पश्चिम एशिया से लौटे लोगों ने ली राहत की सांस

दिल्ली, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच उस क्षेत्र से लौटे लोगों ने स्वदेश पहुंच कर राहत की सांस ली और वहां के अनुभव साझा किए।

ऐसे ही एक यात्री सुनील गुप्ता ने कहा कि मुझे उड़ान के दौरान भी कोई राहत नहीं मिली, जब तक मैं दिल्ली में नहीं उतर गया, मुझे चैन नहीं था। सुनील गुप्ता उन कई यात्रियों में से एक हैं जो अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण घर लौटे हैं। इस संघर्ष ने दैनिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है और कई भारतीय अब भी वहां फंसे हुए हैं। दुबई से लौटे गुप्ता ने कहा कि वहां काफी अनिश्चितता थी।

गुप्ता ने कहा कि मैं बहुत चिंतित था क्योंकि मैंने पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया। दुनिया भर में जो कुछ हो रहा था उसे देखकर मैं बहुत परेशान था। मैं बस किसी तरह अपने घर, अपने परिवार के पास लौटना चाहता था। नोएडा निवासी अरविंद भी दुबई से लौटे। उन्होंने बताया कि उड़ानें रद्द होने के बाद कई लोग फंस गए। उन्होंने कहा कि लोग कुछ ही दिनों के लिए वहां गए थे और वे खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं। वहां फंसे हुए पर्यटकों को गंभीर आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है। यह इस समय उनकी सबसे बड़ी समस्या है।

ईरान में छात्रावास के पास धमाके, भारतीय छात्राएं दहशत में

अरविंद ने कहा कि जिस उड़ान के लिए उन्होंने बुकिंग की थी, वह रद्द हो गई, जिसके कारण उन्हें चार दिन और रुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौरान, हम अपने आसपास की घटनाओं को देख रहे थे। मैंने खुद आसमान में विस्फोट देखे, लेकिन उन्हें (मिसाइलों को) मार गिराया जा रहा था। हालांकि मिसाइलों को मार गिराया गया, लेकिन ऐसी घटना को देखना भय पैदा करता है। ईरान में पढ़ रही एक भारतीय छात्रा के पिता कुंवर शकील अहमद ने बताया कि उनकी बेटी के छात्रावास के पास का माहौल भयावह है।

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अहमद ने कहा कि धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। जो भी मिसाइलें दागी जा रही हैं, वे उनके छात्रावास के पास गिर रही हैं। उसने मुझे बताया कि पास में हुए एक धमाके के बाद छात्रावास की छत एक हिस्सा गिर गया। आप कल्पना कर सकते हैं कि लड़कियां किस दौर से गुजर रही होंगी। उन्होंने मंगलवार सुबह फोन पर अपनी बेटी से बात की। मस्कट से लौटे सुहैल अहमद ने कहा कि हवाई अड्डों पर देरी और अनिश्चितता ने स्थिति को और खराब कर दिया है। उन्होंने कहा कि वहां अफरा-तफरी मची हुई थी। बच्चों वाले परिवार अधिक परेशान थे और कई लोगों के पास पैसों की भी कमी हो रही थी। ऐसे में, अधिकारियों को बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। (भाषा)

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