यूजीसी के नये नियमों से हानि : केटीआर

हैदराबाद, पूर्व मंत्री व विधायक कल्वाकुंटला तारक रामा राव (केटीआर) के नेतफत्व में बीआरएस नेताओं ने दिल्ली में पेंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। बीआरएस नेताओं ने यूजीसी नियमों के मसौदे के संबंध में पेंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक ज्ञापन सौंपा। इसके बाद उन्होंने नितिन गडकरी से सूर्यापेट-सिरसिल्ला रोड से कोरुट्ला तक राष्ट्रीय राजमार्ग 365बी को चौड़ा करने का आग्रह किया।

मीडिया से बातचीत करते हुए केटीआर ने यूजीसी नियमों के नाम पर राज्यों को उनके अधिकारों से वंचित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नये नियमों से छात्रों को परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि हमने अपने विचार बताने के लिए पेंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपालों के माध्यम से पेंद्र द्वारा नियंत्रित करना संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को सर्च कमेटियों को जिम्मेदारी सौंपने के लिए नियम बनाए गए हैं। उन्होंने पेंद्र पर संघवाद की भावना को कमजोर करने वाले नए नियम बनाकर राज्यपालों के माध्यम से विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नए नियम एससी, एसटी और बीसी छात्रों के लिए अनुचित होंगे। बताया गया कि यूजीसी नियमों पर आपत्तियों वाली छह पफष्ठ की रिपोर्ट पेंद्रीय मंत्री को सौंपी गई है। उन्होंने मंत्री से नियमों में संशोधन करने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए, जो महासंघ की भावना के विरुद्ध हो। इसके अलावा उन्होंने पेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से राष्ट्रीय राजमार्ग 365बी का विस्तार करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी से अलग हुए विधायकों को निष्कासित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह अयोग्यता याचिकाओं पर वकीलों के साथ चर्चा कर रहे हैं। इससे पूर्व बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने कांग्रेस सरकार के शासन पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था चौपट हो गयी है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि समस्याओं के भंवर में फंसे लोगों की मुश्किलें कभी खत्म नहीं होंगी।

उन्होंने कहा कि खराब सफाई व्यवस्था के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं और स्ट्रीट लाइटों की कमी के कारण ग्रामीण इलाके अंधेरे में डूबे हुए हैं। केटीआर ने कांग्रेस सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि क्षतिग्रस्त स़ड़कों की मरम्मत के लिए पैसे नहीं हैं और पंचायत के ट्रैक्टरों में डीजल भरने का कोई साधन नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह लोक प्रशासन है या इंदिरम्मा का शासन है। उन्होंने याद दिलाया कि बीआरएस शासन के दौरान गांव की तरक्की के साथ ही गांव का स्वरूप बदल गया। उस समय पंचायतों को भरपूर धनराशि मिलती थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद ग्रामीणों की समस्या फिर एक बार बढ़ गयी है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरपंच कर्ज में डूबे हुए थे, क्योंकि कल तक लंबित बिल नहीं मिले थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे नींद से जागें और पंचायत के माध्यम से गांवों की समस्याओं का समाधान करें।

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