी मुमुक्षु के मामा जवेरीलाल बालड़ ने कहा कि मुमुक्षु भांजा कोई चीज छोड़ नहीं रहा, बल्कि दीक्षा के साथ संयम जीवन जैसी अमूल्य चीज पा रहा है, जिसके लिए देवता भी आतुर रहते हैं। मुमुक्षु को मोक्ष अभिलाषा पूर्ण हो ऐसी मंगलकामना है। मुमुक्षु के नहिहाल पक्ष के मामेरे भाई-बहनों ने नाटक मंचन द्वारा अक्ष के बचपन व दीक्षा निर्णय पर प्रकाश डाला।

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6 मई को शंखेश्वर जैन तीर्थ में दीक्षा हेतु सपरिवार आमंत्रण

लाभार्थी परिवार सुमेरमल महेंद्र कुमार कवाड़, बाबूलाल जवेरीलाल बालड़, ललितकुमार हस्तीमलज बालड़, सीए उत्तमचंद पुखराज गोलेच्छा, सुखराज मिश्रीमल मरड़िया, लालचंद मिश्रीमल मरड़िया, प्रवीण कुमार राणमल संकलेचा रासोणी व रेशमी बाई भंवरलाल कटारिया संघवी परिवार के सदस्यों ने माता-पिता व मुमुक्षु अक्ष कवाड़ का भव्य स्वागत व अभिनंदन किया। कवाड़ परिवार की ओर से अशोक कवाड़ ने उपस्थित श्री संघ को आगामी 6 मई को गुजरात स्थित शंखेश्वर जैन तीर्थ में आयोजित होने वाली दीक्षा में सपरिवार भाग लेने का आग्रह किया। खुशबु बालड़, विधि मरड़िया व अंजु गोलेच्छा ने भाव व्यक्त किए। श्री पादरू प्रवासी जैन संघ, हैदराबाद के पदाधिकारियों द्वारा मुमुक्षु का साफा, शाल, माला व अभिनंदन-पत्र द्वारा विशेष बहुमान किया गया।

श्री महावीर स्वामी जैन श्वेताम्बर संघ, फीलखाना, श्री शंखेश्वर जैन श्वेताम्बर जैन संघ, तोपखाना व श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन संघ, सीना बेकरी लेन के पदाधिकारियों द्वारा मुमुक्षु अक्ष कवाड़ का बहुमान किया गया। मुमुक्षु द्वारा उपस्थित् जन समूह को वर्षीदान दिया गया। मंच संचालन करते हुए दिनेश बालड़ ने दीक्षा की महता बताते हुए मुमुक्षु के माता पिता के शासन समर्पित त्याग की सराहना की। वरघोड़े में हीर सूरी जैन बैंड द्वारा विशेष सेवा दी गई। सांझी-गीत में गायिका चंद्रा मुणोत ने स्तवनों व दीक्षा गीत द्वारा समा बांध कर सभी को मंत्रमुग्ध किया। सांझी गीत में महिला मंडल द्वारा तारक मेहता का उल्टा चश्मा की तर्ज पर नाटक प्रस्तुत कर जैन दीक्षा का महत्व समझाया गया। सभी व्यवस्थाओं में पादरू जैन युवा संगठन, हैदराबाद का विशेष सहयोग रहा।

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