संपत्ति कर यथावत : जीएचएमसी सीमा विस्तार से संबंधित संशोधित विधेयक पारित
हैदराबाद, आईटी, उद्योग एवं विधायी मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने विधानसभा में कहा कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में अन्य 27 शहरी निकायों का विलय विकासात्मक गतिविधियों में एकीकरण एवं प्रशासन में समरसता लाने के लिए किया गया है। सरकार इस बहाने संपत्ति कर में वृद्धि की कोई योजना नहीं रखती। उन्होंने स्पष्ट किया कि संपत्ति कर में वृद्धि नहीं की जाएगी।
तेलंगाना विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम संशोधन विधेयक एवं तेलंगाना नगरपालिका संशोधन से संबंधित तीन विधेयक चर्चा के बाद पारित किये गये। इस पर विपक्ष एवं पक्ष के विधायकों द्वारा उठाए गये मुद्दों पर मुख्यमंत्री की ओर से उत्तर देते हुए मंत्री श्रीधर बाबू ने कहा कि संपत्तिकर में वृद्धि से संबंधित शंकाएं निराधार हैं। वर्तमान में इसमें वृद्धि का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
मंत्री ने कहा कि जीएचएमसी के विस्तारीकरण के उद्देश्य और जल्दबाज़ी के बारे में विस सदस्यों द्वारा बार-बार पूछा गया है। इस बारे में स्पष्ट है कि सरकार ओआरआर के भीतर शहरी क्षेत्रों में समान रूप से विकासात्मक गतिविधियों को तेज़ करना चाहती है और यह प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 से पहले पूरी की जानी थी, इसलिए इसमें जल्दी की गयी। उन्होंने अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा भवन नियमितीकरण योजना (बीआरएस) के बारे में पूछने पर बताया कि यह मामला अदालत में है।
जीएचएमसी विस्तार से विकास और नागरिक सुविधाएं सुलभ होंगी
इसमें तेज़ी लाने के प्रयास किये जाएंगे और संपत्तिकर के दायरे में जो भवन नहीं हैं, उन्हें संपत्तिकर के दायरे में लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों का पालन करते हुए पूरी की गयी है। शहरी क्षेत्र में राज्य नगर निगम, पंचायत राज एवं ग्रेटर हैदराबाद जैसे तीन अलग अलग व्यवस्थाओं के बजाय एक ही व्यवस्था में लाने से विकास को गति दी जा सकेगी, नागरिक सुविधाएं सुलभ होगी, भवन निर्माण सहित विभिन्न नियमों में एकीकरण होगा और योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जा सकेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जीएचएमसी परिधि में आवश्यकता के अनुसार स्टाफ नियुक्त किया जाएगा।
विधेयक संशोधन से संबंधित मुख्यमंत्री की लिखित टिप्पणी में कहा गया है कि सरकार ने आउटर रिंग रोड तक विस्तारित कोर अर्बन रीजन को महानगरीय विकास का प्रमुख इंजन और राज्य के एक महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। भौगोलिक रूप से सीमित होने के बावजूद यह क्षेत्र सकल राज्य घरेलू उत्पाद में असमान रूप से उच्च योगदान देता है तथा आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और संस्थागत गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।
निरंतर जनसंख्या वृद्धि, बढ़ते घनत्व और महानगरीय क्षेत्र के विस्तार के कारण जलापूर्ति, सीवरेज, जल निकासी, सड़क संपर्क, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं जैसी नागरिक सुविधाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनमें से कई सेवाएँ महानगरीय स्तर पर कार्य करती हैं और अनेक स्वतंत्र स्थानीय निकायों के माध्यम से उनका प्रभावी ढंग से नियोजन, क्रियान्वयन और प्रबंधन संभव नहीं है। इसलिए इसमें आवश्यकतानुसार संशोधन किये गये हैं।
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शहर में कुत्ते, कबूतर और मच्छर समस्या पर चिंता जताई
मजलिस विधायक दल के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने जीएचएमसी के विस्तार तथा परिसीमन का स्वागत तो किया, लेकिन इसकी प्रक्रिया पर ढेर सारे सवाल उठाते हुए कहा कि विधिवत प्रक्रिया पर अमलावरी नहीं की गयी और जल्दबाज़ी में निर्णय लिया गया। उन्होंने यह विधेयक सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की। जीएचएमसी विस्तार से संबंधित विधेयकों पर चर्चा के दौरान अकबरुद्दीन ने कहा कि इस प्रक्रिया में विपक्ष तो विपक्ष सत्ता पक्ष के सदस्यों को भी विश्वास में नहीं लिया गया।
एक ही दिन में कई गंभीर निर्णय लिये गये। उन्होंने इस निर्णय के आधार और जल्दबाज़ी पर भी प्रश्न उठाए। साथ ही इस प्रक्रिया के बीच जारी किये जा रहे बयानों में जीएचएमसी आयुक्त के लिए ऑनरेबल शब्द के उपयोग पर भी आपत्ति जतायी।ओवैसी ने शहर में कुत्तों, कबूतरों तथा मच्छरों की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन को इस बारे में उचित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर कबूतरों को दाना डालने की परंपरा पर रोक लगनी चाहिए।
