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राज्य की बेहतरी के लिए उठाए गए अनेक कदम : एन. इंद्रसेन रेड्डी

त्रिपुरा के 20वें राज्यपाल एन. इंद्रसेन रेड्डी त्रिपुरा के विकास और पेंद्र-राज्य समन्वय पर ध्यान पेंद्रित करते रहे हैं। राज्यपाल के अनुसार, त्रिपुरा में अनेक पर्यटन-स्थल हैं। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य, अभ्यारण्य, महल आदि पर्यटकों को बेहद आकर्षित करते हैं। चूंकि राज्य की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। भारत में केरल के बाद सबसे ज्यादा रबर का उत्पादन त्रिपुरा में होता है। बांस के उत्पादन में भी त्रिपुरा अग्रणी राज्य है।

भारतीय भाषाओं के बारे में बात करते हुए, उन्होंने बताया कि तेलुगु भाषी होने के बावजूद पहली बार उन्होंने विधानसभा में और गणतंत्र-दिवस पर अंग्रेजी में भाषण दिया था, लेकिन उसके बाद हिन्दी में भाषण दिया। अब बांग्ला भाषा सीख रहे हैं ताकि न सिर्फ राज्य के लोगों से जुड़ सकें बल्कि भारतीय भाषाओं को अपने व्यवहार में ला सपें। ज्ञातव्य है कि उनसे मुलाकात के करीब एक महीने बाद ही उन्होंने विधानसभा में बजट अभिभाषण बांग्ला में दिया, जिसकी सर्वत्र मुक्तकंठ से प्रशंसा की गई। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा की तीन दिशाओं में लगभग 850 किलोमीटर की सीमा बांग्लादेश से जुड़ी हुई है।

बाल-विवाह रोकने और स्कूल अनुपस्थिति कम करने के लिए नए उपाय

लगभग 120 किलोमीटर की सीमा असम और मेघालय से जुड़ी है। यहां की ज्यादातर आबादी जनजातीय समुदाय की है। इसके अलावा यहां बांग्लादेशी अप्रवासी भी बहुतायत में हैं। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा की साक्षरता दर करीब 97 प्रतिशत है, लेकिन बीच में ही शिक्षा छोड़ देने वाले छात्रों की संख्या भी अधिक है। राज्य में बाल-विवाह जैसी कुप्रथा भी प्रचलित है। इस प्रथा से निजात पाने के लिए उन्होंने ग्रामीण इलाकों में आंगनबाड़ी सहायिकाओं तथा विद्यालयों में स्वयं-सहायता समूहों का गठन किया है।

इनका कार्य यह है कि जो लड़के या लड़कियाँ दो दिन से अधिक विद्यालय में उपस्थित न हों, तो उनकी अनुपस्थित के कारणों का पता लगाया जाए। बतौर राज्यपाल उन्होंने राज्य के करीब 80 प्रतिशत ग्रामीण एवं सीमावर्ती इलाकों का दौरा करते हुए, राज्य के लोगों की बेहतरी के लिए अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि जिन इलाकों में बिजली नहीं थी, वहां सोलार लाइट लगवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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