अगली पीढ़ी का जीएसटी: अब केवल 5% और 18% स्लैब रहेंगे लागू

नई दिल्ली, जीएसटी कर में प्रस्तावित सुधारों को अगली पीढ़ी का जीएसटी बताते हुए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा कि दो स्लैब वाली कर व्यवस्था क्रमिक रूप से एकल बिक्री/सेवा कर दर का रास्ता खोलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2047 तक एकल कर स्लैब हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नई जीएसटी व्यवस्था, जिसमें कर दरों को कम करते हुए केवल 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब निर्धारित किए गए हैं, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी और शुल्क के खतरों को भी कम करने में मदद करेगी।
अगर जीएसटी परिषद द्वारा प्रस्तावित दो स्लैब वाली व्यवस्था को मंजूरी मिल जाती है, तो यह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के मौजूदा चार स्लैब की जगह ले लेगी। इसके साथ ही 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत के स्लैब खत्म हो जाएँगे।
इसे अगली पीढ़ी का जीएसटी बताते हुए एक सरकारी अधिकारी ने कहा, यह एक क्रांतिकारी सुधार है। भारत में देखे गए आर्थिक सुधारों की अगर जीएसटी परिषद द्वारा प्रस्तावित दो स्लैब वाली व्यवस्था को मंजूरी मिल जाती है, तो यह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के मौजूदा चार स्लैब की जगह ले लेगी। इसके साथ ही 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत के स्लैब ख़त्म हो जाएँगे।
श्रेणी में, यह सबसे ऊपर है। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का अर्थ यह होगा कि लगभग सभी सामान्य उपयोग की वस्तुएँ निम्न कर श्रेणी में आ जाएँगी, जिससे कीमतों में कमी आएगी और उपभोग को बढ़ावा मिलेगा। अधिकारी ने कहा, कर कम होने का मतलब है कि लोगों की जेब में ज्यादा पैसा आएगा। इससे जाहिर है खपत बढ़ेगी।
अधिकारियों ने इस कवायद के पीछे के तर्क को समझाते हुए कहा कि सरकार द्वारा रोजमर्रा की जरूरी और सामान्य वस्तुओं पर पाँच प्रतिशत और 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने तथा बुरी समझे जाने वाली वस्तुओं पर 40 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव एक बड़ा और सोच-समझकर उठाया गया कदम है। लगभग छह महीने की लगातार बैठकों और विचार-विमर्श के बाद किए गए इन बदलावों को इस तरह से तैयार किया गया है कि बार-बार कर दरों को बदलने की जरूरत न पड़े और कर में कटौती (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का पैसा कहीं अटका न रहे।
अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही केंद्र का प्रस्ताव मंत्रियों के समूह (जीओएम) और जीएसटी परिषद से मंजूर हो जाएगा, कर दरों में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव खत्म हो जाएँगे और व्यवस्था स्थिर हो जाएगी। अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि हमने अगली पीढ़ी के जीएसटी का सुझाव मध्यम वर्ग, गरीबों, किसानों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को ध्यान में रखकर दिया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों पर कर कम रहे।
अधिकारी ने कहा, जब यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी और भारत विकसित देश बन जाएगा, तब हम एक ही दर वाला जीएसटी लागू करने पर विचार कर सकते हैं। एक ही दर वाली व्यवस्था विकसित देशों के लिए ठीक रहती है, क्योंकि वहाँ आमदनी और खर्च करने की क्षमता लगभग समान होती है। अधिकारी ने कहा, अंतिम लक्ष्य एक ही कर स्लैब वाली व्यवस्था लाना है, लेकिन फिलहाल इसके लिए सही समय नहीं है।
अधिकारी ने कहा कि बदलाव की इस पूरी प्रक्रिया में हर नियम-कायदे का पालन किया जा रहा है। केंद्र सरकार नेतृत्व की भूमिका निभा रही है, लेकिन संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए दरों में संतुलन का काम मंत्रियों के समूह (जीओएम) के साथ मिलकर कर रही है। अधिकारी ने कहा, हमने हर एक वस्तु को बारीकी से देखा है और कई मामलों में तीन-चार बार विचार भी किया है। चाहे किसानों के लिए कीटनाशक हों, छात्रों के लिए पेंसिल या एमएसएमई के लिए कच्चा मालहर वस्तु पर विस्तार से चर्चा की गई है और उसे आवश्यक या सामान्य वस्तुओं की श्रेणी में रखा गया है।
जीएसटी की संशोधित व्यवस्था के दिवाली तक लागू हो जाने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने जीएसटी दवें को युक्तिसंगत बनाने के लिए गठित राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह को अपना यह प्रस्ताव भेजा है। इसमें 12 और 28 प्रतिशत की मौजूदा कर दरों को हटा दिया गया है। वहीं, संशोधित जीएसटी व्यवस्था में दो कर स्लैब के अलावा विलासिता एवं नुकसानदेह वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की एक विशेष दर रखने का प्रस्ताव रखा गया है।
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