सार्वजनिक रूप से किसी महिला का हिजाब खींचना अनैतिक ही नहीं, आपराधिक हरकत भी है

दरअसल, मुख्यमंत्री हो या कोई साधारण व्यक्ति, जब वह किसी महिला के शरीर या वस्त्रों को उसकी सहमति के बिना स्पर्श करता है, तो उसी पल क़ानून सक्रिय हो जाता है। नीतीश कुमार के खिलाफ कोई क़ानूनी कार्यवाही होगी? ऐसा मुश्किल ही लगता है। लेकिन नीतीश कुमार को अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए कम से कम इतना तो करना ही चाहिए कि संबंधित डॉक्टर को बुलाकर उसके सिर पर पितृभाव से आशीर्वाद का हाथ रखें और इस बहस पर विराम लगायें। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं, तो सियासी गलियारे में उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं अधिक तेज़ हो जायेंगी।

नीतीश कुमार द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में 10वीं बार शपथ लेने के बाद से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर अतिरिक्त प्रश्न उठने लगे हैं। हालांकि 74 वर्षीय नीतीश कुमार, उनके परिवार, कार्यालय या पार्टी की तरफ से ऐसी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है कि वह किसी मानसिक रोग से पीड़ित हैं या उनका इलाज चल रहा है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर उनके हाव-भाव से ऐसा प्रतीत अवश्य होता है कि सब कुछ ठीक नहीं है।

अगर सब सामान्य होता तो धर्मनिरपेक्षता व महिला अधिकारों के पक्षधर नीतीश कुमार कम से कम सबके सामने तो कोई आपत्तिजनक हरकत न करते। गौरतलब है कि 15 दिसंबर 2025 को पटना में आयोजित संवाद कार्पाम में नीतीश कुमार नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र वितरित कर रहे थे और जब डॉ.नुसरत परवीन अपना सर्टिफिकेट लेने के लिए आयीं तो नीतीश कुमार ने हंसते हुए उनका हिजाब खींच लिया। इस घटना का जो वीडियो वायरल है, उसमें देखा जा सकता है कि उनकी इस हरकत पर पृष्ठभूमि में कुछ लोग हंस रहे हैं, जबकि उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी नीतीश कुमार को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।

डॉ.नुसरत परवीन नीतीश की हरकत से गहरा आहत और नाराज़

नीतीश कुमार की इस निंदनीय हरकत से डॉ.नुसरत परवीन इस हद तक आहत व अपमानित महसूस कर रही हैं कि वह नौकरी ही नहीं बल्कि बिहार छोड़ने पर आमादा हैं, जबकि उनके परिजन उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि गलती उनकी नहीं है, एक अन्य व्यक्ति की है, उन्हें अपने कॅरियर को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। नौकरी ज्वाइन करने की तिथि 20 दिसंबर 2025 है।

इस बीच समाजवादी पार्टी की नेता सुमैया राणा ने लखनऊ के कैसरबाग पुलिस स्टेशन में नीतीश कुमार व उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद के खिलाफ इस संदर्भ में शिकायत दर्ज की है और सख्त कार्यवाही की मांग की है। गौरतलब है कि संजय निषाद ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए नीतीश कुमार का समर्थन किया व कहा था, इस पर लोगों को हो-हल्ला नहीं करना चाहिए।

अरे, वो भी आदमी हैं न, पीछे नहीं पड़ना चाहिए, नकाब छू दिया तो इतना क्या हो गया, कहीं और छू देते तो क्या हो जाता। निषाद के इस बेतुके समर्थन पर जब चौतऱफा आलोचना हुई तो उन्होंने यू-टर्न लेते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी को संदर्भ से अलग करके प्रचारित किया गया, संदर्भ को समझना चाहिए कि पूर्वांचल में बात को टालने का यही परंपरागत तरीका है। बहरहाल, इस लेख के लिखे जाने तक नीतीश कुमार या उनके कार्यालय की तरफ से इस मामले में कोई टिप्पणी या स्पष्टीकरण नहीं आया था।

विपक्ष और समाजवादी कार्यकर्ताओं ने कड़ी आलोचना की

इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि नीतीश कुमार की निंदनीय हरकत न सिर्फ अनैतिक है बल्कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79 के तहत आपराधिक भी है, जो किसी महिला की गरिमा (मोडेस्टी) को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द, हाव-भाव या हरकत करने को अपराध बनाती है, जिसके लिए 3 साल तक की सज़ा और जुर्माना हो सकता है। यही वजह है कि नीतीश कुमार की हरकत को कोई भी सभ्य व समझदार व्यक्ति उचित नहीं ठहरा सकता।

