पहलगाम हमला : अमानुषिक, जघन्य और निंदनीय!
22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बैसारन की खूबसूरत वादी में आतंकियों ने निर्दोष पर्यटकों पर हमला कर दिया। कम से कम 26 लोग मारे गए, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल थे। अनेक घायल हुए। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) के आतंकियों का यह क्रूर, अमानुषिक, जघन्य और निंदनीय हमला न केवल आम लोगों पर हमला है, बल्कि कश्मीर की शांति, पर्यटन और भारत के संकल्प के खिलाफ गहरी साजिश का सूचक है। यही वजह है कि हर ओर कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा और पीड़ितों के लिए न्याय की माँग की आवाज़ें उठ रही हैं।
कहना न होगा कि आतंकियों ने इस हमले का समय बहुत शातिराना ढंग से चुना। यह कोई इत्तफाक नहीं है कि हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस भारत आए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन की यात्रा पर सऊदी अरब में थे। आतंकियों ने भारत को दुनिया के सामने शर्मिंदगी में डालने की कोशिश की। साथ ही, यह हमला उस वक़्त हुआ जब कश्मीर में पर्यटन जोर पकड़ रहा है।
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आतंकी साजिश: अमरनाथ यात्रा और सांप्रदायिक तनाव
अमरनाथ यात्रा भी शुरू होने वाली है। पर्यटकों को निशाना बनाकर आतंकी कश्मीर की अर्थव्यवस्था और शांति की छवि को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं। खासकर 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद बनी सामान्य स्थिति को भंग करने की उनकी दुष्टतापूर्ण मंशा तो खैर जगज़ाहिर है ही।
जाहिर है कि इस हमले से देशभर में शोक और गुस्से की लहर व्याप गई है। पहली बात तो यह कि इस भीषण त्रासदी ने भारत के इस दावे को और पुख्ता कर दिया है कि सीमा पार से आतंकवाद अभी भी एक बड़ी चुनौती है। पाकिस्तान से जुड़े समूहों, जैसे लश्कर-ए-तैयबा, पर शक है।
चश्मदीदों ने बताया कि आतंकियों ने नाम पूछ-पूछ कर गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया, जिससे सांप्रदायिक तनाव फैलाने और कश्मीर की साझा संस्कृति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश हुई। यह कश्मीर की मेहमाननवाजी के खिलाफ है। यह हमला पर्यटकों को डराने और स्थानीय रोजगार को नुकसान पहुँचाने की गहरी साजिश है।
कश्मीर आतंकी हमला: जवाब, रणनीति और एकजुटता
दूसरी बात, यह हमला पहले के हमलों से अलग और बड़ा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सही कहा है कि यह हाल के वर्षों में आम नागरिकों पर सबसे बड़ा हमला है। आतंकी पहले सुरक्षाबलों या प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाते थे, लेकिन इस बार उन्होंने सैर-सपाटे और मौज-मस्ती के लिए आए पर्यटकों को चुना। पास में एक संदिग्ध गाड़ी और आतंकियों के सैन्य कपड़े मिलने से पता चलता है कि यह हमला बहुत सोच-समझकर किया गया। यह भी कहा जा रहा है कि कहीं न कहीं सुरक्षा और खुफिया तंत्र से भारी चूक हुई है!
उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार इस हमले का कड़ा और समझदारीभरा जवाब देगी। देना ही चाहिए! प्रधानमंत्री ने आतंकियों को सजा देने का वादा किया है और गृह मंत्री ने तुरत-फुरत श्रीनगर में सुरक्षा समीक्षा की है। सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस का साझा अभियान जारी है। लेकिन सिर्फ सैन्य कार्रवाई काफी नहीं। पाकिस्तान पर चौतरफा कूटनीतिक दबाव जरूरी है। कश्मीर में पर्यटकों के लिए 24/7 हेल्पलाइन और सहायता अच्छा कदम है, लेकिन पर्यटक स्थलों और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा बढ़ानी होगी।
दुनिया ने इस हमले की निंदा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और यूएई के क्राउन प्रिंस ने इस विषम घड़ी में भारत के साथ एकजुटता दिखाई है। भारत को इस समर्थन को आतंक के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में बदलना होगा। देश में भी सभी को दलगत आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर एकजुटता प्रदर्शित करनी होगी। अतंत यही कि कश्मीर में शांति की राह मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं। इस त्रासदी को आतंकवाद के खिलाफ मजबूत रणनीति, नागरिकों की सुरक्षा और कश्मीर की खूबसूरती को बचाने के लिए प्रेरणा बनाना होगा।
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