नकारात्मक असर घटाने को सोशल मीडिया पर नियंत्रण जरूरी : कैलाश सत्यार्थी

हैदराबाद, नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने सोशल मीडिया के नियमन का समर्थन करते हुए शनिवार को कहा कि ऐसा करने से इसके नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है। हालांकि सत्यार्थी ने यह भी कहा कि इसके सकारात्मक पहलू भी हैं, जैसे कि यह नैतिक मूल्यें के प्रसार और समुदायें के निर्माण में मदद कर सकता है।

सत्यर्थी की यह टिप्पणी ऑस्ट्रेलिया द्वारा 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के निर्णय के संदर्भ में आई है। हैदराबाद साहित्य महोत्सव में भाग लेने पहुँचे सत्यार्थी ने कहा कि मेरा मानना है कि दुनिया में कही भी सोशल मीडिया को प्रतिबंधित नही किया जाना चाहिए, बल्कि इसे नियमन के तहत रखा जाना चाहिए, क्येंकि सोशल मीडिया के माध्यम से झू, नफरती विचार, हिंसा, और फर्जी खबरें फैलाई जाती हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि हम यह भी देखते हैं कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग बच्चों की तस्करी और बाल यौन शोषण के लिए किया जाता है। इन चीजों को नियमन के तहत लाना जरूरी है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोका जाना चाहिए। आंध्र प्रदेश सरकार ने एक समिति का गन किया है, जो 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों की ऑनलाइन मंच तक पहुँच को नियंत्रित या पूरी तरह रोकने की संभावना सहित कई चीजों का अध्ययन करेगी।

केवल कंटेंट नहीं, पूरे डिजिटल नेटवर्क पर हो कार्रवाई

ऑस्ट्रेलिया 10 दिसंबर 2025 से 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन गया है, जिससे विभिन्न मंचों तक उनकी पहुँच अवरुद्ध हो गई है। सत्यार्थी ने कहा कि उनका संगन ऑनलाइन माध्यम से बाल यौन शोषण को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नही है और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संधि के लिए 20 से अधिक राष्ट्रपतियें, प्रधानमंत्रियें तथा अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात की।

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सत्यार्थी ने कहा कि यह मामला केवल ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री देखने का नही है। कई देशों में इसके लिए प्रासंगिक कानून हैं और इंटरपोल भी इस पर सक्रिय है। हालाँकि इंटरनेट प्रदाताओं को रोकने के लिए कोई विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय कानून या संयुक्त राष्ट्र संधि नही है। क्येंकि वे स्त्रोत से ही जाँच कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बाल यौन शोषण से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री अपलोड और डाउनलोड इंटरनेट प्रदाताओं के माध्यम से होती है, इसलिए इंटरनेट और वाई-फाई प्रदाताओं (दूरसंचार कंपनियें) को इसके लिए जवाबदेह हराया जाना चाहिए।

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