उनकी इस हरकत की न सिर्फ भारत में चौतऱफा आलोचना व निंदा हो रही है, विशेषकर महिलाओं द्वारा बल्कि अब अरब मुल्कों ने भी इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करायी है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि हिजाब कॉस्टयूम नहीं बल्कि आस्था का प्रतीक है और किसी महिला को सार्वजनिक तौरपर अपमानित करना अस्वीकार्य है। बहरहाल, नीतीश कुमार की हरकत से सत्ता, मर्यादा और सार्वजनिक आचरण को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

मुख्यमंत्री की भूमिका, विपक्ष की प्रतिक्रिया और महिला अधिकारों से जुड़े सवालों ने इस मामले को राजनीतिक व संवैधानिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। महिलाओं के वोट से बिहार चुनाव जीतकर फिर से मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार एक बार फिर महिला सम्मान के मुद्दे पर घिर गये हैं। जद(यू) नेता नीतीश कुमार की इस अशोभनीय हरकत को पितृभाव वाला व्यवहार बताकर बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि विपक्ष और महिला कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं।

नीतीश कुमार की आपत्तिजनक हरकतों से महिला गरिमा पर सवाल

यह कैसा पितृभाव है, जो एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाता है? वैसे नीतीश कुमार पहले भी अनेक आपत्तिजनक हरकतें कर चुके हैं। मसलन, कभी वह विधानसभा में महिला-पुरुष के रिश्ते पर खुलकर बातें करते हैं (जिसकी ज़बरदस्त आलोचना हुई थी), कभी किसी के सिर पर गमला रख देते है, तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में अपने हाथों से उलटे-सीधे इशारे करते हैं, जिसे देखकर मोदी भी नाराज़ दिखायी दिये। इस किस्म की बातों को लेकर नीतीश कुमार की मानसिक सेहत पर सवाल उठते रहे हैं।

अगर नीतीश कुमार वास्तव में मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं, तो उनका मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर बने रहना ठीक नहीं है, इससे राज्य को बड़ा नुकसान हो सकता है। उनकी जगह तुरंत प्रभाव से किसी योग्य व्यक्ति को बैठाना चाहिए। जद(यू) नेता सत्य प्रकाश मिश्रा इस बात से सहमत नहीं हैं कि नीतीश कुमार मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। उनका कहना है कि नीतीश कुमार विधानसभा में ठीक से काम कर रहे हैं, बाहर भी सक्रिय हैं और सड़कों पर भी दिखते हैं, हर जगह वो मौजूद हैं, सब ठीक से चल रहा है।

अगर मिश्रा की बात सही है तो नीतीश कुमार ने महिला डॉक्टर का हिजाब जान-बूझकर खींचा, जोकि एक दंडनीय अपराध है। दोनों स्थितियां मानसिक स्वास्थ्य व जान-बूझकर नितीश कुमार को ही कटघरे में खड़ा करती हैं। राजद नेता प्रियंका भारती के अनुसार, अगर नीतीश कुमार मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं तो फिर वह संवैधानिक रूप से जनप्रतिनिधि बनने के योग्य भी नहीं हैं और अगर वो मानसिक रूप से स्वस्थ हैं व जान-बूझकर किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं तो उनके विरुद्ध क़ानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।

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नीतीश कुमार का कृत्य अनुच्छेद 21 और 25 का स्पष्ट उल्लंघन

इस सिलसिले में महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री है या किसी पद पर है, उससे अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती है। यह सिर्फ हिजाब का मुद्दा नहीं है, यह महिला की शारीरिक सहमति व उसकी शारीरिक स्वायत्तता का सवाल है, जिसे बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हमारे संविधान का अनुच्छेद 21 स्पष्टता के हर इंसान को गरिमा की गारंटी देता है और अनुच्छेद 25 भी बहुत साफ कहता है कि धर्म की स्वतंत्रता अनिवार्य है।

डॉ. अनिता राठौर
डॉ. अनिता राठौर

नीतीश कुमार का यह कृत्य एक साथ इन दोनों अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है। दरअसल, मुख्यमंत्री हो या कोई साधारण व्यक्ति, जब वह किसी महिला के शरीर या वस्त्रों को उसकी सहमति के बिना स्पर्श करता है, तो उसी पल क़ानून सक्रिय हो जाता है। नीतीश कुमार के खिलाफ कोई क़ानूनी कार्यवाही होगी? ऐसा मुश्किल ही लगता है। लेकिन नीतीश कुमार को अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए कम से कम इतना तो करना ही चाहिए कि संबंधित डॉक्टर को बुलाकर उसके सिर पर पितृभाव से आशीर्वाद का हाथ रखें और इस बहस पर विराम लगायें। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं, तो सियासी गलियारे में उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएं अधिक तेज़ हो जायेंगी।

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