बैंक खाता फ्रीज करने के लिए सबूत अनिवार्य : हाईकोर्ट
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि वैध सबूतों के बिना बैंक खाता फ्रीज करना अमान्य है। अदालत ने यह भी कहा कि अपराध से किसी प्रकार का कोई संबंध न होने पर एकपक्षीय कार्रवाई के तहत बैंक खाता फ्रीज करना व्यापार और वाणिज्य के प्राथमिक अधिकारों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि यह जीवनोपार्जन को प्रभावित करता है।
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि सैद्धांतिक रूप से बैंक खाते को फ्रीज करना जीवन जीने के अधिकार समेत संविधान के अनुच्छेद-19(1)(ज) के अनुसार व्यापार, वाणिज्य करने की स्वेच्छा का उल्लंघन करना है। उत्तर-प्रदेश के इटावा ज़िला साइबर अपराध पुलिस विभाग के आदेश पर एक निजी बैंक के खाते को फ्रीज करने को अन्यायपूर्ण बताते हुए खम्मम के दी बॉटल रेस्टोरेंट एण्ड बार के संचालक कंडीबंडा श्रीधर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
बिना कारण बैंक खाता फ्रीज करना अवैध: हाईकोर्ट
इस याचिका पर सुनवाई पूर्ण करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस वी. वेणुगोपाल ने अपना फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने फ्रीज किए गए बैंक खाते को पुन बहाल करने के आदेश जारी किए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि संबंधित मामले के एफआईआर में याचिकाकर्ता का नाम नहीं है और फ्रीज किए गए खाते को पुन बहाल करने के लिए आवेदन करने पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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दलील सुनने के पश्चात न्यायाधीश ने कहा कि मामले की जाँच-पड़ताल के दौरान एक बैंक खाते को फ्रीज करने का अधिकार है, लेकिन खातेदार को यह नहीं बताया गया कि उसके बैंक खाते को फ्रीज क्यों किया गया। ऐसा करना अमान्य है। बैंक खाते को स्थाई रूप से एकपक्षीय निर्णय के तहत फ्रीज करना भी अमान्य है। न्यायाधीश ने वैधानिक रूप से बैंक खाते का संचालन करने के लिए फ्रीज किए गए बैंक खाते को पुन बहाल करने के लिए इटावा के पुलिस अधीक्षक को आदेश जारी करते हुए अपना फैसला सुनाया।
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