हैद्रा के लिए एनआरएससी का डेटा वज्रायुध : रंगनाथ
हैदराबाद, हैद्रा आयुक्त एवी रंगनाथ ने कहा कि तालाबों के वास्तविक सीमांकन का पता लगाने और उनके फुल टैंक लेवल की गणना तय करने में एनआरएससी द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा उपग्रह आधारित डेटा हैद्रा के लिए वज्रायुध साबित हो रहा है।

हैद्रा आयुक्त एवी रंगनाथ आज यहाँ एनआरएससी केंद्र में विकसित भारत 2047 की प्राप्ति में पृथ्वी अवलोकन पद्धतियाँ रुझान और चुनौतियाँ विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि तालाबों और नालों के एफटीएल तथा बफर ज़ोन से संबंधित अलग-अलग प्रकार की सूचनाएँ उपलब्ध होने के कारण सही सीमांकन करना कई बार कठिन हो जाता है।
ऐसे समय में एनआरएससी का उपग्रह डेटा दिशा-निर्देशक की तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि, पार्क, सड़कों और सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित स्थानों का सही आकलन करने में भी यह डेटा हैद्रा के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। हर सोमवार आयोजित होने वाली प्रजावाणी में सैकड़ों लोग अपनी शिकायतें लेकर आते हैं और उनकी शिकायतों की जाँच करने में भी इस डेटा का उपयोग किया जा रहा है। इससे यह भी स्पष्ट रूप से दिखाया जा सकता है कि समय के साथ भूमि उपयोग में कैसे परिवर्तन हुआ है, जिससे कई समस्याओं का समाधान आसान हो रहा है।
ओआरआर क्षेत्र तक फैला है हैद्रा का कार्यक्षेत्र
हैद्रा आयुक्त ने कहा कि हैद्रा का कार्यक्षेत्र ओआरआर तक फैला हुआ है। एनआरएससी के आँकड़ों के अनुसार लगभग 61 प्रतिशत तालाब गायब हो चुके हैं और यदि समय रहते संरक्षण के कदम नहीं उठाए गए तो अगले 15 वर्षों में शेष तालाबों के भी समाप्त होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति को देखते हुए तालाबों की पहचान कर उन्हें संरक्षित करने का अभियान तेज किया गया है। हैद्र की कार्रवाई के कारण अब रियल एस्टेट डेवलपर और अन्य लोग तालाबों के एफटीएल क्षेत्र में लेआउट बनाना या निर्माण कार्य करना बंद कर चुके हैं।
एनआरएससी की सेवाओं का और अधिक व्यापक रूप से उपयोग करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। वर्ष 2006 के डिजिटल एलिवेशन मॉडल डेटा के आधार पर तालाबों के एफटीएल और बफर ज़ोन तय किए जा रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर 1970 और 1990 के दशक के डेटा का भी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ओआरआर क्षेत्र में लगभग 13,50 एकड़ सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि को बचाया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 70,000 करोड़ बताई जा रही है।
हैद्रा आयुक्त ने बताया कि एनआरएससी से तेलंगाना कोर अर्बन रीजन के तालाबों के जल की गुणवत्ता पर उपग्रह आधारित अध्ययन करने में सहयोग देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रदूषण स्तर की निगरानी के साथ-साथ वैज्ञानिक आधार पर झीलों के पुनरुद्धार में मदद मिलेगी।
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जल संसाधनों के संरक्षण पर इसरो प्रमुख का जोर
बैठक में इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण में जल संसाधनों का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जल संसाधनों की रक्षा के लिए हाइड्रा द्वारा उठाए जा रहे कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष आधारित तकनीक को आम जनता तक पहुँचाने में हैद्रा की पहल मार्गदर्शक साबित हो सकती है। इसरो के वैज्ञानिकों ने भी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग से सार्वजनिक संपत्तियों और झीलों की रक्षा के लिए हाइड्रा के प्रयासों की प्रशंसा की।
कार्यक्रम में एनआरएससी के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान, इसरो के पूर्व अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया और तालाबों व पार्कों की सुरक्षा के लिए पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में एनआरएससी केंद्र में आयोजित संगोष्ठी में वैज्ञानिकों की उपस्थिति में हैद्रा रक्षा नागरिक केंद्रित पोर्टल का भी शुभारंभ किया गया। इस पोर्टल के माध्यम से ओआरआर क्षेत्र के तालाबों, नालों की सीमाएँ और भूमि से संबंधित विवरण आसानी से देखे जा सकेंगे। इससे लोग सरकारी भूमि या तालाबों से जुड़े क्षेत्रों में प्लॉट खरीदकर ठगी का शिकार होने से बच सकेंगे।
पोर्टल में जिला, मंडल, गाँव, झील का नाम या भौगोलिक निर्देशांक दर्ज करने पर संबंधित स्थान स्वत ज़ूम होकर दिखाई देगा। इसके साथ ही एफटीएल सीमाएँ और बफर ज़ोन भी स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। हालाँकि प्रारंभिक कुछ सप्ताह तक इस पोर्टल का उपयोग केवल हैद्रा के आंतरिक कार्यों के लिए किया जाएगा। पूरी तरह विकसित होने के बाद इसे आम जनता के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
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