रेल लाइन से नहीं जुड़ा ओडिशा का नवरंगपुर : बीजद सासंद
नयी दिल्ली, राज्यसभा में मंगलवार को बीजू जनता दल के मुजीबुल्ला खान ने दावा किया कि ओडिशा के नवरंगपुर जिले में आज तक रेल लाइन नहीं है जबकि देश को आजाद हुए 76 साल हो गए हैं।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए बीजद के खान ने कहा कि ओडिशा का नवरंगपुर और मलकानगिरी, दोनों जिले जनजाति बहुल हैं और उनकी अपनी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि नवरंगपुर जिले में आज तक रेल लाइन नहीं है जबकि देश को आजाद हुए 76 साल हो गए। हम नवरंगपुर वासियों ने आज तक रेल लाइन नहीं देखी। खाना ने कहा कि ओडिशा के जयपुर से नवरंगपुर और जयपुर से मलकानगिरी के लिए रेल संपर्क की मांग लंबे समय से की जा रही है।
खाना ने कहा कि दस साल पहले से, 2016 से इसके लिए प्रयास किए गए हैं और समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर हो गए जिसमें राज्य सरकार की देय राशि का भी ब्यौरा था। उन्होंने कहा कि 2016 से आज 2016 आ गया लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। खान ने कहा कि जयपुर से नवरंगपुर 38 से 40 किमी और मलकानगिरी करीब 140 किमी दूर है। इतनी सी दूरी तय करने में अब तक तो दस साल लग गए और पता नहीं कि आगे कितना समय लगेगा।
बीजद सदस्य ने 40 किमी रेल लाइन न बनने पर रेल मंत्री पर किया तंज
बीजद सदस्य ने दावा किया कि पहले भाजपा की ओर से कहा गया कि राज्य में जब डबल इंजन सरकार बनेगी तब इस काम के साथ साथ बहुत कुछ होगा। अब तो आपको सत्ता में दो साल हो गए। लेकिन आज तक कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर तंज करते हुए कहा कि बीजद की मदद से आप रेल मंत्री बने लेकिन हमें 40 किलोमीटर की रेल लाइन दे नहीं पाए।
बीजद सदस्य ने कहा कि बीजद की मदद से वैष्णव दो दो बार इस सदन में आए लेकिन अब तक जयपुर से नवरंगपुर तक 40 किलोमीटर की रेल लाइन का संपर्क नहीं दे पाए। बीजद की ही सुलता देव ने कहा कि राज्य में प्राचीन जनजातियों की आबादी करीब एक लाख है जो नौ जिलों में फैली है और ये लोग बाहरी हस्तक्षेप बिल्कुल पसंद नहीं करते। सुलता ने कहा कि यह लोग पहाड़ी इलाकों में रहते हैं और नीचे नहीं आना चाहते।
ए डी सिंह ने ओडिशा में तटीय क्षरण से प्रभावित गांवों का मुद्दा उठाया
सुलता ने कहा कि नवीन पटनायक नीत बीजद सरकार के समय में इन जनजातियों के कल्याण के लिए कई काम किए गए थे। सुलता ने दावा किया कि अब इन प्राचीन आदिवासियों को विस्थापित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि इन आदिवासियों को उनकी जगहों पर रहने दिया जाए और उनके लिए स्वास्थ्य सुविधा दी जानी चाहिए, उन्हें चिकित्सा संबंधी सुविधाओं की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे लोग संस्थागत प्रसव का लाभ उठाएं। राजद के ए डी सिंह ने ओडिशा में तटीय क्षरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसकी वजह से कई गांवों के डूबने का खतरा है।
ए डी सिंह ने दावा किया कि क्षरण के कारण लोगों के लिए अजीविका चलाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि न वह समुद्र में मछली पकड़ने जा पा रहे हैं न ही खेती कर पा रहे हैं। सिंह के अनुसार, विभिन्न शोध भी बता चुके हैं कि भारत में तट क्षरण की वजह से जितने राज्य प्रभावित होंगे उनमें से सबसे अधिक नुकसान ओडिशा को होगा। उन्होंने सरकार से उचित कदम उठाने की मांग की। (भाषा)
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