Jannah Theme License is not validated, Go to the theme options page to validate the license, You need a single license for each domain name.

हैदराबाद में घूमने के लिए म्यूज़ियम

हैदराबाद, अपनी समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और विविध कला के लिए जाना जाता है। यहां के म्यूज़ियम न केवल शहर के गौरवशाली अतीत को जीवंत रखते हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों की कलाकृतियों, ऐतिहासिक वस्तुओं और अनोखे संग्रहों के माध्यम से विज़िटर्स को ज्ञान और मनोरंजन का अद्वितीय अनुभव भी प्रदान करते हैं। चाहे आप इतिहास प्रेमी हों, कला के शौकीन हों या बच्चों के साथ कुछ रोचक सीखने की तलाश में हों, हैदराबाद के ये म्यूज़ियम हर उम्र के लोगों के लिए कुछ न कुछ खास पेश करते हैं।

सालारजंग म्यूज़ियम

हैदराबाद में सालारजंग म्यूज़ियम भारत का तीसरा सबसे बड़ा म्यूज़ियम है, जो दुनिया भर की एंटीक चीज़ों के एक ही आदमी के विशाल कलेक्शन के लिए मशहूर है।

पता: सालारजंग म्यूज़ियम, दारुलशिफ़ा, हैदराबाद, तेलंगाना 500002।

समय: शुक्रवार और सरकारी छुट्टियों को छोड़कर, रोज़ाना सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक खुला रहता है। टिकट काउंटर शाम 5:15 बजे बंद हो जाते हैं।

एंट्री फीस:

भारतीय वयस्क: 50 रुपये।

भारतीय बच्चे (5 साल से ऊपर): 20 रुपये।

विदेशी नागरिक: 1000 रुपये।

फोटोग्राफी (स्टिल कैमरा/स्मार्टफोन): 50 रुपये अतिरिक्त।

कलेक्शन की खास बातें:

म्यूजिकल क्लॉक: एक मुख्य आकर्षण जहाँ सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक हर घंटे एक छोटी मूर्ति निकलकर घंटे बजाती है।

वेल्ड रेबेका: जियोवानी मारिया बेंज़ोनी की एक मशहूर संगमरमर की मूर्ति जो एक घूंघट वाली महिला जैसी दिखती है, लेकिन इसे संगमरमर के एक ही टुकड़े से बनाया गया है।

हथियार और कवच्छ : एक शानदार कलेक्शन जिसमें रानी नूर जहाँ जैसी ऐतिहासिक हस्तियों के खंजर और सम्राट औरं गज़ेब की तलवार शामिल है।

सुदूर पूर्वी कला: जापानी और चीनी कला की वस्तुओं का बड़ा कलेक्शन, जिसमें चीनी मिट्टी, कांसा और लाख की चीज़ें शामिल हैं।

बच्चों का सेक्शन: इसमें खिलौने, एक मॉडल ट्रेन और दूसरी चीज़ें हैं जो बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा देने और उन्हें खुश करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

तेलंगाना राज्य पुरातत्व म्यूज़ियम

तेलंगाना स्टेट आर्कियोलॉजी म्यूज़ियम, जिसे हैदराबाद म्यूज़ियम के नाम से भी जाना जाता है, हैदराबाद का सबसे पुराना म्यूज़ियम है, जो पब्लिक गार्डन्स में स्थित है। यह एक खूबसूरत इंडो-सारासेनिक स्टाइल की बिल्डिंग में है और यह अपनी कलाकृतियों के बड़े कलेक्शन के लिए जाना जाता है, जिसमें एक दुर्लभ मिस्र की ममी भी शामिल है।

पता: पब्लिक गार्डन्स, पहली मंज़िल, एच ए सी ए भवन, पी जी रोड, 5-10-193, श्रीनगर – कन्याकुमारी हाईवे, कंट्रोल रूम के पास, लकड़ीकापुल, हैदराबाद, तेलंगाना 500004।

समय: शुक्रवार और सरकारी छुट्टियों को छोड़कर, सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है।

एंट्री फीस:

भारतीय वयस्क: 10–20 रुपये।

भारतीय बच्चे: 5–10 रुपये।

विदेशी नागरिक: 50 रुपये (वयस्क) और 25 रुपये (बच्चा)।

फोटोग्राफी (स्टिल कैमरा/स्मार्टफोन): 50 रुपये अतिरिक्त।

संग्रह की मुख्य बातें:

