ज्ञान व प्रेम का समावेश ही प्रदान करता है पूर्णता : सद्गुरु रमेशजी

हैदराबाद, बिना ज्ञान के भक्ति व प्रेम अधूरे हैं। कृष्ण जी का अवतार ज्ञान अवतार और राधा जी का अवतार प्रेम अवतार है। दोनों का योग ही मानव का उद्धार करता है। उक्त उद्गार बंजारा हिल्स स्थित अवर पैलेस में आयोजित होली मिलन के विशेष सत्संग में सद्गुरु रमेशजी ने अभिव्यक्त किए। विषय को विस्तार देते हुए सद्गुरु ने कहा कि ज्ञान का सुरक्षा कवच प्रेम है और प्रेम का सुरक्षा कवच ज्ञान। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

रमेशजी ने कहा कि जीवन को जीवंत भावनाओं से भर कर रखने के लिए चुलबुलापन भी आवश्यक है, लेकिन यह सब अपनी मर्यादा में रहकर ही करना चाहिए। बुरा ना मानो होली है में यही भाव छिपा है कि हमें सामने वाले के वचनों को या व्यवहार को हंसी-मजाक मानकर टाल देना चाहिए। उस पर चिंतन-मनन करते हुए चिंता नहीं करनी चाहिए। इसके लिए हमें अपने मन में प्रेम की ठंडाई को घोलना पड़ेगा। जब हम सबसे निस्वार्थ प्रेम करने लगेंगे तो प्रेम का नशा हमें आनंदित कर देगा।

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गुरु माँ ने होली के गीतों में छिपे आध्यात्मिक रहस्य को प्रकट करते हुए कहा कि पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश और वायु तत्व में हमें कृष्णा या चेतना के दर्शन करने हैं। किसी की भी बात का बुरा नहीं मानना है, तभी हमारे जीवन में आत्मभाव या ब्रह्म भाव का रंग चढ़ेगा। हमें पूरी सृष्टि कृष्णमय नज़र आएगी। इ

इस विशेष होली मिलन के अवसर पर मधुर वाणी ग्रुप ने आत्म विभोर करने वाले होली के गीत गाए और सभी ने नाचकर-झूमकर भरपूर आनंद उठाया।

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