एआई को विनियमित करना संयुक्त राष्ट्र का काम नहीं : गुतारेस

संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम मेधा (एआई) को विनियमित करना संयुक्त राष्ट्र का काम नहीं है। गुतारेस ने बताया कि एआई पर एक वार्षिक वैश्विक वार्ता की योजना बनाई जा रही है जिसमें सभी देशों, सरकारों, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज की भागीदारी होगी। गुतारेस जल्द भारत पहुंचेंगे और वहां वह इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेंगे, जो ग्लोबल साउथ के किसी देश में आयोजित होने वाला कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर पहला शिखर सम्मेलन है।

ग्लोबल साउथ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं। शिखर सम्मेलन के लिए भारत की अपनी यात्रा से पहले पीटीआई-भाषा को दिए एक विशेष साक्षात्कार में गुतारेस ने एआई पर वैश्विक सहयोग के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय संगठन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की और इस बात पर जोर दिया कि ये भारत के नेतृत्व में एआई शिखर सम्मेलन में प्रदर्शित उसकी रणनीति के पूरी तरह से अनुरूप हैं।

गुतारेस ने वैश्विक एआई ढांचे में योगदान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र में शुरू किए गए ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट के तहत तीन प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। कृत्रिम मेधा पर एक नए उच्च स्तरीय स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समिति का गठन होना है, जिसमें दुनिया भर के 40 विशेषज्ञ शामिल होंगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पिछले सप्ताह गुतारेस द्वारा अनुशंसित 40 सदस्यों की स्वतंत्र समिति को नियुक्त किया।

संयुक्त राष्ट्र बनाएगा स्वतंत्र वैज्ञानिक एआई निकाय

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास में डेटा साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (डीएसएआई) विभाग के प्रमुख बालारमन रविंद्रन उन 40 प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के समूह में शामिल हैं, जिनकी सिफारिश गुतारेस ने की है। गुतारेस ने कहा कि इस समिति के माध्यम से हमारे पास एक पूरी तरह से स्वतंत्र और सार्वभौमिक वैज्ञानिक निकाय होगा जो हर पल दुनिया को यह बताने में सक्षम होगा कि एआई के संबंध में हम कहां हैं? क्या प्रगति हुई है? क्या खोजें स्थापित हुई हैं? विभिन्न तंत्रों या उपकरणों के क्या जोखिम हैं और यह सब पूरी तरह से स्वतंत्र तरीके से किया जा सकेगा।

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गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र में कृत्रिम मेधा पर एक वार्षिक वैश्विक संवाद की योजना की ओर भी इशारा किया जिसमें सभी देशों, सरकारों, निजी क्षेत्र के साथ-साथ नागरिक संगठन की भागीदारी होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम मेधा को विनियमित करना संयुक्त राष्ट्र का काम नहीं है। गुतारेस ने कहा कि वैश्विक संवाद एक ऐसा मंच होगा जहां हर कोई आ सकता है और चर्चा कर सकता है, जहां हम एक-दूसरे से सीख सकते हैं। (भाषा)

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