मेष संक्रांति पर करें सत्तू का दान
हिन्दू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति का विशेष महत्व है। जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस समय को संक्रांति कहा जाता है। आज सूर्यदेव मीन राशि की अपनी यात्रा समाप्त करके मेष राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। इसे मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है। भारतीय संस्कृति में यह दिन केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि नई फसल, नए उत्साह और दान-पुण्य का महापर्व है।
मेष संक्रांति पर सत्तू का दान करने की परंपरा है। सत्तू मुख्य रूप से भुने हुए चने से बनता है, जो गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक देने वाला आहार है। धार्मिक दृष्टि से सत्तू का दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो अप्रैल के महीने से गर्मी बढ़ने लगती है, ऐसे में सत्तू शरीर को ठंडा रखता है और ऊर्जा प्रदान करता है।
इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को सत्तू, जल, फल और वस्त्र का दान करना बहुत ही फलदायी माना गया है। मेष संक्रांति की सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित करके विशेष चीजों का दान करने की परंपरा है। इस दिन सत्तू, गुड़, जल, पंखा, वस्त्र और फल का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर सकारात्मकता अपनाने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मेष संक्रांति के दिन सूर्यदेव की विशेष पूजा – अर्चना करने से जीवन में ऊर्जा, सफलता और सकारात्मकता का संचार होता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण के प्रभाव को और अधिक मजबूत करता है, जिससे दिन बड़े हो जाते हैं और मौसम गर्म होने लगता है। यही कारण है कि इसे नई शुरुआत, उन्नति और शुभ कार्यों के आरंभ का समय माना जाता है।
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