पालानीस्वामी ने एसएसटीए नेताओं की ‘घर में नजरबंदी’ पर जताया विरोध, तत्काल रिहाई की मांग की

चेन्नई, एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने सोमवार को माध्यमिक ग्रेड वरिष्ठता शिक्षक संघ (एसएसटीए) के नेताओं की कथित ‘घर में नजरबंदी’ की कड़ी निंदा की और उनकी तुरंत रिहाई की मांग की। पलानीस्वामी ने तमिलनाडु सरकार पर एसएसटीए के चल रहे विरोध प्रदर्शन को संभालने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि घर में नजरबंद किए गए नेताओं को उनके मोबाइल फोन तक की पहुँच से वंचित किया गया। उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षक लगातार 17वें दिन समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और ड्रमुक की चुनावी प्रतिज्ञा को पूरा करने की मांग कर रहे हैं, जिसके कारण स्टालिन सरकार ने सुबह 8 बजे से एसएसटीए के आठ नेताओं समेत राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों को घर में नजरबंद कर दिया।

नजरबंद नेताओं को किसी भी नुकसान की स्थिति गंभीर

पलानीस्वामी ने कहा कि नेताओं के मोबाइल फोन जब्त कर बंद कर दिए गए। उन्होंने कहा कि पुतली मुख्यमंत्री की सरकार विरोध प्रदर्शन को सुचारू ढंग से संभालना नहीं जानती। इस तरह की रणनीति अपनाना और उन्हें अपने मोबाइल तक पहुँच देने से वंचित करना निंदनीय है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा कि यदि नजरबंद किए गए नेताओं को कोई भी मामूली नुकसान पहुँचा, तो इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी।

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पलानीस्वामी ने सरकार से तुरंत गिरफ्तार शिक्षकों को रिहा करने की अपील की। पलानीस्वामी ने बताया कि सरकारी शिक्षक 26 दिसंबर 2025 से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें वे सरकार से उन शिक्षकों के मूल वेतन में असमानताओं को सही करने का आग्रह कर रहे हैं, जो 1 जून 2009 के बाद नियुक्त हुए और जिनकी नियुक्ति इससे पहले हुई थी। प्रारंभ में 3,170 रुपये का मूल वेतन अंतर समय के साथ लगभग 9,000 रुपये तक बढ़ गया है, जिसे वे सुधारने की मांग कर रहे हैं। (भाषा)

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