प्रधानमंत्री डिब्रूगढ़ जिले में आपातकालीन लैंडिंग सुविधा का किया उद्घाटन
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के डिब्रूगढ़ जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने मोरन बाईपास पर आपातकालीन लैंडिंग सुविधा का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री आज सुबह आपातकालीन लैंडिंग सुविधा पर उतरे। प्रधानमंत्री ने लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों का हवाई प्रदर्शन भी देखा, जिसमें भारतीय वायु सेना के सुखोई Su-30MKI, राफेल, AN-31, ताजेश और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टरों ने भाग लिया।
भारत के चार शहरों के लिए पीएम-ईबस सेवा योजना
यह आपातकालीन लैंडिंग सुविधा पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की पहली सुविधा है, जिसे भारतीय वायु सेना के समन्वय से आपात स्थिति में सैन्य और नागरिक विमानों के उतरने और उड़ान भरने में सहायता के लिए डिजाइन और निर्मित किया गया है। प्रधानमंत्री गुवाहाटी के लिए रवाना हो गए हैं। वे वहां 5 हजार 450 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे, जो गुवाहाटी और उत्तरी गुवाहाटी को जोड़ता है।

प्रधानमंत्री लाचित घाट जाएंगे, जहां वे कामरूप जिले के अमीनगांव में स्थित आईआईएम गुवाहाटी के अस्थायी परिसर और उत्तर पूर्वी क्षेत्र के राष्ट्रीय डेटा केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, प्रधानमंत्री भारत के चार शहरों के लिए पीएम-ईबस सेवा योजना के तहत 225 इलेक्ट्रिक बसों को भी रवाना करेंगे। इनमें गुवाहाटी के लिए 100 बसें, नागपुर और भावनगर के लिए 50-50 बसें और चंडीगढ़ के लिए 25 बसें शामिल हैं। प्रधानमंत्री का गुवाहाटी में भाजपा कार्यकर्ताओं के बूथ सम्मेलन को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री आज शाम को नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
प्रधानमंत्री ने असम के मोरान में वायुसेना के विमानों के हवाई करतब देखे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) पर शनिवार को वायु सेना के लड़ाकू विमानों और परिवहन हेलीकॉप्टर के हवाई करतब देखे। पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी तरह की पहली 4.2 किलोमीटर लंबी यह ईएलएफ मोरान में विकसित की गई है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान किया।
बीस मिनट से अधिक समय के हवाई करतब में वायुसेना के पायलटों ने मोरान बाईपास स्थित ईएलएफ से सटीक उड़ान भरी और उतरे। सबसे पहले सुखोई-30 एमकेआई और उसके बाद राफेल विमान ने उड़ान भरी। माल और यात्रियों दोनों के परिवहन के लिए डिजाइन वायुसेना के ‘वर्कहॉर्स’ एएन-32 विमान ने भी करतब दिखाया।

इसके बाद सुखोई-30 एमकेआई और राफेल के तीन-तीन विमानों के समूह ने तेजी से लगातार अंतराल में मोरान के आसमान में उड़ान भरी। हवाई करतब के दौरान एक-एक सुखोई-30 एमकेआई और राफेल विमान ईएलएफ पर उतर गए, लेकिन अन्य विमान उतरे बिना या हवाई पट्टी को छुए बिना ही फिर ऊपर उड़ गए। स्वदेशी उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) ने एक खास तरह का सैन्य अभ्यास दिखाया, जिसमें कमांडो हवाई पट्टी पर उतरते दिखे।
एएलएच के एक अन्य विमान ने राहत अभियान और चिकित्सा निकासी प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने पहले कहा था कि किसी ईएलएफ पर इस तरह का यह पहला “विस्तृत” अभ्यास होगा, जिसमें करीब 16 विमान भाग ले रहे हैं।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से मोरान बाईपास पर विकसित इस ईएलएफ को आपात स्थिति में सैन्य और नागरिक विमानों के उतरने व उड़ान भरने में मदद के लिए वायुसेना के समन्वय से विशेष रूप से डिजाइन और बनाया गया है(भाषा)(PIB)
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