मिस्र की ममी: म्यूज़ियम का सबसे लोकप्रिय आकर्षण राजकुमारी नैशु की एक प्राचीन ममी है, जो टॉलेमी VI फिलोमेटर की बेटी थीं, और माना जाता है कि यह भारत में मौजूद सिर्फ़ छह ममियों में से एक है।

बौद्ध मूर्तियाँ: बौद्ध गैलरी में शानदार पत्थर की नक्काशी और अवशेष हैं, जिनमें से कुछ 2री और 3री शताब्दी ईसा पूर्व के हैं।

अजंता चित्रकला: म्यूज़ियम प्रसिद्ध अजंता गुफा चित्रों की अनोखी प्रतिकृतियाँ प्रदर्शित करता है।

हथियार और कवच्छ: ऐतिहासिक हथियारों का एक संग्रह, जिसमें सम्राट औरंगज़ेब की तलवार और रानी नूर जहाँ के खंजर शामिल हैं।

सिक्के: इस क्षेत्र पर शासन करने वाले विभिन्न राजवंशों के सिक्कों (सोना, चाँदी, ताँबा और सीसा) का एक बड़ा संग्रह।

हिंदू और जैन मूर्तियां: चालुक्य और विजयनगर काल की कलाकृतियां, साथ ही जैन मूर्तियां।

सुधा कार म्यूज़ियम

हैदराबाद में सुधा कार्स म्यूज़ियम दुनिया का पहला हाथ से बना “अजीब” कारों का म्यूज़ियम है, जिसमें रोज़मर्रा की चीज़ों के आकार की काम करने वाली गाड़ियों का अनोखा कलेक्शन है। प्रदर्शनी को तीन बड़े हॉल में ऑर्गनाइज़ किया गया है। हर गाड़ी के पास एक जानकारी देने वाला पट्टिका है जिसमें उसे बनाने में लगा समय, उसकी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट और उसकी मैक्सिमम स्पीड की डिटेल दी गई है। ज़्यादातर चीज़ें स्क्रैप और रीसायकल किए गए मटीरियल से बनी हैं।

पता : 19-5-15, 1/डी, बहादुरपुरा एक्स रोड, एपीएचबी कॉलोनी, बहादुरपुरा, हैदराबाद, तेलंगाना 500064।

समय: रोज़ सुबह 9:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुला रहता है।

एंट्री फीस:

बड़ों के लिए: 150 रुपये।

बच्चों के लिए: 120 रुपये।

फोटोग्राफी: मोबाइल फोन या कैमरे के लिए 100 रुपये।

मुख्य आकर्षण

अनोखे गाड़ियों के आकार: बर्गर, लिपस्टिक, कैमरा, स्टिलेटो हील, टॉयलेट सीट और यहाँ तक कि कंडोम के आकार की कारें और बाइक।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: म्यूज़ियम में दुनिया की सबसे बड़ी तिपहिया साइकिल है, जो 41 फीट से ज़्यादा ऊँची है।

विंटेज कलेक्शन: एक सेक्शन जो अलग-अलग समय की पुरानी कारों और मोटरसाइकिलों को फिर से ठीक करके रखा गया है।

काम करने वाले एग्ज़िबिट्स: लगभग सभी “अजीब” कारें चलने की हालत में हैं और कभी-कभी रोड शो के लिए बाहर निकाली जाती हैं।

हाल ही में जोड़ा गया: 2024-2025 में, एक मैटडोर चेसिस पर बना अयोध्या राम मंदिर का एक मोबाइल रेप्लिका उनके ट्रैवलिंग एग्ज़िबिशन का एक मुख्य आकर्षण रहा है।

नेहरू शताब्दी जनजातीय म्यूज़ियम

हैदराबाद के मसाब टैंक में स्थित नेहरू शताब्दी जनजातीय संग्रहालय, एक सांस्कृतिक संस्थान है जो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के विभिन्न आदिवासी समुदायों की समृद्ध विरासत, कला और परंपराओं को दिखाने के लिए समर्पित है।