इससे होने वाली बीमारियों के बारे में भी जागरूकता लाने पर उन्होंने जोर दिया। उन्होंने शहर में बढ़ते प्रदूषण को गंभीरता से लेने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे भविष्य में परिस्थितियाँ काफी गंभीर हो सकती हैं। सड़कों पर बढ़ती ट्रैफिक समस्याओं, स्ट्रीट लाइट एवं कर्मचारियों की कमी आदि विषय उठाते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगे।
भाजपा ने किया विधेयक का विरोध
भारतीय जनता पार्टी के विधायक पी.हरीश बाबू ने जीएचएमसी के विस्तार और वार्डों के परिसीमन का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह एक राजनीतिक दल को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से की गयी कार्रवाई है। उन्होंने इस निर्णय के आधार और जल्दबाज़ी पर भी प्रश्न उठाए।
विधानसभा में जीएचएमसी संशोधन विधेयकों पर चर्चा के दौरान पालवाई हरीश बाबू ने कहा कि यह विस्तारीकरण विकेंद्रीकरण के खिलाफ है और अवैज्ञानिक तरीके से किया गया है। प्रशासन जीएचएमसी के पहले स्वरूप में ही संचालन में विफल रहा है, अब इसके विस्तार से और व्यवस्था खराब कर दी गयी है। इससे हरित प्रदेश के कम होने तथा संपत्ति कर में वृद्धि कर जनता पर अधिक बोझ डालने का खतरा है। इससे मेडचल और संगारेड्डी का अस्तित्व भी खतरे में है। उन्होंने कहा कि विलय में स्पष्टता नहीं है और कई तरह की खामियाँ भी हैं।
भाजपा के विधायक महेश्वर रेड्डी ने कहा कि इस विलय में कुछ ग्राम भी शामिल हैं, जहाँ पहले मनरेगा के अंतर्गत लोगों को रोजगार मिलता था, अब वे शहरी क्षेत्र में शामिल हो गये हैं तो उन्हें रोजगार कौन देगा। मंत्री श्रीधर बाबू ने तत्काल टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही ग्रामीण रोजगार योजना को बदल दिया है और विधायक महेश्वर रेड्डी को चाहिए कि वे केंद्र सरकार से शहरी बेरजोगारों के लिए एक विशेष योजना की मांग करें। इस चर्चा में भाकपा के कूनमनेनी सांबाशिव राव एवं कांग्रेस के मलरेड्डी रंगारेड्डी ने भी विचार रखे।
शीत सत्र का बहिष्कार करेगी बीआरएस
भारत राष्ट्र समिति ने तेलंगाना विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शेष कार्रवाई में भाग लेने से इनकार करते हुए पूरे सत्र के बहिष्कार की घोषणा की है। विपक्ष की प्रमुख पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष पर मुख्यमंत्री और सरकार के इशारे पर कार्रवाई करने के गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे सत्र में बाहर रहने का निर्णय लिया है।
शुक्रवार को सदन की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री के भाषण और स्पीकर द्वारा बात करने का समय न देने से नाराज़ होकर सदन से बाहर निकलने के बाद बीआरएस के विधानसभा सदस्यों ने विधानसभा से लेकर गनपार्क तक रैली निकाली और मुख्यमंत्री तथा सरकार के विरोध में नारे लगाये। बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए विस में बीआरएस के उपनेता हरीश राव ने कहा कि मूसी नदी की बदबू से ज़्यादा बदबू मुख्यमंत्री के शब्दों से आ रही है।
मुख्यमंत्री और स्पीकर के रवैये पर विपक्ष ने कड़ी आलोचना की
जहाँ राहुल गांधी पूरे देश में हाथ में संविधान लेकर घूम रहे हैं, वहीं यहाँ रेवंत रेड्डी विधानसभा में संविधान की हत्या कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा के स्पीकर द्वारा एकतरफा ढंग से चलाने और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के अलोकतांत्रिक व असभ्य व्यवहार के विरोध में बीआरएस पार्टी ने शेष विधानसभा सत्रों का पूरी तरह बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
हरीश राव ने कहा कि सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार से सवाल करना विपक्ष की जिम्मेदारी है, लेकिन ऐसा करने पर माइक बंद कर दिए गए। उन्होंने मुख्यमंत्री के रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सदन में पूछे गए सवालों का जवाब देने के बजाय बयानबाज़ी की जी रही है। तेलंगाना राज्य आंदोलन के नेता और दस वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे केसीआर के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।
केसीआर के खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा निंदनीय है। उन्होंने कहा कि स्पीकर को सदन में सभी को समान अधिकार देने चाहिए थे, लेकिन वे पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। पूर्व मंत्री जगदीश रेड्डी ने कहा कि उन्होंने बहिर्गमन नहीं, बल्कि बहिष्कार किया है। विधानसभा स्पीकर से उन्होंने पीपीटी पर प्रस्तुति की मांग की थी, जिसे पूरा नहीं किया गया। न केवल हरीश राव, बल्कि उप नेता सबिता इंद्रा रेड्डी, तलसानी श्रीनिवास यादव एवं सुनीता लक्ष्मारेड्डी को भी बात करने की अनुमति नहीं दी गयी।
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