कच्ची शराब से समाज को नुकसान : उच्च न्यायालय

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने तीव्र असंतोष जताते हुए कहा कि अशुद्ध तरीके से और घातक रसायनों का उपयोग कर तैयार की जाने वाली कच्ची शराब से आम जनता का स्वास्थ्य बुरी तरह से खराब हो रहा है।

अदालत ने कहा कि अवैध रूप से तैयार कर बेची जाने वाली शराब से समाज भी प्रभावित हो रहा है। इस कारण जन सामान्य का जीवन स्तर भी तेजी से गिरता जा रहा है। इतना ही नहीं, आम जनता की आय पर भी इसका विपरीत असर पड़ने के कारण जीवन स्तर भी प्रभावित हो रहा है।

अदालत ने कहा कि साक्षारता बढ़ रही है, लेकिन दूसरी ओर बढ़ते अपराध चिंता का विषय बना हुआ है। इस संदर्भ में अदालत ने किसी भी प्रकार के अपराध में लिप्त व्यक्ति के खिलाफ पीडी एक्ट को अमल में लाने को उचित बताया। हाँलाकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीडी एक्ट के नाम पर आरोपियों को अधिक समय तक बाँधकर रखना भी उचित नहीं है।

अवैध व कच्ची शराब के मामले में अपने पति धरावत धन सिंह के खिलाफ पुलिस द्वारा पीडी एक्ट के तहत कार्रवाई करने को चुनौती देते हुए धरावत लक्ष्मी द्वारा दायर हेबीएस कारपस पिटिशिन पर आज उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस बी.आर. मधुसूदन राव की खण्डपीठ ने सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की संभावना के चलते पीडी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि कच्ची शराब से समाज में शांति व्यवस्था में खलल पड़ सकता है। दलील सुनने के पश्चात खण्डपीठ ने कहा कि मामले की जाँच-पड़ताल के दौरान आरोपी को लम्बे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। खण्डपीठ ने आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों की जाँच-पड़ताल 31 दिसंबर तक पूर्ण करने का आदेश देते हुए अपना फैसला सुनाया।

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