नेपाल : कौन है बालेन्द्र शाह?
नेपाल में जेनरेशन ज़ेड के हिंसक आंदोलन ने ओली सरकार का तख्तापलट दिया है और देश की सियासी फिज़ा बदल दी है। इस बीच एक चेहरा तेजी से परिदृश्य में उभरा है। यह चेहरा है, बालेंद्र शाह या बालेन शाह, जिन्हें बोल-चाल में बालेन कहकर भी पुकारा जाता है। बालेन की उम्र ज्यादा नहीं है। यही कोई- पैंतीस वर्ष। उनका जन्म 27 अप्रैल, 1990 को हुआ। वह फिलवक्त राजधानी काठमांडू के महापौर हैं।
सामान्यत: मेयर नगर निगमों के कामकाज में उलझे रहते हैं, लेकिन बालेन का पिंड अलग है। उन्होंने अपनी आाढामक और तुर्श राजनीति से सारे देश का ध्यान आकृष्ट किया है और आंदोलन की धुरी बनकर उभरे हैं। सोशल मीडिया पर वह खासे लोकप्रिय हैं। उनके लाखों फालोअर्स हैं। नेपाली युवाओं के वह आईकॉन या रोल मॉडल हैं। यह अकारण नहीं है कि सन् 2023 में टाइम ने उन्हें विश्व के 100 शीर्ष व्यक्तित्वों में शामिल किया। वह नेपाली रैपर, संगीतकार, इंजीनियर और राजनीतिज्ञ हैं। काठमांडू के महापौर चुने गये वह पहले निर्दलीय प्रत्याशी हैं और मुद्दों पर किसी भी अथार्टी से भिड़ने के मामले में उनका कोई सानी नहीं है।
मेयर बनने तक संगीत और समाज सेवा में सक्रिय
बालेन शाह काठमांडू के 15वें मेयर हैं। वह सन् 2022 में ग्रीष्म में पांच वर्षों के लिए मेयर चुने गये थे। उन्होंने 10 प्लस 2 की पढ़ाई बीएस निकेतन हायर सेकेंड्री स्कूल से की। हिमालयन व्हाइट हाउस इंटरनेशनल कालेज से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री के बाद उन्होंने भारत में कर्नाटक में स्थित विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से एमटेक किया। उनके पिता आयुर्वेद चिकित्सक थे, लेकिन बालेन का मन संगीत में रमा।
इसमें उन्हें खासी कामयाबी मिली। वह काठमांडू के रैप मुकाबलों में सक्रिय रहे। अपने गीतों और अदाओं से वह युवा वर्ग में लोकप्रिय सितारा बनकर उभरे। यह लोकप्रियता उनका जंपिंग बोर्ड साबित हुई और अराजनीतिक पृष्ठभूमि के बावजूद वह बत्तीस की उम्र में काठमांडू के मेयर चुन लिए गये। दिलचस्प बात है कि वह संगीत की दुनिया में अभी भी सक्रिय हैं। मेयर चुने जाने तक वह नेपाली हिपहॉप उद्योग में एक दहाई बिता चुके थे। नेवार के मधेशी बौद्ध परिवार में जनमे बालेन की पत्नी सबीना काफले सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी हैं।
बालेन के सुर्खियों में उभरने का क्रम उनके मेयर बनने के बाद शुरू हुआ। उन्होंने नागरिक सुविधाओं, कचरा निपटान और अतिक्रमण ध्वंस पर ध्यान केंद्रित किया। उनके एजेंडे में भ्रष्टाचार और अनियतिताओं का विरोध, बौद्ध स्थलों का विकास और बेहतर परिवहन तो शामिल है ही, वह वृहत्तर नेपाल के भी समर्थक हैं। वाम विचारों के बालेन के सन् 2023 में अपने दफ्तर में ग्रेटर नेपाल का नक्शा टांगने पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी।
बालेन शाह का भारत विरोधी रुख और कानूनी विवाद
बेजा कब्जा हटाने के फेर में वह निजी व्यापारियों, उड्डयन अभिकरण और पुलिस प्रशासन से टकरा चुके हैं और अदालती झमेलों में भी उलझे, लेकिन उन्होंने घुटने नहीं टेके और फैसलों पर अडिग रहे। इससे उन्होंने लोकप्रियता बटोरी। उन्होंने अवैध निर्माणों को तो तोड़ा ही, पुलिस के अवैध सब-स्टेशनों को भी नहीं बख्शा। वह भारत के प्रति तल्ख हैं और पूर्वोत्तर भारत के भूभाग वापस नेपाल में चाहते हैं।

एक दफा उन्होंने राजधानी की सीमा में भारतीय फिल्मों की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया था और फिल्म आदिपुरूष में सीता भारत की बेटी है लाइन हटाने की मांग की। इस पर उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई और पाटन हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया। अदालती आदेश की अवहेलना में बालेन ने उसके पालन से इंकार किया। अंतत: सुप्रीम कोर्ट के दखल पर उन्होंने नरमी बरती, लेकिन अदालत और संघीय सरकार पर भारत के प्रभाव में होने का आरोप चस्पां किया। खबर है कि बालेन ने अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर सुशीला कार्की का समर्थन किया है।
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