पता: ट्राइबल कल्चरल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, डी.एस.एस. भवन, चाचा नेहरू पार्क के सामने, मसाब टैंक, हैदराबाद, तेलंगाना 500028।

समय: सोमवार से शनिवार सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है। रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर बंद रहता है।

एंट्री फीस:

एंट्री फीस बहुत कम है, अक्सर फ्री होती है या प्रति व्यक्ति लगभग 10 रुपये का छोटा सा शुल्क लगता है।

संग्रह की मुख्य बातें

डायोरमा: आदिवासी जीवन के विस्तृत दृश्य, जिसमें चेंचु, कोया और लंबाडा जैसी जनजातियों की रोज़ाना की गतिविधियाँ, शिकार और साप्ताहिक बाज़ार शामिल हैं।

कलाकृतियाँ: रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाली कई तरह की चीज़ें, जैसे पारंपरिक कपड़े, गहने, खेती और शिकार के औजार (धनुष, तीर, जाल), वाद्य यंत्र, और बेल मेटल और गढ़ा हुआ लोहा से बनी हस्तशिल्प।

कला और शिल्प: पारंपरिक कला रूपों, चित्रों और मूर्तियों का प्रदर्शन, जो आदिवासी कारीगरों की अनोखी कलात्मक अभिव्यक्तियों और रूपांकनों (अक्सर लाल पर सफेद डिज़ाइन) को दिखाते हैं।

लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम: इस कॉम्प्लेक्स में आदिवासी समुदायों पर 14,500 से ज़्यादा किताबों वाली एक लाइब्रेरी और एक मिनी-ऑडिटोरियम भी है, जहाँ आदिवासी संस्कृति और विकास पर फिल्में दिखाई जाती हैं।

फोटोग्राफिक प्रदर्शनियाँ: अलग-अलग आदिवासी समुदायों के जीवन, रीति-रिवाजों और त्योहारों को दिखाने वाली तस्वीरों की एक सीरीज़ जानकारी भरा संदर्भ देती है।

सेंटेनरी हेरिटेज म्यूज़ियम

हैदराबाद के गनफाउंड्री इलाके में स्थित सेंटेनरी हेरिटेज म्यूज़ियम एक सांस्कृतिक संस्थान है जो तेलंगाना क्षेत्र के समृद्ध इतिहास और पुरातात्विक खोजों को दिखाता है। इसे पुरातत्व विभाग के 100 साल पूरे होने पर स्थापित किया गया था।

पता: डिपार्टमेंट ऑफ़ हेरिटेज, नंबर 5-9-143, गोलकोंडा हैंडीक्राफ्ट्स एम्पोरियम के सामने, गनफाउंड्री, हैदराबाद, तेलंगाना 500001।

समय: सोमवार से शनिवार सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है। रविवार को बंद रहता है।

एंट्री फीस:

म्यूज़ियम में विज़िटर्स के लिए एंट्री फ्री है।

संग्रह की मुख्य बातें

पुरातत्व अवशेष: तेलंगाना के इतिहास के अलग-अलग समय के टेराकोटा की मूर्तियाँ, पत्थर की मूर्तियाँ, नक्काशी और प्रागैतिहासिक कला का प्रदर्शन।

मंदिरों की प्रतिकृतियाँ: इसमें उन मंदिरों के स्केल मॉडल हैं जिन्हें श्रीशैलम प्रोजेक्ट के दौरान श्रीशैलम जलमग्न क्षेत्र से दूसरी जगह ले जाया गया था।

स्टुको के टुकड़े और पेंटिंग: मुख्य हॉल में स्टुको कला के टुकड़े और विभिन्न पेंटिंग लगी हुई हैं।

ऐतिहासिक औजार और वस्तुएँ: इस संग्रह में पुरापाषाण काल के औजार, लोहे के उपकरण, विभिन्न राजवंशों के सिक्के, हाथीदांत की कंघी और नवपाषाण काल के लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रोज़मर्रा की वस्तुएँ शामिल हैं।

श्रीशैलम पवेलियन: एक खास सेक्शन जिसमें प्राचीन काले बेसाल्ट पत्थर जिसे द्वार बंदम कहा जाता है और श्री वरदा राजा स्वामी मंदिर से एक बारीकी से नक्काशी किया हुआ दरवाज़े का चौखट जैसी कलाकृतियाँ हैं।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button