पंकजा मुंडे ने सैनिकों के बलिदान की तुलना प्रगति के लिए पेड़ कटाई से की, निशाने पर आयीं
मुंबई, महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने सीमा पर सैनिकों के बलिदान और विकास के लिए मैंग्रोव सहित पेड़ों की कटाई के बीच तुलना की, जिससे सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आयीं। कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर क्लिप पोस्ट करते हुए कहा कि तुलना को लेकर मंत्री की ‘समझ’ पर उन्हें खेद है।
मुंबई जलवायु सप्ताह के दौरान एक संवाद में विकास के लिए पेड़ों की कटाई के पीछे के तर्क का बचाव करते हुए मुंडे ने कहा, ‘‘जिस तरह एक मां अपने बेटे का पालन-पोषण करती है और फिर देश के लिए लड़ने के लिए उसे सीमा पर भेजने का साहस या हिम्मत दिखाती है, उसी तरह, अगर हम पेड़ उगाते हैं, तो हमें उन्हें काटना पड़ सकता है, लेकिन हम उन्हें कहीं और लगा सकते हैं।’’
पेड़ों की कटाई को सैनिकों के बलिदान से जोड़ने पर बढ़ा विवाद
मुंडे ने कहा, “चूंकि हमें पेड़ों का संरक्षण करना है, इसलिए प्रगति को ना नहीं कहा जा सकता। प्रगति के लिए अगर हमें पांच पेड़ काटने पड़ें, तो हम दस और पेड़ उगा सकते हैं। यही एकमात्र उपाय है।”मुंडे ने कहा कि पेड़, सैनिकों की तरह, जीवित रहते हुए लोगों की रक्षा करते हैं और हटाये जाने पर विकास में योगदान देते हैं।
भाजपा नेता मुंडे ने कहा, “इन पेड़ों को सैनिकों की तरह समझिए। जब तक ये जीवित हैं, ये हमारी रक्षा कर रहे हैं और अगर इन्हें काट भी दिया जाए, तो भी ये विकास के लिए काम कर रहे हैं।” ये टिप्पणी मुंबई में मैंग्रोव की कटाई और शहरी अवसंरचना परियोजनाओं को लेकर जारी बहस के बीच आई है।
मंत्री मुंडे ने कहा, “लोग आराम से जलवायु मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं, वहीं सैनिक देश के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर बर्फ और रेगिस्तान में खड़े हैं। हम यहां पांच सितारा होटल में बैठकर मुंबई जलवायु सप्ताह के बारे में बातें कर रहे हैं, चाय-कॉफी और बिस्कुट का आनंद ले रहे हैं, लेकिन कोई बर्फ और रेगिस्तान में खड़ा होकर हमारे लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहा है।’’ (भाषा)
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